बिहार के दरभंगा में फर्जी मोबाइल सिम के जरिए विदेश में बैठकर साइबर फ्रॉड करने वाले गिरोह का सनसनीखेज खुलासा हुआ है. साइबर थाना पुलिस ने इस मामले में फर्जी दस्तावेज के आधार पर सिम एक्टिव कर बिचौलियों के हाथों बेचने वाले सरगना विवेक कुमार को गिरफ्तार किया है. आरोपी के पास से 36 ब्लैंक सिम, दो मोबाइल, एक बायोमेट्रिक डिवाइस और कई लोगों के फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं.
शुरुआती जांच में सामने आया है कि अकेले कंबोडिया में 34 फर्जी सिम सक्रिय थे और इनका उपयोग साइबर फ्रॉड के लिए किया जा रहा था. इससे साफ है कि यह नेटवर्क देश ही नहीं, विदेश से भी भारतीय लोगों को ठगने में सक्रिय था. पुलिस का मानना है कि इस साइबर फ्रॉड रैकेट में कई लोग शामिल हैं.
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साइबर थाना पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है और पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है. इस मामले में विवेक की गिरफ्तारी पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है.
रैकेट में शामिल अन्य आरोपी
जांच में दो अन्य आरोपियों के नाम सामने आए हैं, जिनमें अभिषेक कुमार और रौशन झा शामिल हैं. पुलिस के अनुसार रौशन झा पहले से ही एक अन्य मामले में जेल में बंद है, जबकि अभिषेक फिलहाल फरार है और उसकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं.
बताया गया कि विवेक, रौशन और अभिषेक तीनों मोबाइल और सिम बेचने के साथ मोबाइल की दुकान भी चलाते थे. मुख्य आरोपी विवेक एक निजी कंपनी की सिम एक्टिव करने के साथ साइबर कैफे भी चलाता था और इसी की आड़ में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग लोगों के नाम पर सिम निकालता था.
पुष्टि करते हुए साइबर क्राइम थाना के डीएसपी बिपिन बिहार ने बताया कि विवेक फर्जी सिम एक्टिव कर बिचौलियों के जरिए विदेश भेजता था, जहां से इनका इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जाता था.
आर्थिक अपराध इकाई की सूचना पर कार्रवाई
डीएसपी ने बताया कि आर्थिक अपराध इकाई पटना से सूचना मिली थी कि दरभंगा में तीन सिम रिटेलर फर्जी दस्तावेजों पर सिम निकाल रहे हैं. सूचना मिलते ही पुलिस ने केवटी स्थित विवेक मोबाइल दुकान पर छापेमारी की.
छापेमारी में कंबोडिया से संचालित 34 सिम की जानकारी मिली और 36 ब्लैंक सिम, बायोमेट्रिक मशीन सहित अन्य संदिग्ध सामान बरामद किए गए. पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेक को गिरफ्तार कर लिया है.
विदेश भेजे जाते थे फर्जी सिम
पुलिस के अनुसार तीन सिम वेंडर विवेक मोबाइल, रौशन इंटरप्राइजेज और अभिषेक इंटरप्राइजेज इस रैकेट में शामिल थे. फर्जी दस्तावेजों के सहारे सिम एक्टिव कर बिचौलियों के माध्यम से विदेश भेजे जाते थे, जहां से साइबर फ्रॉड किया जाता था.
पुलिस अब रौशन झा को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी और फरार अभिषेक की तलाश जारी है. जांच जारी है और पूरे नेटवर्क के खुलासे की उम्मीद जताई जा रही है.