scorecardresearch
 

महंगाई का असर: 20 साल में इतनी गिरी आपके पैसों की वैल्यू, घटती गई खरीदारी की क्षमता

अभी भारत में खुदरा महंगाई की दर 7 फीसदी है और यह लगातार आठ महीने से रिजर्व बैंक के 6 फीसदी के अपर लिमिट से ऊपर है. महंगाई का सबसे बुरा असर यह होता है कि इसके कारण पैसों की वैल्यू कम हो जाती है यानी पर्चेजिंग पावर कम हो जाती है. आइए जानते हैं कि 1000 रुपये से 20 साल पहले क्या-क्या खरीदना संभव था.

X
लगातार कम हुई क्रय शक्ति लगातार कम हुई क्रय शक्ति

महंगाई (Inflation) को अर्थशास्त्र में एक ऐसा टैक्स कहा जाता है, जो दिखाई तो नहीं देता, लेकिन उसकी मार से कोई नहीं बच पाता है. यह ऐसा टैक्स है, जिसका भुगतान हर कोई करता है. अभी भारत में खुदरा महंगाई की दर 7 फीसदी है और यह लगातार आठ महीने से रिजर्व बैंक के 6 फीसदी के अपर लिमिट से ऊपर है. महंगाई का सबसे बुरा असर यह होता है कि इसके कारण पैसों की वैल्यू कम हो जाती है यानी परचेजिंग पावर कम हो जाती है. आइए जानते हैं कि 1000 रुपये से 20 साल पहले क्या-क्या खरीदना संभव था और आज इतने रुपये में क्या खरीदा जा सकता है...

आज तक की सहयोगी वेबसाइट बिजनेस टुडे ने इस तुलना के लिए सीएमआईई के हिस्टॉरिकल डेटा की मदद ली है. इससे पता चलता है कि पिछले 20 साल के दौरान कुछ चीजों के दाम तो 400 फीसदी से ज्यादा बढ़ गए हैं. बिजनेस टुडे ने तुलना के लिए अनाजों, दालों, पेट्रोल और पेट्रोलियम उत्पादों जैसे कमॉडिटीज अैर अन्य कीमती धातुओं की कीमतों का सहारा लिया. इसे देखकर साफ पता चलता है कि किस तरह से पिछले 20 साल के दौरान भारतीयों की क्रय शक्ति प्रभावित हुई है.

अनाज: पिछले 21 साल के दौरान गैर-बासमती चावल की कीमत 423 फीसदी बढ़ी है. 2000-01 में जहां इसकी थोक कीमत 5.27 रुपये थी, वहीं अब यह बढ़कर 27.55 रुपये पर पहुंच गई है. इस तरह देखें तो 2001 में 1000 रुपये में 190 किलो गैर-बासमती चावल खरीदना संभव था, लेकिन अभी महज 36 किलो खरीद पाना संभव है. इसी तरह बासमती चावल की कीमत 629 रुपये क्विंटल से बढ़कर 6107 रुपये हो गई है. यह 870 फीसदी की भारी-भरकम उछाल है. गेहूं की कीमतें इन 21 सालों के दौरान 166 फीसदी बढ़ी हैं. इसी तरह ज्वार और बाजरा के भाव इस दौरान क्रमश: 420 फीसदी और 242 फीसदी ऊपर गए हैं.

दाल: 2000-01 के दौरान अरहर की कीमत 1800 रुपये क्विंटल थी, जो अभी 5820 रुपये है. यह 21 साल में 224 फीसदी की उछाल है. इसी तरह चना की कीमतें 1400 रुपये क्विंटल से 263 फीसदी बढ़कर 5090 रुपये पर पहुंच गई हैं. अन्य दालों की बात करें तो उड़द, मूंग और मसूर के भाव में इस दौरान क्रमश: 264 फीसदी, 253 फीसदी और 340 फीसदी की तेजी आई है. इसका मतलब हुआ कि 2001 में 1000 रुपये में 59 किलो उड़द दाल खरीदी जा सकती थी, लेकिन अभी हजार रुपये में महज 16 किलो मिल पाएगी.

पेट्रोलियम प्रोडक्ट: 2002-03 में दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 29.5 रुपये लीटर थी, जो अभी 233 फीसदी बढ़कर 98 रुपये पर पहुंच गई है. इसी तरह डीजल का भाव 19 रुपये से 360 फीसदी बढ़कर 87.5 रुपये लीटर हो गया है. इसका मतलब हुआ कि 2003 में 1000 रुपये में 52 लीटर डीजल मिल जाता, लेकिन अभी सिर्फ 11 लीटर मिल पाएगा.

सोना और चांदी: 2004-05 में मुंबई बाजार में 10 ग्राम सोना 6000 रुपये में मिल जाता था. अभी इसकी कीमत 700 फीसदी बढ़कर 48 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है. इसी तरह चांदी की कीमत 2004-05 के 10350 रुपये किलो से 527 फीसदी बढ़कर 64,900 रुपये प्रति किलो हो गई है.

प्रति व्यक्ति आय: ऐसा नहीं है कि इस दौरान सिर्फ खराब ही खराब हुआ है. कोई शक नहीं कि महंगाई के कारण परचेजिंग पावर कम हुई है, लेकिन इसके साथ-साथ लोगों की आमदनी भी बढ़ी है. 2000-01 के दौरान भारत की प्रति व्यक्ति आय महज 18,667 रुपये थी. अभी यह बढ़कर 1.50 लाख रुपये हो गई है. इसका मतलब हुआ कि बीते 21 सालों के दौरान भारत में लोगों की औसत आमदनी 700 फीसदी बढ़ी है.

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें