कंज्यूमर सेक्टर पर एक ब्रोकरेज फर्म ने कुछ शेयरों को लेकर कवरेज शुरू किया है. एलारा सिक्योरिटीज ने कहा कि एलपीजी की कमी की समस्या अब लगभग खत्म हो गई है, जिस कारण फूड सेक्टर का क्यूएसआर सेगमेंट सबसे अधिक मजबूत होकर उभरा है.
ब्रोकरेज का कहना है कि जुबिलेंट फूडवर्क्स, देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड, सैफायर फूड्स, रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया और वेस्टलाइफ फूडवर्ल्ड में 69 प्रतिशत तक की तेजी आ सकती है. वेस्टलाइफ फूडवर्ल्ड को छोड़कर, ब्रोकरेज ने बाकी चार QSR कंपनियों को 'खरीदें' रेटिंग दी है.
एलारा ने टेक्सटाइल सेगमेंट से ट्रेंट लिमिटेड , एल्कोबेव सेगमेंट से यूनाइटेड स्पिरिट्स और क्यूएसआर सेगमेंट से जुबिलेंट फूडवर्क्स को प्राथमिकता दे रहा है. आइए जानते हैं इनके शेयर प्राइस और अन्य डिटेल्स...
इन शेयरों पर ब्रोकरेज का आया टारगेट
टाटा ट्रेंट का शेयर 4391 रुपये पर है और अब ये 9 फीसदी चढ़कर 4800 रुपये पर पहुंच सकता है. यूनाइटेड स्पिरिट का शेयर 13,63 रुपये पर है, जो 21 फीसदी चढ़कर 1650 रुपये पर जा सकता है. अभी रैडिको खेतान का शेयर 3249 रुपये पर है, जो 8 फीसदी चढ़कर 3500 रुपये पर पहुंच सकता है.
यूनाइटेड वेबरीज का शेयर 1498 रुपये पर है, जो 27 फीसदी चढ़कर 1900 रुपये पर जा सकता है. जुबिलिएंट फूड के शेयर 472 रुपये से 65 फीसदी पर चढ़कर 780 रुपये पर पहुंच सकता है. देव्यानी इंटरनेशनल के शेयर अभी 111 रुपये पर है, जो 48 फीसदी चढ़कर 165 रुपये पर पहुंच सकता है.
सफायर फूड के शेयरों पर 69 फीसदी की तेजी का अनुमान लगाया गया है. यह अभी 177 रुपये पर कारोबार कर रहा है, जो 300 रुपये पर जा सकता है. रेस्टोरेंट ब्रांड एशिया के शेयर 63 रुपये पर हैं, जो 58 फीसदी चढ़कर 100 रुपये पर जा सकते हैं.
ब्रोकरेज ने इन कंपनियों की कमाई पर क्या कहा?
आंकड़ों से पता चलता है कि जुबिलेंट फूडवर्क्स और देवयानी इंटरनेशनल जैसी कंपनियों के शेयर अभी भी 27 फरवरी के स्तर से 5-12 प्रतिशत नीचे हैं. अमेरिका-ईरान युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था. एलारा ने कहा कि महंगाई का नजरिया असमान है, जिसमें टेक्सटाइल को सबसे तेज चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि एल्कोबेव की स्थिति दो अलग-अलग है. बीयर निर्माता यूनाइटेड ब्रुअरीज सबसे अधिक जोखिम में है, क्योंकि बेचे गए माल की लागत में कांच का भारी उपयोग होता है और कोई प्राकृतिक बचाव उपलब्ध नहीं है.
एलारा ने कहा कि फूड कास्ट में अब तक कोई खास बदलाव नहीं आया है, जबकि एलपीजी की मांग और आपूर्ति में काफी हद तक स्थिरता आ गई है. हालांकि एलपीजी की लागत में कुछ दबाव जरूर आया है, लेकिन कुल सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान 12.5 प्रतिशत तक ही सीमित है. नतीजतन, क्यूएसआर मार्जिन पर इसका प्रभाव ना के बराबर की उम्मीद है.
कुल मिलाकर, क्यूएसआर मार्जिन स्थिर बना हुआ है, और इसमें कोई खास गिरावट का जोखिम नहीं है. डिमांड के मोर्चे पर, डाइन-इन में निरंतर सुधार देखा गया है, जिसमें केएफसी के लिए चौथी तिमाही में एसएसएसजी 4-5 प्रतिशत और बर्गर चेन के लिए 4-6 प्रतिशत रहा है.