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20 रुपये की टिफिन सेवा से 2 करोड़ का कारोबार, जानें पटना की देवनी देवी ने कैसे बदली किस्मत

पटना की देवनी देवी ने 23 साल पहले सिर्फ 20 रुपये से टिफिन सेवा शुरू की थी. आज उनका अम्मा किचन करोड़ों का कारोबार बन चुका है. कई बार काम बंद होने और कोरोना में नुकसान के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. साल 2023 में क्लाउड किचन शुरू किया और अब रोजाना सैकड़ों ऑर्डर पूरे कर रही हैं.

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छोटे टिफिन से बना बड़ा बिजनेस मॉडल (Photo: Aniket Kumar/ITG)
छोटे टिफिन से बना बड़ा बिजनेस मॉडल (Photo: Aniket Kumar/ITG)

बिहार की राजधानी पटना से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां एक महिला ने छोटे से काम की शुरुआत कर आज करोड़ों का कारोबार खड़ा कर दिया. यह कहानी है देवनी देवी की है, जिन्होंने मेहनत और लगन से अम्मा किचन को एक पहचान दिलाई. देवनी देवी आज भले ही एक सफल उद्यमी के रूप में जानी जाती हैं, लेकिन उनकी शुरुआत बेहद साधारण थी. करीब 23 साल पहले उन्होंने सिर्फ 20 रुपये में टिफिन देने का काम शुरू किया था. उस समय उन्होंने यह नहीं सोचा था कि एक दिन यही छोटा सा काम उन्हें इस मुकाम तक पहुंचा देगा.

देवनी देवी बताती हैं कि उनके परिवार में अधिकतर लोग सरकारी नौकरी में थे. वह खुद ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थीं, जिसकी वजह से उन्हें नौकरी करने का मौका नहीं मिला. हालांकि, वह कुछ काम जरूर करना चाहती थीं ताकि खुद भी आत्मनिर्भर बन सकें. घर में अपने बच्चों के लिए खाना बनाते-बनाते उनके मन में यह विचार आया कि क्यों न दूसरे लोगों के लिए भी टिफिन तैयार किया जाए. इसी सोच के साथ उन्होंने कुछ लड़कों के लिए टिफिन बनाना शुरू किया. धीरे-धीरे उनके खाने की तारीफ होने लगी और उनके साथ ग्राहक जुड़ते चले गए.

परिवार के लिए खाना बनाते-बनाते शुरू हुआ कारोबार

समय के साथ उनका काम बढ़ता गया और वह सैकड़ों लोगों तक टिफिन पहुंचाने लगीं. लेकिन यह सफर आसान नहीं था. देवनी देवी बताती हैं कि उनके काम को कई बार रुकना पड़ा. चार बार उनका काम पूरी तरह से बंद हो गया, लेकिन हर बार उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और फिर से शुरुआत की. सबसे बड़ी चुनौती साल 2020 में आई, जब कोरोना महामारी के कारण उनका काम पूरी तरह से बंद हो गया. करीब तीन साल तक उनका व्यवसाय ठप रहा. यह समय उनके लिए बेहद कठिन था, लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी.

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साल 2023 में उन्होंने एक नई शुरुआत करने का फैसला किया और क्लाउड किचन की शुरुआत की. शुरुआत में हालात आसान नहीं थे. करीब डेढ़ से दो महीने तक उन्हें एक भी ऑर्डर नहीं मिला. इसके बावजूद उन्होंने धैर्य बनाए रखा और लगातार प्रयास करती रहीं. आखिरकार उनका इंतजार खत्म हुआ और उन्हें पहला ऑर्डर मिला. देवनी देवी ने पूरे मन से खाना तैयार कर ग्राहक तक पहुंचाया. इसके बाद धीरे-धीरे ऑर्डर्स बढ़ने लगे और उनका काम फिर से पटरी पर आ गया.

कोरोना में ठप पड़ा बिजनेस, 3 साल तक संघर्ष

कुछ ही समय में हालात ऐसे हो गए कि उनके घर के बाहर जोमैटो और स्विग्गी के डिलीवरी बॉय की लाइन लगने लगी. आसपास के लोगों को इससे परेशानी होने लगी और कई बार विवाद भी हुआ. लोगों ने उनसे सवाल किया कि आखिर वह ऐसा क्या काम करती हैं कि उनके यहां इतनी भीड़ लगती है. इन परिस्थितियों को देखते हुए देवनी देवी ने एक अलग जगह की तलाश की और अम्मा किचन के नाम से अपना रेस्टोरेंट शुरू किया. यह कदम उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ.

आज उनके रेस्टोरेंट से रोजाना जोमैटो और स्विग्गी के जरिए करीब 350 से ज्यादा ऑर्डर भेजे जाते हैं. उनका कारोबार अब इतना बढ़ चुका है कि उनकी सालाना कमाई डेढ़ से दो करोड़ रुपये के बीच पहुंच गई है. देवनी देवी के साथ आज 25 से 30 लोग काम कर रहे हैं. इनमें पांच महिलाएं भी शामिल हैं. वह अपने साथ काम करने वाले लोगों को परिवार की तरह मानती हैं और सभी मिलकर काम को आगे बढ़ा रहे हैं.

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क्लाउड किचन से नई शुरुआत, धीरे-धीरे बढ़े ऑर्डर

खास बात यह है कि इतनी सफलता मिलने के बाद भी देवनी देवी ने अपने काम करने का तरीका नहीं बदला. वह आज भी उसी सादगी और समर्पण के साथ खाना बनाती हैं, जैसे उन्होंने शुरुआत के दिनों में किया था. देवनी देवी का कहना है कि उनके यहां घर जैसा खाना मिलता है और वह बाजार के मुकाबले सबसे सस्ता भोजन देने की कोशिश करती हैं. यही वजह है कि उनके ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

उनकी यह कहानी न सिर्फ महिलाओं के लिए, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो छोटे स्तर से शुरुआत कर बड़ा मुकाम हासिल करना चाहता है. मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है, इसका जीता-जागता उदाहरण हैं देवनी देवी.

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