राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के भीतर एक बार फिर नेतृत्व, संगठन और चुनावी प्रदर्शन को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. हालिया संपन्न विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद पार्टी की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाए जा रहे हैं. रोहिणी आचार्य ने के बार फिर तेजस्वी यादव पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने नाम लिए बिना कहा, चुनावी परिणाम खुद यह बता रहे हैं कि लालू जी और पार्टी के लिए किसने क्या किया. रोहिणी ने कहा, 'चंद घटिया लोगों को लालू जी को नजरअंदाज कर सर्वेसर्वा बना दिया गया. उन लोगों ने पार्टी के लिए क्या किया?'
आयातित गुरुओं ने पार्टी को बर्बादी की कगार पर खड़ा कर दिया: रोहिणी आचार्य
रोहिणी आचार्य ने कहा कि जिन लोगों को पार्टी में अहम जिम्मेदारियां सौंपी गईं, उन्होंने अपने तथाकथित आयातित गुरुओं और उनके करीबियों के साथ मिलकर दशकों से पार्टी के लिए संघर्ष कर रहे समर्पित लालूवादियों के योगदान को नजरअंदाज कर दिया. उनका कहना है कि इन फैसलों ने पार्टी को मजबूत करने के बजाय उसे बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है.
रोहिणी आचार्य ने कहा, पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि यह सवाल पहले भी उठे थे, आज भी उठ रहे हैं और भविष्य में भी उठते रहेंगे. उन्होंने कहा कि अगर नेतृत्व में नैतिक साहस है, तो उसे खुले मंच पर इन सवालों का सामना करना चाहिए. उनका कहना है कि कौन ज्ञान दे रहा है और कौन ज्ञान देने की बात कर सच्चाई से मुंह चुरा रहा है, यह सार्वजनिक बहस से साफ हो जाएगा.
लालू की बेटी रोहिणी ने कहा, समीक्षा रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई, जबकि उसमें जिन लोगों की भूमिका पर सवाल खड़े हुए थे, उन पर कोई कार्रवाई भी नहीं हुई. इससे पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में गहरी निराशा और गुस्सा है. उनका कहना है कि यदि समय रहते पारदर्शिता नहीं लाई गई और जवाबदेही तय नहीं की गई, तो पार्टी का संगठनात्मक आधार और कमजोर हो सकता है.
क्या है रोहिणी का ट्वीट?
'लालू जी और पार्टी के लिए किसने क्या किया ये तो लोकसभा, हालिया संपन्न विधानसभा के चुनावी नतीजों और पार्टी की वर्त्तमान स्थिति से ही साफ है, जिसे जिम्मेदारी सौंपी गई उसने, उसके आयातित गुरु और उस गुरु के गुर्गों ने तो लालू जी व पार्टी के प्रति समर्पित हर एक लालूवादी के दशकों के संघर्ष एवं प्रयासों को धो- पोछ कर पार्टी को बर्बादी की कगार पर ला कर खड़ा कर दिया. सवाल पहले भी उठे थे, आज भी सवाल उठ रहे हैं, आगे भी उठेंगे. अगर नैतिक साहस है तो खुले मंच पर सवालों का सामना करने की हिम्मत जुटानी चाहिए, ज्ञान कौन दे रहा और ज्ञान देने की बात कर सच्चाई से मुंह कौन चुरा रहा, ये साफ हो जाएगा.'
जिन पर सवाल उठे उन पर कार्रवाई क्यों नहीं?
रोहिणी आचार्य ने अपने इसी पोस्ट में कहा, 'आज पार्टी के हर एक सच्चे कार्यकर्ता, समर्थक और हितैषी का सवाल है, जिन चंद घटिया लोगों को, लालू जी को नजरअंदाज कर, एक तरीके से सर्वेसर्वा बना दिया गया, उन लोगों ने पार्टी के लिए क्या किया? और समीक्षा के नाम किए गए दिखावे पर क्या कार्रवाई की गई? समीक्षा रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं सार्वजनिक की गई और समीक्षा रिपोर्ट में जिन लोगों पर सवाल उठे उन पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?'
राजद के भीतर उठती यह आवाजें साफ संकेत दे रही हैं कि चुनावी हार के बाद पार्टी केवल बाहरी चुनौतियों से ही नहीं, बल्कि अंदरूनी असंतोष से भी जूझ रही है. अब देखने वाली बात यह होगी कि पार्टी नेतृत्व इन सवालों को गंभीरता से लेकर कोई ठोस कदम उठाता है या फिर यह असंतोष और गहराता जाएगा.