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बिज़नेस न्यूज़

भारतीय इकोनॉमी के संकट का दौर खत्म, एक सुर में अच्छे दिन की बात!

भारतीय इकोनॉमी में सुधार के संकेत
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कोरोना संकट की वजह से केंद्र सरकार को पूरे देश में लॉकडाउन लगाना पड़ा था. सरकार के इस फैसले से आर्थिक गतिविधियां थम गईं और अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई. लॉकडाउन की वजह से इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी में 23.9 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई. यह भारत के आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट थी. 

खुद मोर्चे पर प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी
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दरअसल जीडीपी में भारी गिरावट के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं गहराने लगी. तमाम रेटिंग एजेंसियों ने आने वाली तिमाही के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान पर कैंची चला दी, लेकिन इन सबके बीच केंद्र सरकार लगातार इकोनॉमी में तेज रिकवरी के लिए फैसले ले रही थी. कोरोना संकट के बीच तीन बड़े आर्थिक पैकेज का ऐलान हो चुका है. जिसके अब सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं. अब जीडीपी को लेकर रेटिंग एजेंसियों के सुर बदलने लगे हैं. एक के बाद एक रेटिंग एजेंसियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में उम्मीद से तेज रिकवरी का अनुमान जताया है. 
 

गोल्डमैन सैक्स 
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गोल्डमैन सैक्स 
ग्लोबल रिसर्च फर्म और रेटिंग एजेंसी गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि अगले वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से ग्रोथ करेगी. गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने FY2021 के लिए भारत के जीडीपी अनुमान में सुधार किया है. गोल्डमैन सैक्स ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए भारत के इकोनॉमिक ग्रोथ के आकलन को सुधारते हुए अब माइनस 10.3% ग्रोथ का अनुमान लगाया है.
 

इकोनॉमी में तेज रिकवरी का अनुमान
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इससे पहले सितंबर में रेटिंग एजेंसी गोल्डमैन सैक्स ने भारतीय अर्थव्यवस्था में -14.8% गिरावट आने का अनुमान लगाया था. अब इसमें एजेंसी ने 4.5% का सुधार किया है. Goldman Sachs ने अपनी रिपोर्ट में अगले वित्त वर्ष यानी 2021-22 में GDP में 13% सुधार आने का अनुमान लगाया है. इससे पहले सितंबर में गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि था अगले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी में 10.9% का सुधार आएगा.

मॉर्गन स्टैनली 
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मॉर्गन स्टैनली 
रेटिंग एजेंसी मॉर्गन स्टैनली ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था को अच्छा सहारा मिला है और इसकी वजह से अगले साल यानी 2021 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 9.8 फीसदी तक पहुंच सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 की चौथी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना-पूर्व के उत्पादन स्तर को हासिल कर लेगी. 

महंगाई पर काबू करना जरूरी
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मॉर्गन स्टैनली के रिसर्च नोट में कहा गया है, 'हमें उम्मीद है कि 2021 में तरक्की में सुधार का कदम मजबूत होगा और साल 2021 में सालाना ग्रोथ रेट 9.8 फीसदी तक पहुंच जाएगा, जबकि 2020 में इसमें 5.7 फीसदी की गिरावट आएगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई सरकार और रिजर्व बैंक के लक्ष्य से ऊपर रहेगी. रिपोर्ट के अनुसार, 'भारत में महंगाई 4 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर रहेगी, लेकिन बाहरी स्थिरता के जोखिम काबू में रहेंगे.'

फिच रेटिंग्स
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फिच रेटिंग्स
रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा है कि वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की विकास दर 9.5 फीसदी रह सकती है. फिच रेटिंग्स ने कोरोना संकट के कारण चालू वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था माइनस 10.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है. फिच ने कहा कि कोरोना संकट के बाद देश की जीडीपी वृद्धि दर के वापस पटरी पर लौटने की उम्मीद है.

मूडीज 
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मूडीज 
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी कैलेंडर वर्ष 2020 के लिए भारत की GDP ग्रोथ के अपने अनुमान को बढ़ा दिया है. मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने इस साल के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर -8.9 फीसदी कर दिया है. इसके पहले रेटिंग एजेंसी ने यह अनुमान -9.6 फीसदी पर रखा था. यानी इस अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी को भारतीय अर्थव्यवस्था में तेज सुधार के संकेत मिल रहे हैं. 

GDP ग्रोथ में सुधार का अनुमान
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इसके अलावा मूडीज ने आने वाले वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत की GDP ग्रोथ के लिए अपने अनुमान को 8.1 फीसद से बढ़ाकर 8.6 फीसद कर दिया है. मूडीज की मानें तो अगले वित्त वर्ष में तेज रिकवरी की उम्मीद है. एजेंसी ने गुरुवार को अपनी ग्लोबल मैक्रो आउटलुक 2021-22 रिपोर्ट में यह जानकारी दी है.

 भारतीय अर्थव्यवस्था में जोरदार बढ़त की उम्मीद
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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कहा कि कोरोना के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट का अंदेशा है, लेकिन अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था लंबी छलांग लगाने में सक्षम होगी. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि 2021 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 8.8 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दर्ज हो सकती है. आईएमएफ ने अपने अनुमानों में कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था में वित्त वर्ष 2020 के दौरान 10.3 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है.