सरकार जनता और इंडस्ट्रीज से इनकम टैक्स वसूलती है, और फिर उसे ही तमाम योजनाओं पर खर्च करती है. एक तरह से सरकारी आय का सबसे बड़ा जरिया इनकम टैक्स है. आज हम उन देशों की बात करेंगे, जहां सबसे ज्यादा इनकम टैक्स वसूला जाता है. आमतौर पर उन देशों के टैक्स सिस्टम को प्रोग्रेसिव माना जाता है, जहां सबसे ज्यादा टैक्स वसूले जाते हैं.
फिनलैंड: इस लिस्ट में पहला नाम फिनलैंड का है, जहां इनकम टैक्स की दर 57.65% है. देश का टैक्स सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाला जीवन मिले. इस प्रकार की टैक्स सिस्टम से सभी को लाभ मिलता है, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कुछ भी हो. फिनलैंड अपने नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा के तहत राष्ट्रीय पेंशन देता है. यह पेंशन 16 साल से ज्यादा के हर उस शख्स को मिल सकती है, जिसे इसकी जरूरत होती है. साथ ही रिटायरमेंट के बाद एम्प्लॉई पेंशन स्कीम के तहत सरकार पेंशन भी देती है. इसके अलावा फिनलैंड सरकार अपने देश के हर नागिरक को हेल्थ इंश्योरेंस भी देती है, जिससे हर शख्स का फ्री में इलाज हो सके. लोगों को बेरोजगारी इंश्योरेंस भी मिलता है. रोजगार जाने पर इसका फायदा मिलता है.
जापान: जापान विश्व में सबसे ज्यादा इनकम टैक्स लेने वाले देशों में से एक है. यहां यह दर 55.95% तक है. यह प्रोग्रेसिव टैक्स सिस्टम का हिस्सा है, जो कि उच्च-आय वाले व्यक्तियों से ज्यादा टैक्स लेने के लिए डिजाइन की गई है.
डेनमार्क: डेनमार्क की व्यक्तिगत आयकर दर 55.9% है. डेनमार्क एक प्रोग्रेसिव टैक्स प्रणाली को फॉलो करता है. यहां ज्यादा कमाने वालों से ज्यादा टैक्स लिया जाता है.
ऑस्ट्रिया: ऑस्ट्रिया में इनकम टैक्स की दरें 55% है. टैक्स राजस्व स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचा विकास सहित आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला को फंडिंग करता है. ये सेवाएं नागरिकों की उच्च गुणवत्ता वाले जीवन का समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण हैं. स्वीडन में इनकम टैक्स की दर 52.3% है. बेल्जियम में इनकम टैक्स दर 50% है. यहां की सरकार ज्यादा टैक्स की मदद से व्यापक सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का समर्थन करती है.
हालांकि, यह बहस का विषय भी रहा है, क्योंकि ज्यादा कमाने वालों पर इस टैक्स सिस्टम से वित्तीय बोझ ज्यादा पड़ता है. आइवरी कोस्ट अपने नागरिकों से 60 फीसदी तक इनकम टैक्स वसूलता है.
ज्यादा टैक्स लेने वाले कई देश अपने नागरिकों के दिव्यांग होने पर उनके सभी प्रकार के खर्चे उठाती है. इनमें उनका इलाज, रहना और खाना-पीना शामिल होता है. ज्यादा टैक्स देने के बावजूद भी फिनलैंड के लोग दुनिया में सबसे ज्यादा खुश रहते हैं. पिछले साल मार्च में आई संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के खुशहाल देशों में फिनलैंड पहले स्थान पर था. रिपोर्ट के मुताबिक फिनलैंड के लोगों की खुशी के कारणों में सामाजिक सुरक्षा, कम भ्रष्टाचार अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं और सरकारी संस्थाओं पर भरोसा था.