इस्लामाबाद की एक आतंकवाद विरोधी अदालत ने सोमवार को खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री मोहम्मद सोहेल अफरीदी और पाकिस्तान तेहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के 24 अन्य विधायकों के पासपोर्ट ब्लॉक करने का आदेश दिया है. ये आदेश राजधानी के एक पुलिस थाने में दर्ज मामले से जुड़ा है.
जज अबुल हसनात मुहम्मद जुल्करनैन ने पुलिस की अर्जी स्वीकार करते हुए फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) को अगले आदेश तक इन सभी नेताओं के पासपोर्ट ब्लॉक रखने का निर्देश दिया है. अदालत का ये फैसला ऐसे वक्त में आया है, जब PTI की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. क्योंकि पार्टी ने 27 सितंबर को देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया है. जबकि पीटीआई के नेताओं और समर्थकों पर विरोध-प्रदर्शनों और सरकार संस्थानों के खिलाफ कथित हिंसा से जुड़े कई मामले चल रहे हैं.
अदालत के इस आदेश के दायरे में वरिष्ठ पीटीआई नेता और नेशनल असेंबली के पूर्व स्पीकर असद कैसर भी शामिल हैं. उनके अलावा सांसद शहराम खान तरकई, शाह अहमद, शेर अली अरबाब, मुहम्मद इकबाल अफरीदी, डॉ. अमजद अली, जुनैद अकबर, शाहिद खट्टक, जुबैर वजीर, अरशद उमरज़ई, जर आलम, मियां उमर और अख्तर खान के नाम भी इस लिस्ट में हैं. अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से साफ है कि इन सभी व्यक्तियों को मामले में आरोपी बनाया गया है.
जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि आरोपी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए देश छोड़कर भाग सकते हैं. उन्होंने दलील दी कि इन नेताओं पर सरकारी संस्थानों पर हमले और आतंकवाद को बढ़ावा देने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. पुलिस की दलील के बाद अदालत ने गौर किया कि आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुए हैं और जिन लोगों को अंतरिम जमानत मिली थी, वह नेता भी अब तक जांच में शामिल नहीं हुए हैं. इसके बाद अदालत ने पुलिस के अनुरोध को मंजूरी दे दी और FIA को अगले आदेश तक पासपोर्ट ब्लॉक रखने का आदेश दिया.
दूसरी तरफ 27 सितंबर के प्रदर्शन के लिए समर्थन जुटाने पंजाब के दौरे पर निकले मुख्यमंत्री अफरीदी ने सोमवार को पंजाब पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस ने उनका अपहरण करने की कोशिश की और मारपीट व दुर्व्यवहार के बाद उन्हें सड़क किनारे छोड़ दिया. अफरीदी ने कहा कि पंजाब पुलिस को इस हरकत का जवाब देना होगा, ये कोई मजाक नहीं है.
अफरीदी ने एक प्रांत के मुख्यमंत्री के साथ दूसरे प्रांत की पुलिस द्वारा किए गए इस बर्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है. उन्होंने पंजाब सरकार से इस मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की कि उनके साथ दुर्व्यवहार कर उन्हें सड़क किनारे क्यों छोड़ा गया.
अदालत के इस आदेश और अफरीदी के इन आरोपों ने पीटीआई के 27 सितंबर के प्रदर्शन से पहले राजनीतिक माहौल को काफी गरमा दिया है.
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