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पेट्रोल की आप जो कीमत देते हैं, उसका कितना हिस्सा केंद्र और राज्यों के खजाने में जाता है?

आंकड़ों से पता चलता है कि पेट्रोल पर केंद्र सरकार राज्यों के मुकाबले ज्यादा टैक्स ले रही है. औसतन देखें तो राज्य सरकारें हर एक पेट्रोल पर करीब 20 रुपये का टैक्स ले रही हैं, जबकि केंद्र सरकार करीब 33 रुपये प्रति लीटर.

पेट्रोल कीमत का बड़ा हिस्सा टैक्स का होता है (फाइल फोटो) पेट्रोल कीमत का बड़ा हिस्सा टैक्स का होता है (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पेट्रोल-डीजल पर लगता है भारी टैक्स
  • कच्चे तेल के दाम घटे, लेकिन बढ़ते गए टैक्स
  • अब इन टैक्स में कटौती की बढ़ी है मांग

सात साल पहले पेट्रोल की खुदरा कीमतों में करीब दो-तिहाई हिस्सा कच्चे तेल का होता था. आज लगभग इतना ही हिस्सा केंद्र और राज्यों के टैक्सेज का हो गया है.

आंकड़ों से पता चलता है कि पेट्रोल पर केंद्र सरकार राज्यों के मुकाबले ज्यादा टैक्स ले रही है. औसतन देखें तो राज्य सरकारें हर एक लीटर पेट्रोल पर करीब 20 रुपये का टैक्स ले रही हैं, जबकि केंद्र सरकार करीब 33 रुपये प्रति लीटर. राज्य सरकारों द्वारा पेट्रोल-डीजल पर लगाया गया बिक्री कर या वैट हर राज्य में अलग-अलग होता है.

पेट्रोल पर टैक्स के लिए अलग-अलग तरीके

पेट्रोलियम मंत्रालय की प्लानिंग ऐंड एनालिसिस सेल (PPAC) की वेबसाइट (https://www.ppac.gov.in) के मुताबिक राज्य सरकारें पेट्रोल पर टैक्स के लिए अलग-अलग तरीके अपनाती हैं. उदाहरण के लिए महाराष्ट्र सरकार मुंबई, नवी मुंबई और थाणे में 26 फीसदी वैट के साथ ही चुंगी (octroi) भी वसूलती है. इसकी वजह से इन इलाकों में एक लीटर पेट्रोल पर 26.86 रुपये का टैक्स जुड़ जाता है. लेकिन राज्य के बाकी इलाकों में पेट्रोल थोड़ा सस्ता है क्योंकि वहां सिर्फ 26.22 रुपये प्रति लीटर का टैक्स ही लगता है. 

Petrol Graphic
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मई 2014 में दिल्ली में पेट्रोल की बेस प्राइस करीब 47.12 रुपये प्रति लीटर थी. लेकिन 1 फरवरी 2021 तक यह घटकर 29.34 रुपये तक आ गई. इसके विपरीत केंद्र और राज्यों के टैक्स 137 फीसदी बढ़ गए और इस दौरान यह 22.29 रुपये से बढ़कर 52.90 रुपये तक पहुंच गए. 

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किस तरह से तय होती है पेट्रोल की कीमत 

आंकड़ों से पता चलता है कि ईंधन की कीमत कुछ हद तक घरेलू बाजार में मांग और आपूर्ति तथा काफी हद तक टैक्स एवं डीलर्स कमीशन पर निर्भर करता है. 

उदाहरण के लिए दिल्ली में  1 फरवरी, 2021 को एक लीटर पेट्रोल की बेस प्राइस 29.34 रुपये थी. इसमें ढुलाई आदि जोड़ते हुए तेल कंपनियां डीलर से एक लीटर के लिए 29.71 रुपये कीमत लेती हैं. इसके बाद इस पर केंद्र सरकार का 32.98 रुपये का एक्साइज ड्यूटी यानी उत्पाद शुल्क लगता है. इसके बाद जुड़ता है डीलर्स का 3.69 रुपये का कमीशन. फिर आता है राज्यों का वैट या सेल्स टैक्स. दिल्ली में यह 19.92 रुपये का है. तो इस तरह से आख‍िरकार दिल्ली के उपभोक्ता को पेट्रोल पंप पर एक लीटर पेट्रोल 86.30 रुपये में मिलता है. 

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दुनिया भर में 160 किस्म के कच्चे तेल का कारोबार होता है. यह उनके घनत्व से लेकर वजन, तरलता आदि के स्तर पर निर्भर करता है. भारतीय बास्केट के आयातित कच्चे तेल का भाव ब्रेंट, ओमान, दुबई किस्म के कच्चे तेल के भाव से तय होता है. 

कोविड-19 के ख‍िलाफ दुनिया के कई देशों में टीकाकरण शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें ऊपर की ओर जा रही हैं. ऐसी हालात में भारतीय उपभोक्ता अब इसी उम्मीद में हैं कि केंद्र और राज्य सरकारें अपने टैक्सेज में कटौती करें. कई राज्यों ने तो टैक्स घटा भी दिए हैं. उदाहरण के लिए असम सरकार ने 12 फरवरी को ईंधन की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है और इसके बाद मेघालय सरकार ने भी 16 फरवरी को 7 रुपये लीटर तक की कटौती की है. 

 

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