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बंद कारखानों को फिर से शुरू करने का सुनहरा मौका, BIADA एमनेस्टी पॉलिसी की डेडलाइन 31 मार्च तक बढ़ी

बिहार सरकार ने औद्योगिक गतिविधियों को रफ्तार देने के लिए BIADA एमनेस्टी पॉलिसी के तहत आवेदन की अंतिम तिथि तीन महीने बढ़ा दी है. अब बंद या विवादित औद्योगिक इकाइयों के संचालक 31 मार्च 2026 तक आवेदन कर सकेंगे.

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बिहार में बंद उद्योगों को नीतीश सरकार ने राहत दी है. (Photo: PTI)
बिहार में बंद उद्योगों को नीतीश सरकार ने राहत दी है. (Photo: PTI)

बिहार में औद्योगिक विकास को गति देने और लंबे समय से बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों को दोबारा चालू करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. बिहार इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (BIADA) की एमनेस्टी पॉलिसी के तहत आवेदन की अंतिम तिथि को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया है. अब बंद या विवादित औद्योगिक इकाइयों के संचालक 31 मार्च 2026 तक आवेदन कर सकेंगे.

इससे पहले आवेदन की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 तय की गई थी, लेकिन उद्योगपतियों और निवेशकों की मांग को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है. हालांकि, BIADA एमनेस्टी पॉलिसी की शर्तों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है.

क्या है BIADA एमनेस्टी पॉलिसी 2025?

BIADA एमनेस्टी पॉलिसी 2025 बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण की एक विशेष योजना है, जिसका मकसद वर्षों से बंद पड़ी या कानूनी विवादों में फंसी औद्योगिक इकाइयों को पुनर्जीवित करना है. इसके साथ ही लंबित बकाया राशि का निपटान कर औद्योगिक भूमि का बेहतर और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना भी इस पॉलिसी का उद्देश्य है.

इस पॉलिसी के तहत उद्योग संचालकों को ‘वन टाइम सेटलमेंट’ (OTS) की सुविधा दी जा रही है. इसके जरिए वे अपनी बकाया राशि का भुगतान कर जुर्माने से राहत पा सकते हैं और बंद पड़ी इकाइयों को फिर से शुरू कर सकते हैं. आवेदन की समय-सीमा बढ़ने से उन उद्योगों को भी मौका मिलेगा, जो पहले तय समय में आवेदन नहीं कर पाए थे.

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बकाया भुगतान पर जुर्माने से राहत

उद्योग विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस एमनेस्टी पॉलिसी से छोटे और बड़े, दोनों तरह के उद्योगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. बकाया राशि के भुगतान पर जुर्माने में छूट दी जा रही है, जिससे उद्योग संचालकों पर वित्तीय बोझ कम होगा.

हालांकि, आवेदन प्रक्रिया के तहत उद्योग संचालकों को तय शर्तों का पालन करना होगा. इसमें शपथ पत्र, बैंक गारंटी और निर्धारित प्रशासनिक शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा.

राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से बिहार में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘बिहार इंडस्ट्रियल संकल्प’ को मजबूती मिलेगी. साथ ही, इससे रोजगार सृजन और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे.

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