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चीनी कंपनी Evergrande ने फिर दुनिया को डराया, दो बार किया पेमेंट डिफॉल्ट 

Evergrande crisis: चीन की रियल एस्टेट कंपनी Evergrande करीब 304 अरब डॉलर (करीब 22.45 लाख करोड़ रुपये) के भारी कर्ज में डूबी है. अब इसकी कर्ज चुकाने की क्षमता को लेकर संदेह बढ़ गया है.

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दिवालिया होने की कगार पर Evergrande दिवालिया होने की कगार पर Evergrande
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिवालिया होने की कगार पर कंपनी
  • पूरी दुनिया की है इस पर नजर

चीनी कंपनी Evergrande का संकट खत्म होता नहीं दिख रहा. चीन का रियल एस्टेट ग्रुप Evergrande दिवालिया होने की कगार पर है और इसके बारे में आने वाली किसी भी नेगेटिव खबर से दुनिया भर के शेयर बाजारों को बुखार आ जाता है. अब खबर यह है कि इस कंपनी ने पिछले दस दिनाें में दो बार विदेशी कर्जदाताओं का पेमेंट डिफॉल्ट कर दिया है.

चीन की यह दूसरी सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी करीब 304 अरब डॉलर (करीब 22.45 लाख करोड़ रुपये) के भारी कर्ज में डूबी है. अब इसकी कर्ज चुकाने की क्षमता को लेकर संदेह बढ़ गया है. Evergrande Group ने पिछले कुछ हफ्तों में यह कंपनी दो बार बॉन्ड कूपन पेमेंट यानी विदेशी कर्जदाताओं को ब्याज रिटर्न के भुगतान में विफल रही है. 

नकदी बहुत कम

Nikkei Asia की एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के पास अब नकदी बहुत कम बची है और इसके पहले भी यह तमाम सप्लायर्स, बैंकों और छोटे कर्जदाताओं का पैसा चुकाने में नाकाम रही है. इसकी वजह से पिछले कुछ महीनों में करीब 400 प्रोजेक्ट्स पर काम रुक गया था. हालांकि कंपनी का दावा है कि इसमें से करीब 20 फीसदी पर काम फिर से शुरू हो गया है.

नहीं दे पाई ब्याज 

कंपनी को बुधवार को विदेशी बॉन्ड पर करीब 4.6 करोड़ डॉलर का ब्याज भुगतान करना था. लेकिन न तो बॉन्ड धारकों को ब्याज मिला और न ही कंपनी की तरफ से कोई नोटिस. पिछले हफ्ते भी कंपनी ने ब्याज नहीं दिया था. कंपनी को अगले साल कई बॉन्ड की मैच्योरिटी पर 7.7 अरब डॉलर की भारी राश‍ि चुकानी है. 

चीन की समूची अर्थव्यवस्था पर असर! 

Evergrande दिवालिया होने की कगार पर है और इसका असर पूरी दुनिया के शेयर बाजारों (Share Market) पर पड़ा है. आशंका है कि यह कहीं चीन में अमेरिका के सब-प्राइम और लीमैन ब्रदर्स जैसा संकट न साबित हो जाए. इसकी वजह से पिछले हफ्ते दुनिया के शेयर बाजार पस्त रहे और इसका असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी पड़ा.

Evergrande खस्ताहाल है और इसका असर चीन की समूची अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जाने लगी. भारत में कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी एवं सीईओ उदय कोटक ने इसे अमेरिका के लीमैन जैसा संकट बताया है.

 

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