'शहबाज ने साफ-साफ कहा था...', सीजफायर के बाद भी लेबनान पर हमले, बिफरा ईरान

लेबनान पर इजरायली हमलों ने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम समझौते को नाजुक दौर में पहुंचा दिया है. पाकिस्तान की मध्यस्थता में वार्ता जारी है, लेकिन ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर लेबनान पर हमले जारी रहे तो यह संघर्षविराम समझौते का उल्लंघन होगा और ऐसी स्थिति में कड़ा जवाब दिया जाएगा.

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ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद-बगेर गालिबफ. (Photo: Reuters) ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद-बगेर गालिबफ. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • तेहरान,
  • 09 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:44 PM IST

मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात के बीच ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि लेबनान को अमेरिका के साथ हुए किसी भी संघर्षविराम समझौते से अलग नहीं रखा जा सकता. ईरान ने साफ संकेत दिया है कि क्षेत्र में कोई भी दीर्घकालिक शांति समझौता तभी संभव होगा जब लेबनान को भी उसमें शामिल किया जाए. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर गालिबफ ने गुरुवार को दो टूक कहा कि इस मुद्दे पर न तो इनकार की गुंजाइश है और न ही पीछे हटने की. गालिबफ ने अपने बयान में जोर देते हुए कहा कि लेबनान और पूरा 'रेजिस्टेंस एक्सिस' ईरान के रणनीतिक सहयोगी हैं और उन्हें संघर्षविराम के दायरे से बाहर रखना असंभव है.

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'रेजिस्टेंस एक्सिस' ईरान के नेतृत्व वाला एक सैन्य गठबंधन है जो पश्चिम एशिया में सक्रिय है. गालिबफ ने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने  वार्ता के दौरान लेबनान के मुद्दे को सार्वजनिक और स्पष्ट रूप से उठाया था. शहबाज शरीफ ने दोनों देशों के बीच दो सप्ताह के अस्थायी संघर्षविराम को लेकर किए अपने X पोस्ट में भी लेबनान का जिक्र किया था. गा​लिबफ ने चेतावनी दी कि अगर संघर्षविराम का उल्लंघन हुआ तो उसकी बड़ी कीमत चुकानी होगी और ईरान की ओर से कड़ा और प्रभावी जवाब दिया जाएगा.

यह भी पढ़ें: 'रूस, चीन तो सीक्रेटली खुश हैं...', पाकिस्तानी पत्रकार ने बता दी ईरान सीजफायर डील की हकीकत

यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल ने संघर्षविराम लागू होने के बावजूद लेबनान में तीव्र और घातक हमले किए हैं. इजरायल का दावा है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के संघर्षविराम समझौते का लेबनान हिस्सा नहीं है. वहीं, अमेरिका ने भी इजरायल के रुख का समर्थन करते हुए कहा है कि ईरान ने समझौते की शर्तों को गलत तरीके से समझा है. वहीं, कई यूरोपीय देशों का मानना है कि लेबनान को इस समझौते में शामिल किया जाना चाहिए था, जिससे विवाद और गहरा गया है.

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इस बीच, ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने खुलासा किया कि बीती रात स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी और ईरान संघर्षविराम उल्लंघन का जवाब देने के करीब पहुंच गया था. हालांकि, पाकिस्तान के हस्तक्षेप के बाद हालात को संभाला गया. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने ईरान तक अमेरिका के संदेश पहुंचाए, जिसमें इजरायल को रोकने के प्रयासों की जानकारी दी गई. सूत्रों के मुताबिक, ईरान का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद रवाना होगा, जहां अमेरिका के साथ संघर्षविराम की शर्तों और स्थायी शांति के मुद्दे पर चर्चा होगी.

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