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Iran War Impact: ईरान संकट का दिखा असर, चिंता में भारत के चावल निर्यातक, शिपमेंट अटके... पेमेंट में भी देरी

Iran War Crisis का असर भारतीय चावल निर्यातकों पर नजर आने लगा है. अमेरिका और इजरायल के अटैक के बाद ईरान और अफगानिस्तान जाने वाले चावल के शिपमेंट अटक गए हैं और इनका पेमेंट भी रुक गया है.

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ईरान में संकट से भारतीय चावल निर्यातकों की बढ़ी परेशानी. (File Photo: ITG)
ईरान में संकट से भारतीय चावल निर्यातकों की बढ़ी परेशानी. (File Photo: ITG)

ईरान वॉर टेंशन का असर (Iran War Tension Impact) दिखने लगा है. अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए अटैक के बाद ईरान ने भी जमकर मिसाइल अटैक किए. इस बीच ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई की मौत हो गई. मिडिल ईस्ट में बढ़ी इस टेंशन का असर भारतीय चावल निर्यातकों पर दिखने लगा है और एक्सपोर्टर शिपमेंट में रुकावट और पेमेंट में देरी का सामना करने को मजबूर हो रहे हैं. पहले से ही इस जंग का आशंका के बीच परेशानियां बढ़ती नजर आने लगी थीं. 

गौरतलब है कि अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान पर बड़ा हमला शुरू किया था, जिसमें ट्रंप ने ईरानी जनता से अपनी किस्मत का कंट्रोल अपने हाथ में लेने और 1979 से उनके देश पर राज कर रहे इस्लामिक लीडरशिप के खिलाफ खड़े होने की अपील की थी. 

चावल निर्यातकों ने बताई परेशानी
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा में चावल एक्सपोर्टर ईरान पर अमेरिका और इज़राइली के हमलों के बाद Iran और अफगानिस्तान जाने वाले शिपमेंट में पेमेंट में देरी और रुकावट का सामना कर रहे हैं. राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के स्टेट यूनिट प्रेसिडेंट सुशील कुमार जैन ने कहा कि इस जंग का चावल के ट्रेड पर असर शुरू हो चुका है. जो शिपमेंट ईरान या ईरान के सबसे बड़े पोर्ट बंदर अब्बास के रास्ते अफगानिस्तान जा रहे थे, वे अटक गए हैं. 

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उन्होंने कहा कि जब तक हालात ठीक नहीं हो जाते, ये शिपमेंट रुके रहेंगे और इसका असर मार्केट पर पड़ेगा, जिससे पेमेंट में भी देरी हो सकती है. हालांकि, जैन के मुताबिक, इसके पूरे असर का अंदाजा लगाना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि लड़ाई कितने समय तक चलती है.

हरियाणा के निर्यातकों पर सबसे ज्यादा असर
Basmati Rice Export को लेकर सुशील कुमार जैन कहा कि भारत के कुल सालाना चावल निर्यात में करीब 35 फीसदी हिस्सा हरियाणा से होता है. करनाल के एक राइस मिलर नीरज कुमार की मानें, तो शनिवार से लड़ाई शुरू होने के बाद अनिश्चितता की स्थिति है. एक दिन के अंदर व्यापार पर असर दिखा है, जिससे बासमती के रेट में लगभग 4-5 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट आई है और ये 400-500 रुपये प्रति क्विंटल होती है. उन्होंने बताया कि ऐसा ही असर बीते साल जून 2025 में ईरान-इजराइल संघर्ष (Iran-Israel Conflict) के दौरान दिखा था. 

उन्होंने कहा कि, 'भारत के बासमती एक्सपोर्ट में हरियाणा का सबसे ज्यादा हिस्सा है. ईरान हमारे बासमती का सबसे बड़ा खरीदार है, जबकि इसे UAE, ओमान, यमन और इराक जैसे दूसरे देशों में भी एक्सपोर्ट किया जाता है. मार्च के शिपमेंट पर सीधा असर दिखने वाला है. जहां करनाल बासमती एक्सपोर्ट का मेन हब है. वहीं कैथल और सोनीपत भी विदेशी शिपमेंट में हिस्सा लेते हैं.

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निर्यातकों के सामने ये भी चिंताएं
एक्सपोर्टर युद्ध के दौरान जहाजों के लिए इंश्योरेंस कवरेज की कमी को लेकर भी परेशान हैं, जिससे उनका रिस्क बढ़ जाता है. सऊदी अरब के बाद ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा बासमती चावल मार्केट है. भारत ने मार्च में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के दौरान ईरान को लगभग 1 मिलियन टन खुशबूदार अनाज एक्सपोर्ट किया था. इस दौरान लगभग 6 मिलियन टन बासमती चावल का निर्यात किया गया था, जिसकी डिमांड मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट और वेस्ट एशियन मार्केट से आई थी. दूसरे बड़े खरीदारों में इराक, UAE और US शामिल हैं.

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