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पेट्रोल-डीजल के रेट घटेंगे? GST काउंसिल की बैठक में आज इन अहम मसलों पर होगी बात 

GST council meeting: वस्तु एवं सेवा कर काउंसिल की अहम बैठक आज यानी शुक्रवार को सुबह 11 बजे से लखनऊ में होने जा रही है. आज की बैठक अहम इसलिए है क्योंकि इसमें इस प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा कि पेट्रोल एवं डीजल को जीएसटी के दायरे में रखा जाए या नहीं.

जीएसटी कौंसिल की अहम बैैठक (फाइल फोटो: PTI)  जीएसटी कौंसिल की अहम बैैठक (फाइल फोटो: PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • GST काउंसिल की अहम बैठक आज
  • कई महत्वपूर्ण मसलों पर विचार

वस्तु एवं सेवा कर काउंसिल की अहम बैठक (GST council meeting) आज यानी शुक्रवार को सुबह 11 बजे से लखनऊ में होने जा रही है. आज की बैठक अहम इसलिए है क्योंकि इसमें इस प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा कि पेट्रोल एवं डीजल को जीएसटी के दायरे में रखा जाए या नहीं. जीएसटी के दायरे में आने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी कमी आ सकती है. 

इसके अलावा कई और अहम प्रस्तावों पर विचार होगा जिससे लोगों को कुछ सामान पर टैक्स ज्यादा देना पड़ सकता है, तो कुछ सामान पर राहत भी मिल सकती है. यह मार्च 2020 के बाद (जब कोरोना का कहर शुरू हुआ था) सदस्यों की भौतिक रूप से मौजूदगी वाली पहली बैठक है. इसके पहले कई बैठकें ऑनलाइन आयोजित की गईं. 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे शुरू होने वाली इस बैठक में 28 राज्यों और 3 केंद्र शासित राज्यों के प्रतिनिध‍ि शामिल होंगे. बैठक में ऐसे कई निर्णय हो सकते हैं, जिनसे ग्राहकों को बोझ कम होगा, तो कुछ के द्वारा ग्राहकों पर बोझ बढ़ भी सकता है. आज की बैठक में असल में 50 से ज्यादा वस्तुओं एवं सेवाओं पर दरों में बदलाव पर विचार होना है. इसमें सबसे अहम है कि क्या पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में शामिल किया जा सकता है?  

बैठक में विचार के लिए एक प्रमुख मसला यह भी होगा कि जीएसटी लागू होने से राज्यों को हो रहे नुकसान की पूरी तरह से भरपाई कैसे हो. असल में 1 जुलाई 2017 को लागू जीएसटी एक्ट में कहा गया था कि जीएसटी लागू होने के बाद यदि राज्यों के जीएसटी में 14 फीसदी से कम ग्रोथ होती है तो उन्हें अगले पांच साल तक इस नुकसान की भरपाई ऑटोमोबिल और टोबैको जैसे कई उत्पादों पर विशेष सेस लगाकर करने की इजाजत होगी. यह पांच साल की अवध‍ि 2022 में पूरी हो रही है, लेकिन राज्य चाहते हैं कि इसे इसके आगे भी हर्जाना दिया जाए.

कंज्यूमर्स के लिए अच्छी खबर 

अच्छी खबर यह है कि दवाओं और कोविड में उपयोगी सामान पर टैक्स में कटौती की जा सकती है. आज की बैठक में कोविड संबंधी 11 दवाओं पर टैक्स कम करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी जा सकती है. इसके अलावा सात अन्य दवाओं पर भी जीएसटी को 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया जा सकता है. 

पेट्रोल एवं डीजल पर जीएसटी

इस साल जून में केरल हाई कोर्ट ने जीएसटी काउंसिल को यह आदेश दिया था कि वह पेट्रोल एवं डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार करे. काउंसिल को इसके लिए 6 माह का समय दिया गया. दिल्ली में पेट्रोल के 101 रुपये कीमत में लोग करीब 60 रुपये टैक्स के रूप में ही दे रहे हैं. लेकिन इस प्रस्ताव का राज्य ही विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनके राजस्व को भी इससे भारी नुकसान पहुंचने वाला है. कोरोना संकट में राजस्व को पहले ही चोट है, इसी वजह से कर्नाटक, केरल और महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही इस प्रस्ताव का विरोध किया है. 

क्या होगी लोगों के लिए बुरी खबर 

कंज्यूमर्स के लिए बुरी खबर यह है कि इस बैठक में फुटवियर, टेक्सटाइल पर टैक्स में बढ़ोतरी की जा सकती है. इसके अलावा Swiggy, जौमैटो जैसे फूड ऐप से होने वाले खाने की डिलिवरी पर भी 5 फीसदी तक जीएसटी लगाने के प्रस्ताव पर विचार होगा. इस पर सहमति बनी तो फूड डिलिवरी ऐप से खाना मंगाना महंगा हो सकता है.

इसके अलावा 1 लीटर से कम पैकिंग वाले नारियल तेल पर भी 18% जीएसटी और 1 लीटर से ज्यादा पर 5% जीएसटी लगाने पर भी विचार होगा. अभी खाद्य तेल के रूप में इस्तेमाल होने वाले नारियल तेल पर 5% और हेयरऑयल के रूप में इस्तेमाल होने वाले नारियल तेल पर 18%जीएसटी लगता है. इसकी वजह से टैक्स बचाने के लिए कंपनियां अपने छोटी पैकिंग पर भी यह छिपा जाती हैं कि नारियल तेल हेयर ऑयल है. 

प्रस्ताव यह है कि 1 लीटर से कम के नारियल तेल को हेयर ऑयल मानते हुए 18% जीएसटी और 1 लीटर से ज्यादा की पैकिंग को खाद्य नारियल तेल मानते हुए उस पर 5% जीएसटी माना जाए. इसके अलावा सोलर पीवी मॉड्यूल, सेंटेड मीठी सुपारी,ओंकोलॉजी की दवाओं, डीजल-इलेक्ट्र‍िक वाहनों जैसे करीब 32 वस्तुओं एवं सेवाओं पर जीएसटी की भी समीक्षा की जाएगी. 

 

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