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ऑक्सीजन की किल्लत से देश को मई में मिल सकती है राहत! इन मोर्चों पर चल रही तैयारी

कोरोना की दूसरी लहर के बीच देश में ऑक्सीजन की भारी किल्लत बनी हुई है. दिल्ली, मुंबई समेत कई शहरों के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के चलते लोग दम तोड़ रहे हैं. इस बीच मेडिकल ऑक्सीजन इंडस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि मई के मध्य तक इस स्थिति से थोड़ी राहत मिल सकती हैं. जानें पूरी खबर.

देश में ऑक्सीजन की किल्ल्त बनी हुई है (सांकेतिक फोटो) देश में ऑक्सीजन की किल्ल्त बनी हुई है (सांकेतिक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ‘कोरोना से 8 गुना बढ़ी ऑक्सीजन की खपत’
  • ‘इस संकट के लिए कोई पहले से तैयार नहीं था’
  • ‘लॉजिस्टिक दिक्कतें कुछ हफ्ते में हो जाएंगी दूर’

कोरोना की दूसरी लहर के बीच देश में ऑक्सीजन की भारी किल्लत बनी हुई है. दिल्ली, मुंबई समेत कई शहरों के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के चलते लोग दम तोड़ रहे हैं. इस बीच मेडिकल ऑक्सीजन इंडस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि मई के मध्य तक इस स्थिति से थोड़ी राहत मिल सकती हैं. जानें पूरी खबर.

कोरोना से 8 गुना बढ़ी ऑक्सीजन की खपत
देश में कोरोना के बिगड़ते हालात से मेडिकल ऑक्सीजन की खपत अचानक से बढ़ गई है. मेडिकल ऑक्सीजन बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी Linde India Plc के मलय बनर्जी का कहना है कि इस महीने देश में ऑक्सीजन की दैनिक खपत सामान्य दिनों की तुलना में 8 गुना बढ़कर 7,200 टन हो गई है.

मई के मध्य तक मिल सकती है राहत
मेडिकल ऑक्सीजन इंडस्ट्री से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से रायटर्स ने खबर दी है कि मई के मध्य तक ऑक्सीजन की किल्लत से राहत मिलने की उम्मीद है. इसकी वजह ऑक्सीजन का उत्पादन 25% बढ़ना है, साथ ही मांग बढ़ने के साथ-साथ ऑक्सीजन के मालवहन के लिए ट्रांसपोर्ट स्ट्रक्चर में सुधार होना भी एक वजह है.

‘कोई तैयार नहीं था इस संकट के लिए’
दिल्ली और मुंबई के दर्जनों अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ते मरीजों को लेकर मलय बनर्जी का कहना है, ’देश में मेडिकल ऑक्सीजन का उपभोग बढ़ा है. अस्पताल मरीजों के परिजनों को ऑक्सीजन के सिलेंडर लेकर इधर-उधर दौड़ा रहे हैं. ये संकट का समय है और कोई इसके लिए तैयार नहीं था.’
बनर्जी ने कहा कि Linde India के अलावा अन्य आपूर्तिकर्ता भी अपनी ऑक्सीजन क्षमता बढ़ा रहे हैं. मई के मध्य तक देश में ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता बढ़कर 9,000 टन प्रति दिन से अधिक होने की उम्मीद है.

‘लॉजिस्टिक दिक्कतों को भी कर लिया जाएगा दूर’
मलय बनर्जी ने कहा कि ऑक्सीजन के तेजी से मूवमेंट में आ रही लॉजिस्टिक दिक्कतों को भी आने वाले हफ्तों में दुरुस्त कर लिया जाएगा. इससे पूर्वी भारत के राज्यों में बनने वाली सरप्लस ऑक्सीजन को देश के उत्तरी और पश्चिमी राज्यों में भेजा जा सकेगा जहां वास्तव में ऑक्सीजन का संकट है.

उन्होंने कहा कि देश में तरल ऑक्सीजन को लाने ले जाने के लिए 100 क्रायोजनिक कंटेनर्स का आयात किया जा रहा है. इसमें से 60 करीब Linde India को मिलेंगे. अधिकतर कंटेनरों को ऑक्सीजन एक्सप्रेस के माध्यम से भेजा जाएगा और हर कंटेनर में 80 से 160 टन तक तरल ऑक्सीजन आती है.

 

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