अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपने संबंधों को लेकर एक बार फिर बयान दिया है. ट्रंप ने कहा कि नेतन्याहू और उनके बीच मजबूत संबंध हैं, लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कई बार उन्हें नेतन्याहू को थोड़ा संतुलित रखना पड़ता है. ट्रंप ने कहा कि उन्हें नेतन्याहू को 'थोड़ा समझदारी से काम लेने' के लिए टोकना पड़ता है.
एक्सियोस (Axios) के पत्रकार मार्क कैपुटो को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में ट्रंप ने यह टिप्पणी ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान और मध्य पूर्व में इजरायल की भविष्य की सैन्य रणनीति पर चर्चा के दौरान की. जब कैपुटो ने नेतन्याहू के साथ उनके संबंधों के बारे में पूछा, तो ट्रंप ने जवाब दिया, 'रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन हमें उन्हें थोड़ा संतुलित रखना पड़ता है.' ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ईरान के साथ संघर्ष के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है.
यह भी पढ़ें: मेलोनी पर ट्रंप के दिए बयान से भड़का इटली, विदेश मंत्री ने रद्द किया अमेरिकी दौरा
इसे वॉशिंगटन और यरुशलम के बीच संबंधों पर ट्रंप के प्रभाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. डोनाल्ड ट्रंप ने आगे दावा किया कि वह इजरायल को पड़ोसी देशों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई बढ़ाने से रोक सकते हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इजरायल को लेबनान पर हमला करने से रोक पाएंगे, तो उन्होंने कहा, 'हां, मैं रोक दूंगा.' उन्होंने आगे कहा, 'वह (नेतन्याहू) मेरा बहुत सम्मान करते हैं और वही करते हैं जो मैं कहता हूं.'
मैं नहीं होता तो इजरायल तबाह हो जाता: ट्रंप
इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने बार-बार यह दावा किया कि ईरान के साथ हालिया संघर्ष में उन्होंने ही इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित की. ट्रंप ने कहा कि अपने पहले कार्यकाल में 2015 के ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर निकालने का उनका फैसला तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने में अहम साबित हुआ और इससे इजरायल को संभावित बड़े खतरे से बचाया गया. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'अगर मैं नहीं होता, तो इजरायल तबाह हो चुका होता.' उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ उनकी नीतियों के बिना आज इजरायल का अस्तित्व नहीं होता.
यह भी पढ़ें: 'शांत रहो, दिमाग से काम लो...', ट्रंप ने बताया सीजफायर को कैसे तैयार हुए नेतन्याहू
ट्रंप ने हालिया ईरान विरोधी सैन्य अभियानों के दौरान नेतन्याहू के साथ करीबी तालमेल का भी जिक्र किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इस अभियान में अमेरिका की भूमिका सबसे बड़ी थी. अमेरिकी सैन्य ताकत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'हमारे पास हथियार हैं. पूरा नियंत्रण हमारे पास है.' ट्रंप की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब वह खुद को एक मजबूत वैश्विक नेता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को प्रभावित करने और सहयोगी देशों की नीतियों को दिशा देने की क्षमता रखता है.
aajtak.in