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टैक्‍स से कमीशन तक... म्‍यूचुअल फंड में ये सात तरह के हिडेन चार्ज, 25% तक प्रॉफिट कर देते हैं कम!

म्‍यूचुअल फंड में निवेश पर कई तरह के हिडेंन चार्ज वसूले जाते हैं, जो धीरे-धीरे आपकी वेल्‍थ को कम कर देते हैं. लॉन्‍गटर्म में यह निवेशकों का 25 फीसदी पैसा साफ कर देता है.

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म्‍यूचुअल फंड में छिपे हुए चार्ज. (Photo: Pixabay)
म्‍यूचुअल फंड में छिपे हुए चार्ज. (Photo: Pixabay)

पिछले कुछ सालों में म्‍यूचुअल फंड में निवेश करने वालों की संख्‍या तेजी से बढ़ी है. कोई म्‍यूचुअल फंड में SIP करता है तो कोई एकमुश्‍त पैसा निवेश करता है. इस निवेश पर फंड हाउसेज अलग-अलग तरह के चार्ज वसूल करते हैं. यह चार्जेज आपकी कमाई को कम कर सकते हैं. 

यह चार्जेज सिर्फ फंड हाउसेज ही नहीं, बल्कि सरकार तक वसूल करती है, जिसके बारे में ज्‍यादातर निवेशकों को पता भी नहीं है. ये चार्ज आपके रिटर्न में ही छिपे हुए रहते हैं और धीरे-धीरे एक बड़ा प्रॉफिट कम कर देते हैं. इन चार्जेज में Expense Ratio, एग्‍जिट लोड, पोर्टफोलियो टर्नओभर कॉस्‍ट, Cash Drag, Regular Plan का Extra Commission और टैक्‍स आदि शामिल है.  आइए जानते हैं इन चार्जेज के बारे में...  

Expense Ratio (सबसे बड़ा हिडेन चार्ज)
इसे म्‍यूचुअल फंड में सबसे बड़ा हिडेन चार्ज कहा जाता है. फंड हाउस हर साल यह चार्ज निवेशकों से फंड मैनेज करने के नाम पर वसूलते हैं, जिसमें फंड मैनेजर की फीस, मार्केटिंग एक्‍सपेंसेज, एडमिनिस्‍ट्रेटिव एक्‍सपेंसेस शामिल होता है, जो सीधे नहीं कटता है, बल्कि NAV में एडजस्ट हो जाता है. जैसे अगर फंड 12% रिटर्न दे रहा है और Expense Ratio 2% है, तो आपको असल में 2 फीसदी का ही रिटर्न मिलेगा. 

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एग्जिट लोड 
ज्‍यादातर म्‍यूचुअल फंउ शुरू करने वाले निवेशक तय समय से पहले ही अपने म्‍यूचुअल फंड को बंद कर देते हैं. ऐसे में तय समय से पहले पैसा निकालने पर चार्ज लागू होता है, जो आमतौर पर 1 फीसदी होता है. यह चार्ज निवेश के 6 महीने या 1 साल से पहले निकालने पर लगता है. अक्‍सर निवेशक इसे नजरअंदाज कर देते हैं. 

पोर्टफोलियो टर्नओभर कॉस्‍ट 
जब फंड मैनेजर बार-बार शेयर खरीदता और बेचता है, तो Brokerage, STT, taxes जैसे चार्ज उसे देने पड़ते हैं, जिसका असर आपके रिटर्न पर पड़ता है. यह चार्ज पूरी तरह से छिपा हुआ रहता है, जो आपका नुकसान करा सकता है. 

कैश ड्रैग 
अक्‍सर फंड हाउसेज कुछ पैसा कैश में रखते हैं. ऐसे में मार्केट जब ऊपर जाता है तो यह पैसा रिटर्न नहीं देता है और इससे मौके का फायदा नहीं मिल पाता है, यह भी एक तरह का हिडेन कॉस्‍ट में आता है. 

ट्रैकिंग एरर (इंडेक्‍स फंड या ईटीएफ में) 
फंड इंडेक्‍स को पूरी तरह फॉलो नहीं कर पाता है, जित तरह इंडेक्‍स मूव करता है, उस तरह फंड कभी-कभी नहीं चल पाते. इसका कारण Expense + inefficiency होता है. इससे रिटर्न इंडेक्स से कम हो जाता है. 

एक्‍स्‍ट्र कमीशन 
रेगुलर प्‍लान वाले फंड में निवेश पर डिस्‍ट्रीब्‍यूटसर्व का कमीशन शामिल होता है, जो डायरेक्‍ट प्‍लान से 0.5% – 1% ज्यादा खर्च होता है. धीरे-धीरे करके लॉन्‍ग टर्म में यह फर्क बहुत बड़ा बन जाता है और निवेशकों को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ता है. 

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म्‍यूचुअल फंड पर टैक्‍स इम्‍पैक्‍ट
अगर आपने कोई फंड लॉन्‍गटर्म में बेचा है तो उसपर Long Term Capital Gain Tax (LTCG) लगता है, लेकिन अगर आपने शॉर्ट टर्म में कोई फंड बेचा है तो आपको शॉर्टटर्म कैपिटल गेन टैक्‍स (STCG) देना होगा. इसके अलावा, डिविडेंड टैक्‍स भी देना होता है. ये टैक्‍स आपका रिटर्न कम कर सकते हैं. 
 
एक्‍सपर्ट्स के मुताबिक, 20 साल में स‍िर्फ एक फीसदी का भी एक्‍स्‍ट्रा कॉस्‍ट आपकी वेल्‍थ को 25 से 30 फीसदी तक कम कर सकता है. हाल ही में 1 फाइनेंस रिसर्च के एक स्‍टडी में सामने आया है कि नियमित म्यूचुअल फंड योजनाओं में छिपे हुए कमीशन की वजह से लॉन्‍गटर्म में निवेशकों की एक चौथाई प्रॉफिट कम हो जाती है. यानी कि 25 फीसदी प्रॉफिट निवेशकों की कम हो जाती है. 

(नोट- किसी भी शेयर या म्‍यूचुअल फंड खरीदने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.) 

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