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सरकारी बैंकों को 20000 करोड़ दे सकती है सरकार, दूसरी तिमाही की रिपोर्ट का इंतजार

बैंकों की आर्थिक सेहत को दुरुस्त करने के लिए वित्त मंत्रालय चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में बैंकों को पूंजी समर्थन उपलब्ध करा सकता है.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • सरकारी बैंकों को अक्टूबर-दिसंबर के बीच मिल सकती है ये पूंजी
  • दूसरी तिमाही के नतीजों के बाद बैंकों की जरूरतों का आकलन
  • बैंकों के लिए बजट में नहीं हुआ था फंड का प्रावधान

देश के सरकारी बैंकों को वित्त मंत्रालय बड़ी राहत देने की तैयारी में है. बैंकों की आर्थिक सेहत को दुरुस्त करने के लिए वित्त मंत्रालय चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में बैंकों को पूंजी समर्थन उपलब्ध करा सकता है.

दरअसल, सरकार की ओर से संसद के बीते सत्र में पब्लिक सेक्टर बैंकों के लिए 20,000 करोड़ रुपये के कोष को मंजूरी दी गई है. संसद ने 2020-21 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांग के पहले बैच के तहत पब्लिक सेक्टर बैंकों के लिए 20,000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं.

सरकारी बैंकों की सुधरेगी सेहत?

खबरों के मुताबिक रेग्युलेटरी कैपिटल की अनिवार्यता को पूरा करने के लिए अक्टूबर-दिसंबर की तिमाही में बैंकों को ये पूंजी उपलब्ध कराई जा सकती है. क्योंकि बैंकों के दूसरी तिमाही के नतीजों से ये साफ हो जाएगा कि किस बैंक को रेग्युलेटरी कैपिटल की जरूरत है और उसी के अनुरूप पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड जारी किए जाएंगे.

वहीं सरकारी बैंकों को चालू वित्त वर्ष के दौरान इक्विटी और बॉन्ड के जरिये पूंजी जुटाने को पहले ही शेयरधारकों की मंजूरी मिल चुकी है. गौरतलब है कि सरकार ने बजट 2020-21 में पब्लिक सेक्टर बैंकों में पूंजी डालने को लेकर कोई ऐलान नहीं किया था. लेकिन अब हालात को देखते हुए सरकार ने ये कदम उठाए हैं.

पिछले साल 70 हजार करोड़ की मदद

इससे पहले वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार ने पब्लिक सेक्टर बैंकों में कुल 70,000 करोड़ रुपये लगाए थे. जिसमें पंजाब नेशनल बैंक को सरकार से 16,091 करोड़ रुपये का निवेश मिला था. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को 11,768 करोड़ रुपये, केनरा बैंक को 6,571 करोड़ रुपये और इंडियन बैंक को 2,534 करोड़ रुपये मिले थे.

इसके अलावा इलाहाबाद बैंक को 2,153 करोड़ रुपये, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को 1,666 करोड़ रुपये और आंध्रा बैंक को 200 करोड़ रुपये मिले थे. इन तीनों बैंकों का अब अन्य बैंकों के साथ विलय हो चुका है.

 

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