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बिज़नेस न्यूज़

जब सरकारी से प्राइवेट कंपनी बन गई Maruti, धीरे-धीरे सरकार ने छोड़ी डोर!

विनिवेश की राह में चुनौतियां
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केंद्र सरकार ने विनिवेश के जरिए अगले वित्त-वर्ष में 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है. सरकार ने ये भी बताया कि किन कंपनियों में वह अपनी हिस्सेदारी कम करेगी और किन कंपनियों का पूरी तरह से निजीकरण होगा. सरकार ने BPCL, एयर इंडिया समेत कई बैंकों को प्राइवेट के हाथों में सौंपने का प्लान तैयार किया है. (Photo: File)
 

विनिवेश वाली कंपनियों की लंबी लिस्ट
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वैसे सरकार ने विनिवेश वाली कंपनियों की लंबी लिस्ट तैयार कर ली है. जिसमें कुछ घाटे वाली कंपनियां हैं, तो कुछ की बैलेंस शीट मजबूत है. हालांकि विनिवेश की राह में कई चुनौतियां हैं, जिससे निपटना होगा. लेकिन सरकार के पास मारुति सुजुकी और हिंदुस्तान जिंक जैसी कंपनियों का उहादरण है, जिसका निजीकरण फायदे का सौदा रहा है. (Photo: File)

कभी सरकार कंपनी थी मारुति सुजुकी
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अगर बात मारुति सुजुकी की करें तो सरकार ने धीरे-धीरे इस कंपनी को प्राइवेट प्लेयर को सौंप दिया, और आज कंपनी शानदार ग्रोथ दिखा रही है. सरकार के पास मारुति सुजुकी के निजीकरण का सफल फॉर्मूला है. (Photo: File)

मारुति की शुरुआत 16 नवंबर 1970 को हुई थी
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मारुति की शुरुआत 16 नवंबर 1970 को हुई थी. इसका नाम पहले मारुति टेक्निकल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (एमटीएसपीएल) था. इस कंपनी की शुरुआत देसी कार बनाने के लिए डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और असेंबलिंग से संबंधित टेक्निकल सर्विस उपलब्ध कराना था. (Photo: File)

धीरे-धीरे सरकार ने घटाई हिस्सेदारी
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मारुति सुजुकी की शुरुआत 1982 में तत्कालीन सरकार और जापान की ऑटो कंपनी सुजुकी के ज्वाइंट वेंचर के तौर पर हुई थी. उस वक्त इस कंपनी में सरकार की 74% और सुजुकी की 26% हिस्सेदारी थी. सरकार को इस कंपनी से बाहर निकलना था, इसलिए सुजुकी ने 2 बार में अतिरिक्त शेयर खरीदकर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 50 फीसदी तक कर ली. (Photo: File)

2002 में मैनेजमेंट कंट्रोल भी ट्रांसफर
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जिसके बाद साल 1992 में सरकार की मारुति सुजुकी में शेयरहोल्डिंग 50 फीसदी से नीचे आ गई और मारुति को निजी कंपनी घोषित कर दिया गया. उसके बाद 2002 में सरकार ने मैनेजमेंट कंट्रोल भी ट्रांसफर कर दिया और 2007 में बची हुई हिस्सेदारी बेचकर पूरी तरह कंपनी से बाहर हो गई. (Photo: File)

2003 में मारुति सुजुकी की लिस्टिंग
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यानी योजना के तहत सरकार कंपनी में अपनी हिस्सेदारी लगातार कम करती गई. 1982 और 1992 में सुजुकी की शेयरहोल्डिंग बढ़ाई गई, पहले 26 से 40 प्रतिशत, और फिर बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया. मैनेजमेंट कंट्रोल ट्रांसफर होने के बाद साल 2003 में मारुति सुजुकी की शेयर बाजार में लिस्टिंग हो गई. (Photo: File)

 धीरे-धीरे निजीकरण को दिया अंजाम
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जुलाई 2003 में 125 रुपये के प्राइस बैंड पर मारुति सुजुकी का आईपीओ लॉन्च हुआ था, जो फिलहाल 7500 रुपये प्रति शेयर से ऊपर कारोबार कर रहा है. भारत सरकार को मारुति सुजुकी ने शानदार रिटर्न मिला. क्योंकि सरकार ने धीरे-धीरे निजीकरण को अंजाम दिया. (Photo: File)

आज देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी है मारुति सुजुकी
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गौरतलब है कि मारुति सुजुकी आज देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी है. पिछले चार साल से लगातार मारुति सुजुकी की सेंजर वीकल्स मार्केट में 50 फीसदी हिस्सेदारी पर कब्जा है. आज मारुति सुजुकी एक विश्वास का ब्रांड बन गया है. (Photo: File)