कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर जल्द ही पेट्रोल और डीजल पर दिखाई देने लगता है और फिर लॉजिस्टिक खर्च बढ़ने से अन्य चीजों पर भी इसका असर पड़ता है, जिस कारण किचेन और रोजमर्रा की चीजे भी महंगी होने लगती है और घर का मंथली खर्च बढ़ जाता है.
वहीं तेल संकट ज्यादा समय तक टिके तो कंडोम जैसी चीज भी महंगी होने लगती है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जल्द ही भारत में कंडोम के पैकेट के दाम भी बढ़ सकते हैं. भारत की सबसे बड़ी कंडोम निर्माता कंपनी, मैनकाइंड फार्मा ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान जंग जारी रहता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो भारत में कंडोम की कीमतें बढ़ सकती हैं.
मैनफोर्स कंडोम बेचने वाली और देश में लगभग 30% मार्केट हिस्सेदारी रखने वाली कंपनी ने कहा कि अगर मिडिल ईस्ट में स्थिति बिगड़ती है तो वह इसके लागत का भार कस्टमर्स पर डाल सकती है. यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में 50% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से जुड़ी आपूर्ति संबंधी चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है.
अभी कुछ महीने का स्टॉक है
रॉयटर्स ने बताया कि तेल आपूर्ति में रुकावट और शिपिंग संबंधी चिंताओं ने ग्लोबल लेवल पर कच्चे माल की लागत को बढ़ा दिया है. मैनकाइंड फार्मा के सीईओ शीतल अरोरा ने रॉयटर्स को बताया कि कंपनी के पास फिलहाल अगले कुछ महीनों की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो कीमतों में बढ़ोतरी जरूरी हो सकती है.
तेल की कीमतों का कंडोम से क्या कनेक्शन?
दरअसल, कंडोम मुख्य रूप से प्राकृतिक लेटेक्स से बने होते हैं, लेकिन कंपनी कई पेट्रोलियम-संबंधी चीजों जैसे केमिकल, स्नेहक, सिलिकॉन तेल और पैकेजिंग चीजों पर भी निर्भर रहती है. कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ इन चीजों की लागत भी बढ़ जाती है.
यही कारण है कि ईरान जंग और होर्मुज में रुकावट के कारण तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ग्लोबल स्तर पर कंडोम कंपनियों पर दबाव बना रही है. भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाले कंडोम ब्रांडों में से एक मैनफोर्स कंडोम की कीमत अभी 10 कंडोम के पैक के लिए लगभग 100 रुपये से 150 रुपये के बीच है.
समय के साथ बढ़ सकती है लागत
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मैनकाइंड फार्मा की नए तिमाही आय में कच्चे माल की लागत में काफी हद तक स्थिरता बनी हुई है, जिसमें 0.5% से भी कम की वृद्धि हुई है, लेकिन तेल सप्लाई चेन में लगातार रुकावट के कारण समय के साथ इसमें बदलाव आ सकता है.
भारत एक बड़ा मार्केट
भारत में दुनिया के सबसे बड़े कंडोम बाजारों में से एक है, जिसका अनुमान लगभग 860 करोड़ रुपये से 8,170 करोड़ रुपये के बीच है और इसका सालाना उत्पादन 400 करोड़ कंडोम से अधिक है. सरकारी स्वामित्व वाली एचएलएल लाइफकेयर अकेले ही हर साल करीब 221 करोड़ कंडोम का उत्पादन करती है, जबकि मैनकाइंड फार्मा और क्यूपिड लिमिटेड जैसी निजी कंपनियां भारतीय और निर्यात दोनों बाजारों को सेवाएं प्रदान करती हैं.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंडोम की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी गरीब उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा प्रभावित कर सकती है. उन्होंने चेतावनी दी है कि ऊंची कीमतों से कंडोम का यूज कम हो सकता है और इससे हेल्थ संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.