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इलेक्ट्रिफिकेशन ही फ्यूचर की ताकत, भारत इसपर तेजी से बढ़ रहा है आगे: सागर अडानी

सागर अडानी का कहना है कि सिर्फ सौर या फिर पवन ऊर्जा से काम नहीं चलेगा. जमीन की कमी और मौसम पर निर्भरता को देखते हुए भारत को एक संतुलित मिश्रण चाहिए, और 21वीं सदी में वही देश मजबूत रहेगा, जिसकी ऊर्जा तक पहुंच सुरक्षित और सस्ती होगी. 

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अडानी ग्रुप का एनर्जी सिक्योरिटी पर पूरा फोकस. (File Photo: ITG)
अडानी ग्रुप का एनर्जी सिक्योरिटी पर पूरा फोकस. (File Photo: ITG)

अडानी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक सागर अडानी का कहना है कि दुनिया के किसी भी कोने में होने वाले संघर्ष का असर भारत अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलता है. क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकतर ईंधन आयात करता है, जिससे वैश्विक कीमतों में उछाल आते ही देश पर आर्थिक दबाव बढ़ जाता है. 

नई दिल्ली में आयोजित 'द इकोनॉमिस्ट रेजिलिएंट फ्यूचर्स समिट' में सागर अडानी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर स्पष्ट संदेश दिया. उन्होंने कहा कि आज के दौर में जिस तरह से मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है, समुद्री व्यापारिक मार्ग असुरक्षित हो रहे हैं. ऐसे में भारत के सामने बचाव यही उपाय है कि वह अपनी निर्भरता जीवाश्म ईंधन से हटाकर 'इलेक्ट्रिफिकेशन' यानी बिजली पर ले आए. 

सागर अडानी ने जोर देकर कहा कि 21वीं सदी में वही देश मजबूत रहेगा, जिसकी ऊर्जा तक पहुंच सुरक्षित और सस्ती होगी. 

एनर्जी पर अडानी ग्रुप फोकस

उन्होंने कहा कि भारत साल 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने का सपना देख रहा है. लेकिन इसके लिए भारत को तेजी के साथ कई सेक्टर्स में काम करने होंगे. इसके लिए सागर अडानी ने कई चौंकाने वाले आंकड़े दिए. उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में भारत की प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत वैश्विक औसत का केवल एक-तिहाई और चीन का 5वां हिस्सा है. विकसित बनने के लिए भारत को अगले दो दशकों में लगभग 2,000 गीगावाट (GW) नई क्षमता जोड़ने की जरूरत है.

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उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक साल 2035 तक पूरी दुनिया में ऊर्जा की मांग बढ़ने का सबसे बड़ा केंद्र भारत होगा. क्योंकि शहरीकरण और बढ़ती आय के कारण खपत में तेजी आएगी. इसका मतलब यह है कि भारत जो बिजली उत्पादन करता है और जिस गति से विद्युतीकरण करता है, वह आने वाले वर्षों में वैश्विक ऊर्जा बाजारों को आकार देगा. 

सिर्फ रिन्यूएबल ही काफी नहीं
सागर अडानी का कहना है कि सिर्फ सौर या फिर पवन ऊर्जा से काम नहीं चलेगा. जमीन की कमी और मौसम पर निर्भरता को देखते हुए भारत को एक संतुलित मिश्रण चाहिए. इसमें रिन्यूएबल के साथ-साथ हाइड्रो (जल विद्युत), कुशल थर्मल पावर और न्यूक्लियर एनर्जी का होना जरूरी है ताकि सप्लाई में कभी रुकावट न आए.

सागर अडानी के बारे में 
बता दें, ब्राउन यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स की पढ़ाई करने वाले 31 वर्षीय सागर अडानी ने ग्रुप के एनर्जी पोर्टफोलियो को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है. खास बात यह है कि उन्होंने अपना करियर सीधे फील्ड से शुरू किया था. सागर अडानी साल 2015 में अडानी ग्रुप में शामिल हुए और समूह के भीतर अडानी ग्रीन एनर्जी में सौर और पवन ऊर्जा पोर्टफोलियो के निर्माण का श्रेय उन्हें ही दिया जाता है. आज वह अडानी ग्रीन एनर्जी के जरिए $100 बिलियन के निवेश प्लान को जमीन पर उतार रहे हैं.

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सागर अडानी का मानना है कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता सिर्फ 140 करोड़ भारतीयों को बाहरी झटकों से नहीं बचाएगी, बल्कि यह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को स्थिरता देगी.

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