अगर आपने जेके रॉलिगं की फेमस सीरीज हैरी पॉटर पढ़ी है, या फिल्म भी देखी है तो आप आसानी से ये विश्वास कर लेंगे कि जनवरी की ठंडी रातों में जब चांद पूरा खिलता है, यानी पूर्णिमा होती है तो भेड़िये अपना आपा खो देते हैं. वो अपने मन पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं और आसमान की ओर चांद को देखते हुए जोर से चिल्लाना शुरू करते हैं. जिसे उनका हुंआ-हुंआ करना कहते हैं.
भेड़िये का चीखना एक अलग रहस्य और डर पैदा करता है. ये शेर की तरह दहाड़ते नहीं हैं और न ही गधे की तरह रेंकते हैं या हाथी की तरह चिंघाड़ते हैं. भेड़िये अपने आपे से बाहर होकर एक अलग ही भूतिया चीख पैदा करते हैं. ये आवाज वैसी ही होती है, जैसे कि आपने कभी किसी को डराने के लिए यूं ही 'हू....' की लंबी आवाज निकाली होगी.
भेड़िया की आवाज और नकारात्मक शक्तियों का जागरण
भेड़िये का इस तरह हुआना नकारात्मक शक्तियों के आह्नान का तरीका मान लिया जाता है. इसलिए भारतीय मिथकों-मान्यताओं और यहां तक कि ज्योतिष में भी इसके नकारात्मक असर की बात कही गई है. चंद्रमा की पूर्णिमा तिथि, जिसमें माना जाता है कि चंद्रमा अपनी 16 कलाओं के साथ मौजूद रहता है, सिर्फ सफेद प्रकाश से भरी चांदनी रात नहीं होती है, बल्कि ये अपने साथ कई तरह के रहस्य और मान्यताएं भी ले आती है.

मन पर असर डालती है चांदनी रात
वेदों में कहा गया है, 'चंद्रमा मनसो जात:' यानी चंद्रमा का जन्म मन से हुआ है, वह जल तत्व का भी प्रतीक है. इसलिए पूर्णिमा के दिन चंद्रमा मन को विचलित करता है. वह जल तत्व में उथल-पुथल पैदा करता है, इसलिए समुद्र में ज्वार आते हैं और मन में उफान... भेड़िए जल तत्व के प्रतीक माने जाते हैं, इसलिए पूर्णिमा की रात में सबसे अधिक उथल-पुथल का शिकार वही होते हैं. इसलिए मानसिक रूप से परेशान लोगों को शुक्ल पक्ष में अधिक ध्यान रखने की जरूरत होती है. इस बात को ज्योतिष भी मानता है और प्राचीन आयुर्वेद भी.
खैर... भेड़िये पर लौटते हैं.
सर्दियों की गहरी रातों में जब आसमान अपनी पूरी चमक के साथ जगमगाता है, तब जनवरी की पूर्णिमा केवल एक खगोलीय घटना नहीं रह जाती, यह आत्मा और प्रकृति के बीच संवाद का मौका बन जाती है. इसी पूर्णिमा को दुनिया भर में 'वुल्फ मून' कहा जाता है. ज्योतिष और आध्यात्मिक परंपराओं में यह चंद्र पर्व भीतर झांकने, पुराने बोझ छोड़ने और नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने का संकेत माना जाता है.
ठंड की सन्नाटे भरी रात, और भेड़िये का हुआना
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, जनवरी के ठंडे और बर्फीले दिनों में भेड़िए भोजन की तलाश में मानव बस्तियों के पास आ जाते थे. रात के सन्नाटे में उनकी हूक उनकी सामूहिक आवाज अक्सर सुनाई देती थी. यही कारण है कि इस पूर्णिमा को 'वुल्फ मून' कहा जाने लगा. धीरे-धीरे यह नाम केवल लोककथा नहीं रहा, बल्कि भेड़िए की जंगली, सहज और साहसी प्रकृति के प्रतीक के रूप में आध्यात्मिक अर्थ भी ग्रहण करता गया.
वुल्फ मून के संदर्भ में भेड़िया केवल एक जानवर नहीं, बल्कि एक 'स्पिरिट एनिमल' के रूप में देखा जाता है जो इंसान के भीतर छिपी शक्तियों से जोड़ता है. ज्योतिष के नजरिये से यह पूर्णिमा तब घटित होती है जब सूर्य मकर राशि की ओर बढ़ रहा होता है और चंद्रमा कर्क राशि में होता है. यह संयोग जीवन के दो अहम पक्षों को व्यावहारिकता और संवेदनशीलता के बीच बैलेंस लेकर आता है.
मकर का सूर्य हमें लक्ष्य, अनुशासन और जमीन से जुड़े रहने की ऊर्जा देता है. यह नए साल के लिए ठोस संकल्प और योजनाएं बनाने का समय है. कर्क चंद्रमा भावनाओं, स्मृतियों और आत्म-सुरक्षा से जुड़ा है. यह स्वयं की देखभाल, भावनात्मक उपचार और अपनापन महसूस करने की प्रेरणा देता है.
नॉर्स पौराणिक कथाओं में भेड़िया
भेड़िये को लेकर दुनिया भर में ये मान्यताएं नॉर्स पौराणिक कथाओं से अधिक आई हैं. इस कहानी में स्कॉल और हाती नाम के दो भेड़िये हैं जो सूर्य और चंद्रमा के पीछे लगातार दौड़ रहे हैं. हाती धरती के भेड़ियों का मुखिया है और वह पूर्णिमा की रात को एक ऊंची पहाड़ी पर चढ़कर सभी भेड़ियों को पुकारता है. उसकी हाउल (हूक) सुनकर धरती के भेड़िए भी समर्थन में हूक पैदा करते हैं.

रेग्नारॉक यानी समुद्री प्रलय की कहानी
पौराणिक कथा के मुताबिक स्कॉल और हाती ने सूर्य और चंद्रमा को निगल लिया था. उनका पिता फेनरिर देवताओं के प्रधान ओडिन को भी निगल जाता है और इस तरह सामने आती है रेग्नारॉक की कथा, यानी धरती के विनाश की कथा, जिसमें सारी धरती समुद्र में डूब जाती है. इस विनाश से उबरने के बाद सभ्यता नए सिरे से जन्म लेती है और जीवन फिर से पनपता है. इस तरह भेड़िया पूर्णिमा के साथ जीवन के उथल-पुथल का प्रतीक बन जाता है.
भारतीय ज्योतिष, राहु और भेड़िया
भारतीय ज्योतिष और पौराणिक वर्णन में राहु की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. हालांकि राहु एक असुर है भेड़िया नहीं, लेकिन भेड़िये को राहु से जोड़कर जरूर देखा जाता है. वह राहु का प्रतीक है और नकारात्मक शक्तियों का भी जो सीधे मन पर असर डालती हैं. इसलिए जनवरी की रात में आने वाली पूर्णिमा कई मान्यताओं के साथ भेड़ियों के साथ जुड़ जाती है और वुल्फ मून कहलाती है.