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बहुत हुआ काम, इस कंपनी ने कर्मचारियों को दे दी 11 दिन की छुट्टी, कहा- मौज करो..!

कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए इन्सेन्टिव के तौर पर गिफ्ट या कंपनी के शेयर देने का चलन काफी आम हो चुका है. अब कंपनियां इससे अलग कुछ हटकर करने लगी हैं. इसी कड़ी में स्टार्टअप कंपनी मीशो (Meesho) ने एक अनोखा ऐलान किया है. कंपनी फेस्टिव सीजन के बाद अपने कर्मचारियों को 11 दिनों का ब्रेक दे रही है.

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मीशो के कर्मचारियों की मौज मीशो के कर्मचारियों की मौज

लोगों के काम करने तौर-तरीके समय के साथ बदल रहे हैं. खासकर नए जमाने की कंपनियां ऑफिस के माहौल और वर्क कल्चर (Work Culture) को बदलने में बड़ा योगदान दे रही हैं. कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए इन्सेन्टिव के तौर पर गिफ्ट या कंपनी के शेयर देने का चलन काफी आम हो चुका है. अब कंपनियां इससे अलग कुछ हटकर करने लगी हैं. इसी कड़ी में स्टार्टअप कंपनी मीशो (Meesho) ने एक अनोखा ऐलान किया है. कंपनी फेस्टिव सीजन के बाद अपने कर्मचारियों को 11 दिनों का ब्रेक दे रही है, ताकि वे बेहतर तरीके से जीवन जी सकें और तनाव से मुक्त रह सकें.

लगातार दूसरे साल मिल रहा ब्रेक

ऑनलाइन शॉपिंग साइट चलाने वाली कंपनी मीशो ने इस 11 दिनों के ब्रेक को 'रिसेट एंड रिचार्ज ब्रेक (Reset and Recharge Break)' नाम दिया है. कंपनी इससे पहले भी ऐसा कर चुकी है और यह लगातार दूसरा साल है जब मीशो के कर्मचारियों को ब्रेक मिल रहा है. यह ब्रेक फेस्टिव सीजन के बाद 22 अक्टूबर से शुरू होगा और 01 नवंबर तक चलेगा. कंपनी का कहना है कि यह इंडस्ट्री में पहली बार हो रहा है और इससे मीशो के कर्मचारियों को व्यस्त फेस्टिव सीजन सेल पीरियड के बाद काम से पूरी तरह दूर होकर मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने में मदद मिलेगी.

कंपनी के सीईओ ने कही ये बात

मीशो के फाउंडर एवं सीईओ विदित आत्रे ने ट्वीट किया, 'यहां तक कि अंतरिक्ष यात्रियों को भी ब्रेक की जरूरत होती है, उसी तरह कंपनी के मूनशॉट मिशंस पर काम कर रहे लोगों को भी ब्रेक की जरूरत है. लगातार दूसरे साल मीशो के कर्मचारी 11 दिनों के लिए खुद को काम से अनप्लग करेंगे और फेस्टिव सीजन के बाद खुद को रिसेट व रिचार्ज करेंगे. काम महत्वपूर्ण है लेकिन सही रहने का कोई मूल्य नहीं है.'

कर्मचारियों को संपत्ति मानती है मीशो

सीईओ आत्रे के पोस्ट पर कमेंट में मीशो ने ट्वीट किया, 'फेस्टिव सीजन के दौरान एक सालाना ब्रेक, हम ऐसे काम करते हैं.' कंपनी का कहना है कि 11 दिनों का यह ब्रेक 'कर्मचारियों पर केंद्रित वर्कप्लेस, जो वास्तव में अपनी सबसे बड़ी संपत्ति यानी अपने कर्मचारियों का ख्याल रखता है' के प्रति कमिटमेंट का रिफ्लेक्शन है. कंपनी ने कहा कि ऐसे समय में जब बर्नआउट और एंजाइटी वर्कप्लेस की सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरा है, 'रिसेट एंड रिचार्ज' अन्य कंपनियों को भी कर्मचारियों के हिसाब की आदतें अपनाने को प्रेरित करेगा.

अपनी मर्जी से करें ब्रेक का इस्तेमाल

मीशो के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी आशीष कुमार सिंह ने कहा कि एक अच्छा कंपनी कल्चर तैयार करने के लिए इस बात को स्वीकार करने की जरूरत होती है कि कर्मचारियों की बेहतरी के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस, रेस्ट और रेजुवनेशन जरूरी है. 'रिसेट एंड रिचार्ज' के जरिए हम यही कर रहे हैं और वर्कप्लेस की पारंपरिक अवधारणाओं को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ब्रेक के दौरान कर्मचारी अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकते हैं. वे चाहें तो अपने नजदीकी लोगों के साथ समय बिताएं या कोई नया कौशल सीखें या कहीं ट्रैवल करें.

 

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