दो नहीं अब पाकिस्तानी मांग रहे तीन नोबेल, जानिए शहबाज-मुनीर के अलावा कौन है ये तीसरा 'पीसमेकर'

पाकिस्तान की पंजाब असेंबली में पीएम शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार देने का प्रस्ताव पेश किया गया है. प्रस्ताव के अनुसार, इन नेताओं ने अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है.

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  पाकिस्तान की पंजाब विधानसभा ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए तीन नाम भेजे हैं (Photo: Reuters) पाकिस्तान की पंजाब विधानसभा ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए तीन नाम भेजे हैं (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:24 PM IST

भारत में आतंकवाद फैलाने वाला पाकिस्तान ईरान जंग को लेकर इस कदर अपनी तारीफों के पुल बांधने में लगा है कि खुद को वैश्विक पीसमेकर बता रहा है. इतना ही नहीं पाकिस्तान की तरफ से अब एक नहीं बल्कि अपने तीन लोगों को नोबेल देने की मांग की जा रही है.   

दरअसल, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की विधानसभा में एक ऐसा प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार को 'नोबेल शांति पुरस्कार' के लिए नामांकित करने की सिफारिश की गई है.

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यह प्रस्ताव पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के चीफ व्हिप राणा मोहम्मद अरशद द्वारा सदन में रखा गया. प्रस्ताव के पाठ के अनुसार, सदन ने देश के नेतृत्व की "प्रभावी कूटनीति" की सराहना की है.

प्रस्ताव में कहा गया है कि इन नेताओं के प्रयासों ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता का मार्ग प्रशस्त किया है. प्रस्ताव में विशेष रूप से इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का उल्लेख किया गया है, जो वैश्विक शांति के लिए एक गंभीर खतरा बन गया था. असेंबली का मानना है कि पाकिस्तान के इन तीनों शीर्ष नेताओं ने इस अंतरराष्ट्रीय संकट को टालने और युद्धविराम  कराने में 'प्रमुख भूमिका' निभाई है.

यह भी पढ़ें: ट्रंप युद्ध लड़ रहे, मुनीर-शहबाज आतंक फैला रहे... लेकिन चाहिए सबको 'शांति का नोबेल'!

शांतिप्रिय राष्ट्र की छवि
पंजाब असेंबली ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान ने एक शांतिप्रिय देश के रूप में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भीतर एक रचनात्मक, संतुलित और सकारात्मक भूमिका निभाई है. प्रस्ताव में सर्वसम्मति से मांग की गई है कि इन प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाए और इनके लिए नोबेल शांति पुरस्कार हेतु औपचारिक नामांकन भेजा जाए.

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यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान खुद गहरे आर्थिक और राजनीतिक संकटों से जूझ रहा है, लेकिन सत्ताधारी दल इसे वैश्विक शांति दूत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है. यदि यह नामांकन औपचारिक रूप से स्वीकार किया जाता है, तो यह पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि साबित हो सकता है.

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