इंडस्ट्रियल डिमांड के कारण मेटल प्राइस में तेजी देखी जा रही है. साल 2026 में जहां सोने और चांदी का बोलबाला था, वहीं अब कुछ और मेटल तेजी दिखाने लगे हैं. आपूर्ति में कमी और मजबूत मांग के कारण इन मेटल की कीमतों में नए सिरे से तेजी आ रही है.
एल्युमीनियम की कीमत तीन साल से अधिक समय में पहली बार 3,000 अमेरिकी डॉलर प्रति टन के पार जा चुकी है, जबकि तांबा रिकॉर्ड लेवल के करीब पहुंच चुका है. इन चीजों के दाम बढ़ने से अब कंपनियां कह रही हैं कि रसोई उपकरण से लेकर बाथरूम यूज वाले प्रोडक्ट्स के दाम में भी इजाफा हो सकता है.
एल्युमीनियम और कॉपर की कीमतों में उछाल
चीन में गलाने की क्षमता पर लगे प्रतिबंधों और लगातार हाई इलेक्ट्रिकसिटी कॉस्ट के कारण यूरोप में उत्पादन में कमी समेत संरचनात्मक आपूर्ति बाधाओं के कारण एल्युमीनियम की कीमतों में तेजी आई है. साथ ही मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी और अन्य प्रोजेक्ट्स से दीर्घकालिक मांग स्थिर बनी हुई है. वायदा कीमतों में पिछले साल 17 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जो 2021 के बाद से सबसे मजबूत सालाना ग्रोथ है.
इस बीच, कॉपर भी इंडस्ट्री मेटल सेक्टर में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली धातु बनी है. साल 2009 के बाद से अपनी सबसे बड़ी सालाना ग्रोथ दर्ज करने के बाद, आपूर्ति में बार-बार आने वाली बाधाओं के बीच लंदन मेटल एक्सचेंज पर इसकी कीमतें 12,000 अमेरिकी डॉलर प्रति टन से ऊपर पहुंच गई हैं.
क्यों आई इन मेटल में तेजी?
इंडोनेशिया, चिली और कांगो में खनन दुर्घटनाओं और चिली की एक बड़ी खदान में मुश्किलों के कारण उपलब्धता और भी कम हो चुकी है. व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं ने व्यापारियों को अमेरिका को शिपमेंट बढ़ाने के लिए भी प्रेरित किया, जिससे बाजार में तनाव बढ़ गया. इसके अलावा, दुनिया के सबसे बड़े निकेल उत्पादक इंडोनेशिया ने इस साल निकेल में कटौती की योजना बनाई है, जिस कारण इसकी कीमतें बढ़ी हैं. साथ ही खदान में अस्थायी रोक के कारण आपूर्ति को लेकर चिंता भी बढ़ चुकी है.
पिछले साल सोने और चांदी की कीमतों में शानदार तेजी आई थी, जिस कारण निवेशकों की रुचि अब कमोडिटी मार्केट में बढ़ी है. विश्लेषकों का कहना है कि गिरती ब्याज दरें, कमजोर डॉलर और चीन की आर्थिक रिकवरी को लेकर बेहतर होती उम्मीदों समेत एआई और नई एनर्जी ने मेटल प्राइस को बढ़ाया है.
मेटल के दाम बढ़ने से इन चीजों के दाम बढ़ेंगे
अब इस बढ़ोतरी का असर घरेलू बजट पर भी पड़ रहा है. एयर कंडीशनर, रसोई के प्रोडक्ट्स, बाथरूम फिटिंग और खाना पकाने के बर्तन जैसे कॉपर से बने उत्पादों की कीमतें बढ़ने वाली हैं, क्योंकि कंपनियों को बढ़ती कॉस्ट दिक्कत दे रही है. MCX पर कॉपर का रेट्स करीब 1,300 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गईं, जो इस साल करीब 6 फीसदी से ज्यादा की उछाल है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, टिकाऊ वस्तुओं और घरेलू उपकरणों के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी होगी, क्योंकि कच्चे माल में कॉपर और एल्युमीनियम का बड़ा हिस्सा होता है और इनके दाम में इजाफा हो रहा है. ऐसे में मुनाफा बनाए रखने के कारण कंपनियां इनकी कीमतों में 5 से 8 रुपये का इजाफा कर सकती हैं.
एक्सपर्ट ने क्या कहा है?
गोल्डमैन सैक्स ने एक नोट में कहा कि रुकावट, नीतिगत बदलाव और निरंतर वैश्विक निवेश के कारण औद्योगिक धातुओं की कीमतों में तेजी आई है. भविष्यवाणी की है कि तांबे की औसत कीमतें 2026 की पहली छमाही तक ऊंची बनी रहेंगी. जैसे-जैसे यह तेजी कीमती धातुओं से लेकर इंडस्ट्रियल चीजों तक फैलती जा रही है, यूजर्स पर इसका प्रभाव महसूस किया जा सकता है और रोजमर्रा की वस्तुओं की ऊंची कीमतों में इजाफा हो सकता है .