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आम आदमी की पहुंच से दूर होता घर? सस्ते फ्लैट्स की बिक्री 17% गिरी, प्रीमियम प्रॉपर्टीज ने बनाया रिकॉर्ड

घर खरीदने का सपना अब पहले जैसा आसान नहीं रहा. ताजा आंकड़े बताते हैं कि रेजिडेंशियल मार्केट में बिक्री भले ही ऊंचे स्तर पर बनी हुई हो, लेकिन तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. सस्ते और किफायती फ्लैट्स की पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है, जबकि महंगे और प्रीमियम घर रिकॉर्ड बना रहे हैं. यहां जानें पूरी कहानी...

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महंगा हुआ आशियाना (Photo: ITG)
महंगा हुआ आशियाना (Photo: ITG)

आज बात करते हैं उस चीज की जिसे हम जीवन भर की कमाई कहते हैं, यानी आपका अपना घर. हमारे समाज में अक्सर कहा जाता है कि एक मिडिल क्लास आदमी अपनी पूरी जिंदगी की भाग-दौड़ और पाई-पाई की जमा-पूंजी सिर्फ एक घर बनाने के लिए झोंक देता है. लेकिन नाइट फ्रैंक इंडिया की जो ताजा रिपोर्ट सामने आई है, उसे देखकर मन में एक बड़ा सवाल उठता है कि क्या साल 2026 में अपना घर होना अब आम आदमी के लिए सिर्फ एक अधूरा सपना बनकर रह जाएगा? इस रिपोर्ट के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि भारतीय रियल एस्टेट बाजार का मिजाज अब पूरी तरह बदल चुका है और वह अब उस दौर में प्रवेश कर गया है जहां घर खरीदना सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि एक लग्जरी बनता जा रहा है.

साल 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश के टॉप 8 शहरों में कुल 3,48,247 घर बिके हैं. पहली नजर में सुनने में तो यह आंकड़ा काफी बड़ा और बाजार की मजबूती दिखाने वाला लगता है, लेकिन जैसे ही आप इसकी बारीकियों को देखेंगे, तो एक कड़वी हकीकत सामने आएगी. हकीकत ये है कि अब बाजार में सस्ता घर कोई ढूंढ ही नहीं रहा है, या शायद कड़वा सच ये है कि बाजार से आम आदमी के बजट वाले घर अब धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं. तो चलिए समझते हैं कि कैसे रेजिडेंशियल बाजार अब मिडिल क्लास की किफायती उम्मीदों से आगे निकलकर प्रीमियम और महंगे घरों की ओर झुकता चला गया है.

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महंगे घरों की लूट और बजट घरों में सन्नाटा

रिपोर्ट की सबसे बड़ी बात ये है कि अब बाजार में 1 करोड़ रुपये से सस्ते घर की चर्चा ही कम हो रही है. पहली बार ऐसा हुआ है कि 1 करोड़ रुपये से महंगे यानी 'प्रीमियम' घरों ने कुल बिक्री का 50% हिस्सा कब्जा लिया है. इस सेगमेंट में 1.75 लाख घर बिके, जो पिछले साल के मुकाबले 14% की बड़ी बढ़त है. लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू डराने वाला है. वो 50 लाख रुपये से कम वाला घर, जो कभी एक आम परिवार की पहली पसंद होता था, उसकी बिक्री में 17% की भारी गिरावट आई है. मध्यम आय वर्ग (50 लाख से 1 करोड़) में भी 8% की कमी आई है. मतलब साफ है कि बिल्डर अब सस्ते प्रोजेक्ट्स बनाने के बजाय महंगे और लग्जरी फ्लैट्स पर दांव लगा रहे हैं, क्योंकि मुनाफा और मांग वहीं ज्यादा है.

अगर हम शहर दर शहर देखें, तो हर जगह की कहानी अलग है. मुंबई अब भी रियल एस्टेट का 'किंग' बना हुआ है, लेकिन असली चौंकाने वाली खबर दिल्ली-एनसीआर और चेन्नई से आई है.

2025 में किस शहर में क्या रहा हाल 

  • मुंबई: 97,188 घर बिके (+1%) - यह देश का सबसे बड़ा मार्केट बना हुआ है.
  • बेंगलुरु: 55,373 घर बिके (0%) -यहां बाज़ार पूरी तरह स्थिर रहा.
  • दिल्ली-एनसीआर: 52,452 घर बिके (-9%) - यहां कीमतों में 19% का जबरदस्त उछाल आया, जिसकी वजह से बिक्री में गिरावट दिखी.
  • पुणे: 50,921 घर बिके (-3%) - यहां मामूली गिरावट दर्ज की गई.
  • हैदराबाद: 38,403 घर बिके (+4%) - यहां डिमांड अब भी बढ़ रही है और कीमतें 13% चढ़ी हैं.
  • अहमदाबाद: 18,752 घर बिके (+2%) - छोटे बाजारों में यहां स्थिरता दिखी.
  • चेन्नई: 18,262 घर बिके (+12%) - इस शहर ने अपनी रफ़्तार से सबको हैरान कर दिया है.
  • कोलकाता: 16,896 घर बिके (-3%) - यहां बाज़ार थोड़ा सुस्त रहा.

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कीमतें क्यों भाग रही हैं और आगे क्या होगा?

अब आप पूछेंगे कि आखिर कीमतें इतनी क्यों बढ़ रही हैं? तो इसका जवाब सीधा है जमीन महंगी हो गई है, सीमेंट-सरिया के दाम बढ़ गए हैं और अब खरीदार भी छोटे घरों के बजाय बड़े और सुविधाओं वाले घर चाहते हैं. इस पर नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन शिशिर बैजल का मानना है कि 2025 में घरों की यह मांग किसी दिखावे या सट्टेबाजी की वजह से नहीं है, बल्कि यह उन लोगों की वजह से है जिन्हें सच में रहने के लिए घर चाहिए. बाजार अब बस अंधाधुंध भागने के बजाय समझदारी और संतुलन की तरफ बढ़ रहा है. वहीं, सीनियर डायरेक्टर गुलाम जिया का कहना है कि बाजार अब पूरी तरह बदल गया है क्योंकि आधे घर तो 1 करोड़ से ऊपर वाले बिक रहे हैं. चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहर भले ही तेजी दिखा रहे हों, लेकिन कड़वा सच ये है कि बढ़ती कीमतों ने उस आम आदमी को मुश्किल में डाल दिया है जो अपने बजट में छोटा और सस्ता घर ढूंढ रहा था.

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