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भारत में भी घरों की अदला-बदली का ट्रेंड, अजनबियों को दे रहे हैं अपने घर की चाबी

यूरोपीय देशों की तरह अब भारत में भी लोग होटल के बजाय अजनबियों के साथ अपना आशियाना साझा कर रहे हैं. यात्रा के सबसे बड़े खर्च यानी 'ठहरने की लागत' को खत्म करने वाला यह मॉडल न केवल किफायती है, बल्कि यात्रियों को दुनिया भर में एक स्थानीय अनुभव भी देता है.

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भारत में 'होम स्वैपिंग' का नया क्रेज, कैसे काम करता है यह सिस्टम (Photo-ITG)
भारत में 'होम स्वैपिंग' का नया क्रेज, कैसे काम करता है यह सिस्टम (Photo-ITG)

यूरोपीय देशों की तरह अब भारत में भी छुट्टियों के दौरान 'घरों की अदला-बदली' का चलन पिछले कुछ समय से तेजी से बढ़ा है. यूरोपीय देशों खासकर अमेरिका में 'होम एक्सचेंज' यानी घरों की अदला-बदली का चलन दशकों से है, लेकिन भारत में पिछले कुछ वक्त से ऐसा ट्रेंड देखा जा रहा है. पहले जहां भारतीय यात्री छुट्टियों के लिए होटलों और रिसॉर्ट्स पर निर्भर रहते थे, वहीं अब वे अपने घरों के दरवाजे अजनबियों के लिए खोल रहे हैं. 

यह बदलाव केवल पैसे बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक नई 'शेयरिंग इकोनॉमी' और वैश्विक नागरिकता की भावना को दर्शाता है. नोएडा, बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में रहने वाले लोग अब पेरिस, लंदन या केरल के किसी घर के साथ अपने आशियाने की अदला-बदली कर रहे हैं.

भारत में इस ट्रेंड को रफ्तार देने के लिए कई प्लेटफॉर्म्स हैं जैसे HomeExchange.com ने भारत में अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया है, जिसका 'ग्रेस्ट पॉइंट्स' सिस्टम भारतीयों को काफी लुभा रहा है. इसके अलावा, Love Home Swap उन लोगों के लिए पहली पसंद बन रहा है, जो लग्जरी और प्रीमियम घरों की तलाश में हैं. वहीं, Swaphouse जैसे प्लेटफॉर्म्स विशेष रूप से 'डिजिटल नोमैड्स' के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं, जो काम के साथ-साथ घूमने के लिए वाई-फाई युक्त घरों को प्राथमिकता देते हैं. ये प्लेटफॉर्म्स न केवल घरों को मिलाते हैं, बल्कि सुरक्षा और भरोसे का एक पुल भी बनाते हैं.

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होम एक्सचेंज के फायदे

इस ट्रेंड के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण इसकी किफायती होना है. एक सामान्य भारतीय परिवार के लिए विदेश यात्रा या किसी महंगे भारतीय टूरिस्ट स्पॉट पर ठहरना बजट का 50-60% हिस्सा खा जाता है. होम एक्सचेंज में रहने का खर्च कम हो जाता है. इसके अलावा, आपको घर जैसी सुविधाएं मिलती हैं, जैसे खुद का किचन, जहां आप अपने स्वाद का खाना बना सकते हैं, और वाशिंग मशीन जैसी जरूरतें. यह आपको एक 'टूरिस्ट' के बजाय एक 'लोकल' की तरह रहने का मौका देता है, जिससे आप उस शहर की संस्कृति को ज्यादा करीब से जान पाते हैं.

चुनौतियां और जोखिम

सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि इसमें कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं. भारतीयों के लिए अपनी निजता  और सुरक्षा सबसे ऊपर होती है. किसी अनजान व्यक्ति को अपने बेडरूम या किचन का इस्तेमाल करने देना मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है. इसके अलावा, कीमती सामान के टूटने या चोरी होने का डर भी बना रहता है. हालांकि, आधुनिक प्लेटफॉर्म्स आईडी वेरिफिकेशन और 'प्रॉपर्टी डैमेज इंश्योरेंस' देकर इस जोखिम को कम करने की कोशिश करते हैं, फिर भी यह मॉडल हर किसी के स्वभाव के अनुकूल नहीं हो सकता.

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अगर खर्च की बात करें, तो यह मॉडल सस्ता है. HomeExchange जैसे प्लेटफॉर्म्स की सालाना मेंबरशिप फीस भारत में लगभग ₹7,500 से ₹15,000 के बीच होती है. एक बार यह सदस्यता लेने के बाद, आप साल भर में कितनी भी बार दुनिया के 150 से अधिक देशों में किसी भी घर में रुक सकते हैं. यह विशेष रूप से उन मध्यमवर्गीय परिवारों और पत्रकारों के लिए वरदान है जो अक्सर यात्राएं करते रहते हैं. 

एक बार जब आप अपनी पसंद का घर ढूंढ लेते हैं, तो आप प्लेटफॉर्म के माध्यम से उसके मालिक से संपर्क कर सकते हैं. यह अदला-बदली सीधी हो सकती है.

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