तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बनते ही जोसेफ विजय किसानों को अपने पाले में करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर कपास पर आयात शुल्क हटाने की अपील की है.
दरअसल, घरेलू कपास उत्पादन में कमी और उच्च कीमतों के कारण कपड़ा निर्माताओं को कच्चे माल की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है. इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री विजय ने पीएम मोदी से हस्तक्षेप करने और कपड़ा उद्योग को बचाने के लिए आयात शुल्क को खत्म करने की अपील की है.
केंद्र सरकार से कपास पर मौजूदा 11 फीसदी आयात शुल्क को घटाकर शून्य करने का अनुरोध किया गया है. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण राज्य का कपड़ा और परिधान क्षेत्र गंभीर संकट का सामना कर रहा है.
इंपोर्ट ड्यूटी जीरो करने की मांग
बता दें, भारत में करीब 60 लाख किसान कपास की खेती करते हैं. सस्ते विदेशी कपास की आयात को रोकने के लिए केंद्रीय बजट 2021-22 में कच्चे कपास पर 11 प्रतिशत आयात शुल्क लागू किया गया था. लेकिन उच्च औद्योगिक मांग के मुकाबले कम उत्पादन के कारण सरकार ने अगस्त 2025 में आयाय शुल्क छूट को 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दिया था.
पीएम मोदी को लिखे पत्र में सीएम विजय ने कहा कि कपास और धागे की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी ने कपड़ों के निर्माताओं के सामने संकट खड़ा कर दिया है, ये लाखों मजदूरों की रोजी-रोटी का भी सवाल है. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह उद्योग लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है. कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति अब केवल आयात के माध्यम से ही सुनिश्चित की जा सकती है.
महंगाई की वजह टेक्सटाइल उद्योग संकट में
मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले दो महीनों में कपास की कीमत 54,700 रुपये से बढ़कर 67,700 रुपये प्रति कैंडी हो गई है, जिसमें लगभग 25 करीब 25% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसी दौरान धागे की कीमतें 301 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 330 रुपये प्रति किलो हो गई है.
बता दें, तमिलनाडु भारत का सबसे बड़ा टेक्सटाइल और कपड़ों का एक्सपोर्ट करने वाला राज्य है. लाखों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों तरह के रोज़गार के लिए इस सेक्टर पर निर्भर है. इनमें खास तौर पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों की महिलाएं शामिल है.