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Building Materials Prices: 01 जुलाई को ये है सरिया-सीमेंट का भाव, अब भी मिल रहा इतना सस्ता

बारिश का मौसम शुरू होते ही नदियां लबालब भर जाती हैं, जिससे बालू की किल्लत हो जाती है. वहीं बारिश के कारण ईंट (Bricks) का उत्पादन प्रभावित हो जाता है. बारिश के मौसम में इन सामग्रियों के दाम स्वाभाविक तौर पर बढ़ जाते हैं. इनके साथ ही सरिया और सीमेंट भी रफ्तार पकड़ने लग गए.

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बढ़ने लग गई कीमतें (Photo: India e Info) बढ़ने लग गई कीमतें (Photo: India e Info)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बारिश के मौसम में बढ़ जाती है कीमतें
  • पिछले महीने से चढ़ने लग गए भाव

देश के लगभग हर हिस्से में मानसून (Monsoon) पहंच चुका है और हर जगह बारिश हो रही है. कई राज्यों में तो भारी बारिश से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है और कई बड़े शहर जलजमाव की समस्या से जूझ रहे हैं. बारिश के मौसम का इसके अलावा एक खास सेक्टर पर भी बड़ा असर होता है और वह है कंस्ट्रक्शन सेक्टर (Construction Sector). बारिश का मौसम आते ही कंस्ट्रक्शन के कई सामानों जैसे बालू (Sand), सीमेंट (Cement) आदि की कमी होने लगती है. इस कारण इनके भाव भी तेजी से बढ़ते हैं. कुल बातों का लब्बोलुआब ये है कि चाहे घर बनाना हो या कोई अन्य कंस्ट्रक्शन का काम हो, लागत बढ़ जाती है. हालांकि अभी भी भवन निर्माण सामग्रियों (Building Materials) के दाम बहुत नहीं चढ़े हैं. खासकर सरिया (Iron Bars) और सीमेंट जैसी सामग्रियां 01 जुलाई को भी अपने पीक से ठीक-ठाक सस्ती मिल रही हैं.

इस कारण बढ़ने लगे निर्माण सामग्रियों के भाव

भवन निर्माण सामग्रियों की कीमतें (Building Materials Prices) इस साल के मार्च-अप्रैल महीने के दौरान अपने हाई लेवल पर थीं. उसके बाद सरिया (Saria), सीमेंट (Cement) जैसी सामग्रियों की कीमतों में तेजी से नरमी आई. जून महीने के पहले सप्ताह तक सरिया और सीमेंट के भाव लगातार गिरे. सरिया के मामले में तो भाव करीब-करीब आधे हो गए थे. जून महीने में मानसून की आहट पाते ही फिर से इनके दाम बढ़ने लगे. दरअसल बारिश का मौसम शुरू होते ही नदियां लबालब भर जाती हैं, जिससे बालू की किल्लत हो जाती है. वहीं बारिश के कारण ईंट (Bricks) का उत्पादन प्रभावित हो जाता है. बारिश के मौसम में इन सामग्रियों के दाम स्वाभाविक तौर पर बढ़ जाते हैं. इनके साथ ही सरिया और सीमेंट भी रफ्तार पकड़ने लग गए.

मार्च-अप्रैल की तुलना में सरिया अब भी सस्ता

सरिया की बात करें तो अभी भी दो-तीन महीने पहले के हाई लेवल से यह काफी नीचे चल रहा है. जहां मार्च के महीने में कुछ जगहों पर सरिये का भाव 85 हजार रुपये टन तक पहुंच गया था, वहीं अभी यह अलग-अलग शहर के हिसाब से 49,000 रुपये से लेकर 58,500 रुपये प्रति टन तक के भाव में मिल रहा है. जून महीने के पहले सप्ताह में तो यह कम होकर कई जगहों पर 44 हजार रुपये टन के पास आ गया था. ब्रांडेड सरिये का भाव भी कम होकर इस महीने की शुरुआत में 80-85 हजार रुपये प्रति टन तक आ गया था, जो मार्च 2022 में 01 लाख रुपये प्रति टन के पास पहुंच गया था. इस चार्ट में देखिए सरिये का औसत भाव पिछले कुछ महीनों के दौरान किस तरह उतार-चढ़ाव से गुजरा है...

सरिया की औसत खुदरा कीमत (रुपये प्रति टन):

नवंबर 2021 :      70,000
दिसंबर 2021 :    75,000
जनवरी 2022 :    78,000
फरवरी 2022 :    82,000
मार्च 2022 :        83,000
अप्रैल 2022 :      78,000
मई 2022 (शुरुआत) :    71,000
मई 2022 (अंत):           63,000
जून 2022 (शुरुआत):    50,000
जून 2022 (अंत):          55000
01 जुलाई:                   56000

अब इस चार्ट में देखिए कि भारत के प्रमुख शहरों में अभी सरिये का क्या रेट चल रहा है. आयरनमार्ट (ayronmart) वेबसाइट सरिये की कीमतों की घट-बढ़ पर नजर रखती है और उसी आधार पर कीमतों को अपडेट करती है. पिछले महीने मुंबई अकेला ऐसा शहर रहा, जहां सरिया सस्ता हुआ. मुंबई में बीते महीने सरिया के भाव 400 रुपये प्रति टन कम हुए. वहीं दूसरी ओर अन्य शहरों में इसमें 1,100 रुपये से लेकर 3,800 रुपये प्रति टन तक की तेजी आई. देखें प्रमुख शहरों में क्या है सरिये का भाव... सभी कीमतें रुपये प्रति टन में हैं.

शहर (राज्य)                        04 जून    01 जुलाई

दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल):         45,300    49,000 (+3700)
कोलकाता (पश्चिम बंगाल):    45,800     49,500 (+3700)
रायगढ़ (छत्तीसगढ़):            48,700    52,500 (+3800)
राउरकेला (ओडिशा):          50,000    53,500 (+3500)
नागपुर (महाराष्ट्र):               51,000    54,000 (+300)
हैदराबाद (तेलंगाना):           52,000    55,500 (+3500)
जयपुर (राजस्थान):             52,200    55,700 (+3500)
भावनगर (गुजरात):             52,700    56,500 (+3800)
मुजफ्फरनगर (UP):           52,900    54,500 (+1600)
गाजियाबाद (UP):              53,000    55,300 (+2300)
इंदौर (मध्य प्रदेश):             53,500    55,200 (+1700)
गोवा:                               53,800    56,700 (+2900)
जालना (महाराष्ट्र):               54,000    55,100 (+1100)
मंडी गोविंदगढ़ (पंजाब):      54,300    56,500 (+2700)
चेन्नई (तमिलनाडु):             55,000    57,000 (+2000)
दिल्ली:                             55,000    56,900 (+1900)
मुंबई (महाराष्ट्र):                55,200    54,800 (-400)
कानपुर (उत्तर प्रदेश):        57,000    58,500 (+1500)

 

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