UAE विदेशी कंपनियों को देगा 'नागरिकता', भारतीय फर्मों को कितना फायदा होगा?

यूएई ने अपने कमर्शियल कंपनी कानून में बदलाव कर कंपनियों को आधिकारिक कॉरपोरेट नागरिकता देने का प्रावधान लागू किया है. इस नियम से कंपनियों को यूएई की कंपनी के रूप में मान्यता मिलेगी, लेकिन मालिकों को नागरिकता नहीं दी जाएगी.

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यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान ने विदेशी कंपनियों को सौगात दी है (File Photo: Reuters) यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान ने विदेशी कंपनियों को सौगात दी है (File Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:43 PM IST

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अपने कमर्शियल कंपनी कानून में एक अहम बदलाव किया है. इस बदलाव के तहत देश में स्थापित कंपनियों को आधिकारिक रूप से 'कॉरपोरेट नागरिकता' का दर्जा दिया जाएगा. लेकिन यह नागरिकता केवल कंपनी को मिलेगी, उसका मालिक या निवेशक यूएई का नागरिक नहीं बनेगा. कानून के तहत कॉरपोरेट नागरिकता मिलने के बाद कंपनी को यूएई की कंपनी के रूप में मान्यता मिलेगी.

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यूएई के अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री के अनुसार, यह प्रावधान यूएई में कहीं भी स्थापित कंपनियों पर लागू होगा.

अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से यूएई में ग्लोबल कॉरपोरेट प्रैक्टिस लागू हो जाएंगी. जैसे जर्मनी में रजिस्टर्ड कोई कंपनी जर्मन कंपनी मानी जाती है, उसी तरह यूएई में रजिस्टर्ड कंपनियों को कानूनन अमीराती कंपनी के रूप में पहचाना जाएगा.

कंपनी को मिलेगी नागरिकता, उसके मालिक को नहीं

इस कानून को लेकर लोगों के मन में भ्रम पैदा हो रहा है कि कंपनी को अगर नागरिकता मिल गई तो उसके मालिक को भी यूएई का नागरिक मान लिया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं है.

यह प्रावधान किसी भी कंपनी के मालिक, शेयरधारक या निवेशक को यूएई की नागरिकता नहीं देता. अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री ने साफ किया कि कानून के तहत 'राष्ट्रीयता' केवल कंपनी को ही मिलेगी.

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कंपनियों को क्या फायदा होगा?

यह नियम यूएई में गठित सभी प्रकार की कंपनियों पर लागू होगा. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कानून के तहत अगर किसी विदेशी कंपनी को अमीराती कंपनी के रूप में मान्यता मिल जाती है तो इससे कई बड़े फायदे होंगे जैसे-

वैश्विक पहचान मजबूत होगी- आधिकारिक तौर पर यूएई कंपनी के रूप में पहचाने जाने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कंपनी का भरोसा और साख बढ़ेगी.

व्यापार समझौतों का लाभ- यूएई ने कई देशों के साथ व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते किए हैं. इन समझौतों के तहत कंपनियों को टैरिफ में छूट और सीमा पार व्यापार में आसानी मिल सकती है.

स्थानीय प्रोत्साहन- अमीराती दर्जा मिलने के बाद कंपनियां स्थानीय सरकारों की तरफ से घरेलू कंपनियों को दिए जाने वाले प्रोत्साहन, सहायता कार्यक्रमों और सेक्टर आधारित पहलों का लाभ उठा सकेंगी.

सरकार का मानना है कि इससे कंपनियां वैश्विक स्तर पर विस्तार कर पाएंगी और साथ ही यूएई की अर्थव्यवस्था से उनका जुड़ाव भी मजबूत रहेगा.

वैश्विक निवेश को आकर्षित करने की कोशिश

यूएई में हाल के वर्षों में कारोबारी गतिविधियों में तेजी से वृद्धि की है और बड़ी संख्या में नई कंपनियां रजिस्टर हुई हैं. सरकार का कहना है कि यह कानूनी बदलाव इसी विकास को समर्थन देने के लिए लाया गया है, ताकि कंपनियों की जड़ें यूएई में और मजबूत हों और वे वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें.

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अमीराती कंपनी के रूप में आधिकारिक मान्यता मिलने से यूएई आधारित फर्मों को व्यापार समझौतों का बेहतर लाभ उठाने, निवेश आकर्षित करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मुकाबला करने में आसानी होगी. इस कदम से यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान यूएई की छवि एक वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में और मजबूत करने की कोशिश में हैं.

भारतीय कंपनियों को होगा फायदा

भारत की सैकड़ों कंपनियां अच्छे बाजार की तलाश में हर साल यूएई का रुख करती हैं. यूएई के सबसे बड़े शहर और बिजनेस हब दुबई में बिजनेस के लिए तीन चैंबर बनाए गए हैं जिनमें से एक दुबई चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ने पिछले महीने बताया था कि चैंबर से जुड़ने में भारतीय कंपनियां टॉप पर हैं.

चैंबर के मुताबिक, 2025 के पहले 9 महीने में चैंबर से 13,851 भारतीय कंपनियां जुड़ीं. इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि यूएई के नए नियम से भारत की इन कंपनियों को लाभ होगा.

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