'हालात और न बिगाड़ें, MoU का पालन करें', पाकिस्तान-कुवैत की अमेरिका और ईरान से अपील

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच फिर सैन्य टकराव तेज हो गया है. इस बीच पाकिस्तान और कुवैत ने दोनों देशों से पिछले महीने हुए 'इस्लामाबाद एमओयू' का सम्मान करने और तनाव कम करने की अपील की है. वहीं, ईरान ने अमेरिका पर समझौता तोड़ने का आरोप लगाते हुए साफ कर दिया कि वह अब एमओयू के तहत किए गए अपने वादों का पालन नहीं करेगा.

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पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबा. (Photo: Reuters) पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबा. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • इस्लामाबाद,
  • 18 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:42 PM IST

 स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ने के बीच पाकिस्तान और कुवैत ने दोनों देशों से पिछले महीने हुए शांति समझौते (MoU) का पालन करने और हालात को और न बिगाड़ने की अपील की है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री इशाक डार ओर कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबा के बीच शनिवार को टेलीफोन पर बातचीत हुई. इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के ताजा घटनाक्रम पर चर्चा की.

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यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब शनिवार को अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे के सैन्य और बुनियादी ढांचे से जुड़े ठिकानों पर नए हमले किए. होर्मुज को लेकर दोनों देशों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है. कुवैत के विदेश मंत्री ने बातचीत के दौरान अपने देश पर हुए हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई और सभी पक्षों से संयम बरतने तथा एमओयू को पूरी तरह लागू करने की अपील की. हालिया हमलों में कुवैत भी प्रभावित हुआ है. ईरानी हमलों में वहां के एक डीसैलिनेशन (समुद्री जल शुद्धिकरण) संयंत्र और एक तेल सुविधा को नुकसान पहुंचा है.

इसके चलते कुवैत को अस्थायी रूप से अपना हवाई क्षेत्र बंद करना पड़ा और कई उड़ानें भी प्रभावित हुईं. इशाक डार ने क्षेत्र में तत्काल तनाव कम करने की जरूरत पर जोर देते हुए सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की अपील की. उन्होंने 'इस्लामाबाद एमओयू' के तहत किए गए युद्धविराम संबंधी वादों का पालन करने की आवश्यकता भी दोहराई. बता दें कि पिछले महीने अमेरिका और ईरान ने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के उद्देश्य से 'इस्लामाबाद एमओयू' पर हस्ताक्षर किए थे. 

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इस समझौते में पाकिस्तान ने गारंटर की भूमिका निभाई थी. समझौते के तहत तकनीकी स्तर की वार्ता के लिए 60 दिनों की समयसीमा तय की गई थी, लेकिन ताजा सैन्य हमलों के बाद यह प्रक्रिया पटरी से उतरती नजर आ रही है. ईरान ने साफ-साफ कह दिया है वह इस समझौते के किसी भी नियम को मान्यता नहीं देता. ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि असल में अमेरिका ने सभी वादों को तोड़ा है और एमओयू को पूरी तरह से बेकार साबित कर दिया है. इसके जवाब में हमने भी अपने सभी वादों पर अमल बंद कर दिया है, अब हम उन वादों को पूरा नहीं कर रहे हैं.

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