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महंगाई क्यों RBI के लिए चिंता का विषय, श्रीलंका की कंगाली एक बड़ा उदाहरण!

RBI MPC Meet: महंगाई एक अहम चुनौती है, जिसे काबू में करने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था (Econony) की गति को बनाए रखने की जरूरत है. इसलिए MPC की बैठक में रेपो रेट 0.50 फीसदी बढ़ाने का फैसला लिया गया है. इस बढ़ोतरी के बाद अब रेपो रेट 4.40 फीसदी से बढ़कर 4.90 फीसदी हो गया है. 

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महंगाई से जनता परेशान महंगाई से जनता परेशान
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 34 दिन के अंदर में दूसरी बार रेपो रेट में इजाफा
  • महंगाई की वजह से रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला


महंगाई (Inflation) दुनिया के लिए चिंता का विषय है, महंगाई भारत में भी तेजी से बढ़ रही है. लेकिन उसी रफ्तार से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) भी हरकत में है. महंगाई को काबू में करने के लिए RBI ने महज 34 दिन के अंदर में दूसरी बार रेपो रेट (Repo Rate) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है. 
   
क्रेडिट पॉलिसी पर आज आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने प्रेस कॉन्फेंस कर कई अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया कि महंगाई एक अहम चुनौती है, जिसे काबू में करने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था (Economy) की गति को बनाए रखने की जरूरत है. इसलिए MPC की बैठक में रेपो रेट 0.50 फीसदी बढ़ाने का फैसला लिया गया है. इस बढ़ोतरी के बाद अब रेपो रेट 4.40 फीसदी से बढ़कर 4.90 फीसदी हो गया है.

यूरोप की स्थिति खराब 

शक्तिकांत दास ने बताया कि यूरोप के खराब हालात से ग्लोबल ट्रेड प्रभावित हुआ है, जिसका असर भारत पर भी पड़ा है. लेकिन भारत कई मोर्चों पर इस संकट के दौर में भी अच्छा कर रहा है, जीएसटी कलेक्शन बढ़ा है. गाड़ियों की बिक्री बढ़ी है. स्टील-सीमेंट की डिमांड बढ़ी है. कृषि सपोर्ट कर रहा है. इसलिए भारत के लिए बहुत ज्यादा चिंता का विषय नहीं है. 

बता दें, किसी भी देश को बढ़ती महंगाई किस तरह से कंगाल कर सकती है, इसका ताजा उदाहरण पड़ोसी देश श्रीलंका है. श्रीलंका की आर्थिक स्थिति बिगड़ने के पीछे महंगाई सबसे बड़ा फैक्टर है. समय रहते सरकार ने महंगाई को कम करने के लिए कदम नहीं उठाए और आज श्रीलंका बेतहाशा महंगाई की चपेट में है, जिससे आम जनता को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है. सरकार की गलत नीतियों के कारण देश दिवालिया होने के कगार पर है. फिलहाल श्रीलंका में महंगाई दर 30% के करीब है और अनुमान है कि यह 40% तक जा सकती है, जो कि एक डरावना आंकड़ा है. 

खुदरा महंगाई दर में लगातार इजाफा

हालांकि भारत में श्रीलंका से जैसे हालात बिल्कुल नहीं हैं. फिलहाल भारत में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation)  7.8 फीसदी है, जो कि अप्रैल महीने का आंकड़ा है. इस दौरान खाद्य मुद्रास्फीति की दर 8.38% रही. खुदरा महंगाई की ये दर अपने 8 साल के उच्च स्तर पर है. इससे पहले मई 2014 में महंगाई दर 8.33% थी. जबकि मार्च 2022 में खुदरा महंगाई 6.95 फीसदी रही थी. 

खुदरा महंगाई (Retail Inflation) के 8 साल के उच्च स्तर पर पहुंच जाने के बाद अप्रैल- 2022 में थोक महंगाई (Wholesale Inflation) ने भी नया रिकॉर्ड बना दिया. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में थोक महंगाई की दर 15.08 फीसदी रही. देश में बढ़ती महंगाई की दर को लेकर RBI इसलिए हरकत में है कि इसने पूर्वनिधारित दायरे को तोड़ दिया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई की अपर लिमिट 6% तय की हुई है. जबकि अप्रैल-2022 में महंगाई 7.8 फीसदी पर पहुंच गई. 

रेपो रेट में बढ़ोतरी के साथ शक्तिकांत दास ने कहा कि महंगाई को अगले एक साल में काबू में कर लिया जाएगा.  उन्होंने वित्त वर्ष 2022-23 में खुदरा महंगाई दर 7.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, जबकि मौजूदा तिमाही (अप्रैल-जून) में 7.4 फीसदी रह सकती है. उन्होंने कहा कि महंगाई अनुमान से ज्यादा है, इसलिए ये कदम उठाने पड़ रहे हैं. खुदरा महंगाई दर में उछाल के पीछे खाद्य महंगाई का अहम रोल है. इसके साथ ही RBI ने मौजूदा वित्त वर्ष यानी FY23 में जीडीपी 7.2 रहने का अनुमान जताया है.


 

 

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