scorecardresearch
 

फिरौती के लिए गौतम अडानी का हुआ था अपहरण, एक बार आतंकी हमले में भी बची थी जान!

गौतम अडानी की सुरक्षा व्यवस्था काफी पुख्ता रहती है. गौतम अडानी कई विपरीत परिस्थितियों से बाहर निकले हैं. नब्बे के दशक में गौतम अडानी का अपहरण हुआ था. कहा जाता है कि फिरौती के लिए उनका अपहरण किया गया था.

X
संकट में घबराते नहीं हैं गौतम अडानी संकट में घबराते नहीं हैं गौतम अडानी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • किसी भी राजनीतिक दल के प्रति झुकाव नहीं रखता.
  • 26/11 मुंबई हमले में भी बाल-बाल बचे थे अडानी

उद्योगपति गौतम अडानी (Gautam Adani) आज 60 साल के हो गए हैं. गौतम अडानी बेहद सादगी से जन्मदिन मनाते हैं, वैसे भी वे आम जिंदगी में भी चमक-दमक से दूर रहते हैं. लेकिन कारोबार के मोर्चे पर उनका कोई तोड़ नहीं है. पिछले दो दशक में उन्होंने अपने कारोबार का परचम देश-दुनिया में लहराया है. 

गौतम अडानी (Gautam Adani) हमेशा राजनीति से दूर रहने की कोशिश करते हैं. उनका कहना है, ‘मुझे राजनीति पसंद नहीं है. मैं किसी भी राजनीतिक दल के प्रति झुकाव नहीं रखता. सभी राजनीतिक दलों में मेरे दोस्त हैं. लेकिन मैं उनके साथ कभी भी राजनीति की बातें नहीं करता. हम केवल विकास संबंधी मसलों पर चर्चा करते हैं.'

राजनीति से दूर रहते हैं गौतम अडानी

गौतम अडानी हमेशा राजनीति या सत्ता का कोई अनुचित फायदा उठाने से जुड़े सवालों को सिरे से खारिज करते हैं. इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में अडानी ने कहा था, ‘सरकार से डीलिंग का मतलब यह नहीं होता कि आप घूस ही दे रहो हो. अफसरों और राजनीतिज्ञों के साथ काम करने का मेरा अनुभव बताता है कि आप अगर किसी भरोसेमंद कारोबारी समूह से हैं तो वे निश्चित रूप से आपकी मदद करते हैं. आखिर वे भी अपने संसदीय क्षेत्र, राज्य या देश का विकास चाहते हैं.‘

हालांकि गौतम अडानी का साफ कहना है कि ‘मैं ऐसे नेताओं को पसंद नहीं करता जिनमें कोई दूरदृष्टि न हो और सिर्फ पैसा बनाना चाहते हों. मैं उन नेताओं को पसंद करता हूं जिनके पास कोई विजन हो.‘

संकट में घबराए नहीं

गौतम अडानी कई विपरीत परिस्थितियों से बाहर निकले हैं. नब्बे के दशक में गौतम अडानी का अपहरण हुआ था. कहा जाता है कि फिरौती के लिए उनका अपहरण किया गया था. इसलिए अब उनकी सुरक्षा व्यवस्था काफी पुख्ता रहती है. साल 1997 में उनके अपहरण की एक घटना ने सबको चौंका दिया था. 

एक स्थानीय माफिया के गुर्गों के द्वारा अपहरण कर लिया गया था. बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया. यह रिहाई कैसे हुई और अपहरण क्यों किया गया था, इसके बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आ पाई.

इसी तरह 26 नवंबर 2008 के आतंकी हमले के दौरान ताज होटल में थे और उसके सर्वाइवर हैं. वह वहां से बाहर निकलने वाले अंतिम लोगों में से थे. वह ताज होटल में डिनर के लिए गए थे. 

गौतम अडानी जीवन के उतार-चढ़ाव से बहुत परेशान नहीं होते. उनका कहना है, ‘मैंने पैसे को आते-जाते देखा है. जब पैसा आए तो बहुत खुश या पैसा जाने पर दुखी नहीं होना चाहिए. मेरा मानना है कि किसी को भी उस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए जो कि उनके हाथ में नहीं है. नियति अपने आप तय करेगी.’

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें