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BMW, Audi जैसी 4 लक्जरी कार कंपनियों पर 100 करोड़ डॉलर का जुर्माना, ऐसे बाल-बाल बची Daimler

BMW और Audi जैसी लक्जरी कार बनाने वाली 4 बड़ी कंपनियों पर यूरोप में 100 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगा है. लेकिन Daimler इससे बच गई. आखिर इसकी क्या वजह रही और ये कंपनियां ऐसी कौन सी गड़बड़ी कर रही थीं उन पर इतना भारी जुर्माना लगा है...

BMW, Audi जैसी 4 लक्जरी कारों पर जुर्माना BMW, Audi जैसी 4 लक्जरी कारों पर जुर्माना
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ‘मिलीभगत कर रोक दिया था टेक्निकल डेवलपमेंट’
  • ‘प्रदूषण कम करने वाली टेक्नीक से जुड़ा है मामला’
  • ‘अतीत में Volkswagen कर चुकी ‘Dieselgate''

लक्जरी कार बनाने वाली दुनिया की 4 बड़ी कंपनियों पर यूरोपीय संघ (EU) ने 100 करोड़ डॉलर (करीब 7,483 करोड़ रुपये ) का जुर्माना लगाया है. इन कंपनियों में BMW, Volkswagen, Audi और Porsche जैसे नाम शामिल हैं.

कर रही थी ये गड़बड़ी
एपी की खबर के मुताबिक EU के एक्सीक्यूटिव कमीशन ने कहा कि Daimler, BMW, Volkswagen, Audi और Porsche जैसी लक्जरी कार कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल कारों से होने वाले प्रदूषण को सीमित करने वाली प्रौद्योगिकी पर आपस में प्रतिस्पर्धा करना बंद कर दिया.

इसके स्थान पर उन्होंने मिलीभगत करके कार से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रण करने वाले सिस्टम को बनाने और उसे विकसित करने का काम सीमित कर दिया. इसलिए इन कंपनियों पर जुर्माना लगा, लेकिन Daimler इससे बच गई.

जुर्माने से क्यों बची Daimler

EU की जांच के दायरे में लक्जरी कार कंपनी Daimler भी थी, लेकिन उस पर जुर्माना नहीं लगाया गया. इसकी वजह Daimler ने ही यूरोपीय संघ को लक्जरी कार कंपनियों के समूह बनाकर मिलीभगत करने की पूरी जानकारी दी.

EU ने पहली बार लगाया ऐसा जुर्माना

ये पहली बार है जब EU ने कार कंपनियों पर टेक्निकल डेवलपमेंट को रोकने के लिए जुर्माना लगाया है. EU की एंटी-ट्रस्ट चीफ मार्गेट वेस्टेगर का कहना है कि इन कंपनियों के पास सरकारी मानकों से कम प्रदूषण फैलाने की तकनीक है, लेकिन मिलीभगत से प्रतिस्पर्धा को रोककर इन कंपनियों ने ग्राहकों को कम प्रदूषण वाली कार खरीदने से रोका है.

Volkswagen पहले भर चुकी है अरबों का जुर्माना

हालांकि मौजूदा मामला पिछले दशक के ‘डीजलगेट’ मामले से सीधे नहीं जुड़ा है. तब Volkswagen ने माना था कि दुनियाभर में उसने 1.1 करोड़ ऐसी गाड़ियां बेची है जिनमें एक धोखा देने वाला सॉफ्टवेयर लगा है. ये सॉफ्टवेयर कारों के मशीन पर टेस्ट के दौरान नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन को कम दिखाता था, जबकि हकीकत में कारें ज्यादा प्रदूषण फैलाती थीं. इस गड़बड़ी के चलते फॉक्सवैगन को कारों को ठीक करने और जुर्माने पर लगभग 35 अरब डॉलर (करीब 2600 अरब रुपये) खर्च करने पड़े थे.

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