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Sri Lanka Economic Crisis: सोने की लंका, कैसे 3 साल में हुई कंगाल? अब जनता का जीना हुआ मुहाल

Sri Lanka Economic Crisis: जरूरत की चीजों के लिए परेशान श्रीलंका के लोगों का उबल रहा गुस्सा अब फट चुका है. हिंसा की आग तेज होने लगी है और आर्थिक संकट के चलते श्रीलंका की हालत बद से बदतर होती जा रही है.

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आर्थिक संकट से जूझ रहा है श्रीलंका आर्थिक संकट से जूझ रहा है श्रीलंका
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कम एक्सपोर्ट ने बढ़ाई मुश्किलें
  • टैक्स कट का फैसला भारी पड़ा

साल 2009 में जब श्रीलंका (Sri Lanka) एक लंबे गृह युद्ध से निकला, तो वहां की सरकार ने घरेलू बाजार में सामान उपलब्ध कराने पर अधिक ध्यान दिया. श्रीलंका ने विदेशी बाजार में अपने यहां के उत्पादों को पहुंचाने की कोशिश नहीं की. इस वजह से श्रीलंका का इंपोर्ट का बिल बढ़ता गया और एक्सपोर्ट से आय कम होती रही. श्रीलंका अब हर साल निर्यात की तुलना में अधिक आयात (करीब 3 बिलियन डॉलर) करता है. इस वजह से ही आज वो विदेशी मुद्रा संकट (Sri Lanka Forex Reserves Crisis) से जूझ रहा है.

जरूरत की चीजों के लिए परेशान लोगों का उबल रहा गुस्सा अब फट चुका है. हिंसा की आग तेज होने लगी है और आर्थिक संकट के चलते श्रीलंका की हालत बद से बदतर होती जा रही है.

टैक्स कटौती ने पहुंचाया नुकसान

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2019 के अंत तक श्रीलंका के पास विदेशी मुद्रा भंडार में 7.6 बिलियन डॉलर मौजूद थे. मार्च 2020 तक यह कम होकर 1.93 बिलियन डॉलर हो गया. हाल ही में श्रीलंकाई सरकार की ओर से बताया गया कि उसके पास विदेशी मुद्रा भंडार केवल 50 मिलियन डॉलर शेष हैं. श्रीलंका में आए इस आर्थिक संकट का जिम्मेदार पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और उनके भाई पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को बताया जा रहा है.

राष्ट्रपति राजपक्षे की 2019 में शुरू की गई बड़ी टैक्स कटौती (Tax Cut in Sri Lanka) के फैसले पर सवाल उठाए गए. इस फैसले से एक साल में करीब 1.4 बिलियन डॉलर से अधिक का राजस्व का नुकसान हुआ. रेटिंग एजेंसियों श्रीलंका को डाउनग्रेड कर दिया और विदेशी बाजार तक उसकी पहुंच लगभग खत्म हो गई.

उर्वरकों के आयात पर प्रतिबंध

इसके अलावा जब 2021 की शुरुआत में श्रीलंका में विदेशी मुद्रा की कमी एक गंभीर समस्या बन गई, तो सरकार ने रासायनिक उर्वरकों के आयात पर प्रतिबंध लगाकर उन्हें सीमित करने की कोशिश की. किसानों को रासायनिक उर्वरकों की जगह जैविक उर्वरकों का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया. इस वजह से बड़े स्तर पर फसल बर्बाद हो गई.

श्रीलंका को विदेशों से अपने खाद्य भंडार की पूर्ति करनी पड़ी. इसके लिए भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करने पड़े और इसका असर उसे विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ा.  इस साल मार्च में आई IMF की एक रिपोर्ट में कहा गया कि खाद पर प्रतिबंध ने श्रीलंका से होने वाले चाय और रबर के निर्यात को भी नुकसान पहुंचाया. इससे हालात और बिगड़े.

51 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज

2018 में राष्ट्रपति के प्रधानमंत्री को बर्खास्त करने के बाद श्रीलंका में संवैधानिक संकट पैदा हो गया. इसके बाद से श्रीलंका की स्थिति बिगड़नी शुरू हुई. साल 2019 में हुए कई धमाकों में सैकड़ों लोग मारे गए. इसके बाद कोविड महामारी ने रही-सही कसर पूरी कर दी. अब श्रीलंका अपनी आजादी के 74 साल बाद सबसे गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है. श्रीलंका पर अभी करीब 51 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज है.

राष्ट्रपति भवन पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा

श्रीलंका ईंधन और दवाई जैसी जरूरत की तमाम चीजों को आयात करने की स्थिति में नहीं है. पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं. ईंधन का स्टॉक खत्म होने की कगार पर है. बिजली और फ्यूल को बचाने के लिए स्कूल और दफ्तर बंद कर दिए गए हैं. शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन का घेराव करने के बाद उस पर कब्जा कर लिया. राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे मौजूदा हालात देखकर एक दिन पहले भी आवास छोड़कर भाग गए. 

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