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बजट में IDBI के अलावा दो और बैंकों को बेचने का हुआ था ऐलान, फिर मामला ठंडा क्यों?

संसद के पिछले महीने के सत्र में इस कानून में संशोधन का बिल पेश करने की तैयारी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. वित्त मंत्री ने 21 दिसंबर को राज्यसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में बताया था कि अभी इसे कैबिनेट की मुहर नहीं मिल पाई है. यह बिल पिछले सेशन की कार्यसूची में लिस्टेड था.

अगले सत्र में आ सकता है बिल अगले सत्र में आ सकता है बिल
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पिछले बजट में हुआ था दो बैंकों को बेचने का ऐलान
  • बिकने वाली है एक सरकारी बीमा कंपनी भी

वित्त वर्ष 2022-23 (FY23) का बजट पेश होने में अब एक महीने से भी कम समय बचा है. यानी पिछले बजट को पेश हुए 11 महीने से अधिक हो गए, लेकिन उसमें की गई कुछ घोषणाएं अभी तक अधूरी हैं. पिछले बजट में वित्त मंत्री (Finance Minister) ने दो सरकारी बैंक (PSB) और एक सरकारी बीमा कंपनी को बेचने का ऐलान किया था. इसके अलावा आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) में सरकार की बची सारी हिस्सेदारी बेचने का भी इरादा जाहिर किया गया था. इनमें से सिर्फ आईडीबीआई बैक वाली बात ही आगे बढ़ पाई है.

अभी तक नहीं मिली है कैबिनेट की मंजूरी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने फरवरी 2021 में बजट पेश करते हुए कहा था कि सरकार दो बैंकों और एक बीमा कंपनी में हिस्सेदारी बेचकर विनिवेश से चालू वित्त वर्ष में 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाना चाहती है. चालू वित्त वर्ष के समाप्त होने में भी अब बमुश्किल तीन महीने बचे हुए हैं. अभी दो बैंकों के प्राइवेटाइजेशन (Bank Privatization) के प्रस्ताव को कैबिनेट की भी मुहर नहीं लगी है. ऐसे में हर कोई कयास लगा रहा है कि यह मामला आखिर ठंडा क्यों पड़ गया है.

पहले एक बीमा कंपनी बेचने की तैयारी में सरकार

लाइवमिंट की एक हालिया रिपोर्ट की मानें तो सरकार दो बैंकों के निजीकरण से पहले बीमा कंपनी को बेचने की तैयारी में है. हालांकि यह काम भी अगले वित्त वर्ष में होने की संभावना है. मामले से जुड़े लोगों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि चार में से एक सरकारी बीमा कंपनी को अगले वित्त वर्ष के पहले छह महीने में प्राइवेट किया जा सकता है. इस प्रस्तावित विनिवेश में कई निजी बीमा कंपनियां पहले ही दिलचस्पी दिखा चुकी हैं.

बिक सकती है इनमें से कोई एक बीमा कंपनी

अभी चार सरकारी बीमा कंपनियां न्यू इंडिया एश्योरेंस (New India Assurance), नेशनल इंश्योरेंस कंपनी (National Insurance Co.), यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी (United India Insurance Co.) और ओरिएण्टल इंश्योरेंस कंपनी (Oriental Insurance Co.) हैं. अभी यह तय नहीं हुआ है कि किस बीमा कंपनी को प्राइवेट किया जाएगा. मंत्रियों का समूह इस बारे में चर्चा कर रहा है और चालू वित्त वर्ष के अंत से पहले इसपर निर्णय होने के अनुमान हैं.

सारी बीमा कंपनियों को बेचे जाने के कयास

एक संभावना इस बात की भी है कि सरकार सभी बीमा कंपनियों को बेच सकती है. इसके लिए जरूरी कानून पहले ही संसद में पास हो चुका है. संशोधित General Insurance Business Nationalization Act सरकार को किसी भी बीमा कंपनी में हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम करने की इजाजत देता है. हालांकि बैंक के प्राइवेटाइजेशन के लिए जरूरी कानून Banking Regulation Act में अभी संशोधन नहीं हो पाया है.

बजट सेशन में आ सकता है जरूरी बिल

संसद के पिछले महीने के सत्र में इस कानून में संशोधन का बिल पेश करने की तैयारी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. वित्त मंत्री ने 21 दिसंबर को राज्यसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में बताया था कि अभी इसे कैबिनेट की मुहर नहीं मिल पाई है. यह बिल पिछले सेशन की कार्यसूची में लिस्टेड था. अब उम्मीद की जा रही है कि एक महीने के भीतर शुरू हो रहे बजट सत्र में बिल पास किया जा सकता है. ऐसा माना जा रहा है कि सरकार सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक का प्राइवेटाइजेशन कर सकती है.

 

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