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Budget 2022: हलवे के बदले मिठाई, मोदी सरकार ने बदली एक और बजट परंपरा

यूनियन बजट इस साल भी पेपरलेस रहने वाला है. इसे वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर उपलब्ध कराया जाएगा. बजट तैयार करने की प्रक्रिया बिना हलवा सेरेमनी के ही शुरू हो चुकी है.

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नहीं हुई हलवा सेरेमनी नहीं हुई हलवा सेरेमनी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दूसरी बार पेपरलेस रहने वाला यूनियन बजट
  • पहले भी कई परंपराएं बदल चुकी हैं सीतारमण

Union Budget 2022-23: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) अगले सप्ताह की शुरुआत में लोकसभा (Lok Sabha) में बजट पेश करने वाली हैं. कोरोना महामारी की नई लहर के बीच आ रहे इस बजट से लोगों को काफी उम्मीदें हैं. इस बीच वित्त मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि इस बार भी बजट पेपरलेस (Paperless Budget) रहने वाला है. लोकसभा के सभी सदस्यों समेत अन्य सभी लोगों को बजट की डिजिटल (Digital Budget) कॉपी दी जाएगी. महामारी को देखते हुए इस बार हलवा सेरेमनी (Halwa Ceremony) का आयोजन भी नहीं हुआ है.

अधिकारियों को हलवा के बदले मिली मिठाई

आम तौर पर बजट की छपाई (Budget Printing) का काम हलवा सेरेमनी के साथ शुरू होता है. इसके बाद बजट तैयार करने में जुटे सारे अधिकारी मंत्रालय के बेसमेंट में बंद हो जाते हैं. जब लोसकभा में बजट पेश हो जाता है, उसके बाद ही वे किसी से मिल पाते हैं. हालांकि इस बार हलवा सेरेमनी का आयोजन नहीं हुआ है. बजट की तैयारी में जुटे लोगों को हलवा की जगह मिठाइयां दी गई हैं.

ऐसे मिलेगी बजट की डिजिटल कॉपी

बयान में बताया गया कि इस बार भी बजट पेपरलेस रहेगा. इसे मोबाइल ऐप के जरिए भी उपलब्ध कराया जाएगा. सरकार ने पिछले साल भी पेपरलेस बजट पेश किया था. इसके लिए यूनियन बजट मोबाइल ऐप (Union Budget Mobile App) उपलब्ध है. हिन्दी और अंग्रेजी दोनों में उपलब्ध इस ऐप को यूनियन बजट की वेबसाइट (Union Budget Website) से डाउनलोड किया जा सकता है. इसके अलावा ये ऐप एंड्रॉइड (Andriod) और आईओएस (iOS) के ऐप स्टोर पर भी उपलब्ध है. बजट के सारे दस्तावेज वेबसाइट पर भी उपलब्ध होंगे.

पिछले 4 साल में बदल चुकीं ये परंपराएं

यह निर्मला सीतारमण का चौथा बजट होने वाला है. वह एक से ज्यादा बार भारत का बजट पेश करने वाली पहली महिला हैं. इससे प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने 1 बार बजट पेश किया था, जब वित्त मंत्रालय का प्रभार भी उनके पास था. निर्मला सीतारमण इससे पहले भी बजट से जुड़ी परंपराओं में बदलाव कर चुकी हैं. उन्होंने जब अपना पहला बजट पेश किया, परंपराओं में बदलाव की तभी से शुरुआत हो गई.

आजादी के पहले से ही बजट को चमड़े के ब्रीफकेस में पेश करने की परंपरा चलती आ रही थी. निर्मला सीतारमण ने इसके बजाय लाल कपड़ों में लिपटे बही-खाता के रूप में बजट पेश किया. पेपरलेस बजट और हलवा सेरेमनी के बिना तैयारी शुरू करना भी इन्हीं बदलावों के आगे की कड़ी हैं.

 

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