नेपाल के चिलीमे जलविद्युत परियोजना में बचाव अभियान जारी है, जहां 6 कर्मचारियों के सुरंग के अंदर फंसे होने की आशंका है. भारत और नेपाल की टीमें मिट्टी और मलबा हटाने और भूमिगत पावरहाउस की ओर बढ़ने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल कर रही हैं.
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने शनिवार को एक अपडेट में बताया कि सुरंग में एक्सकेवेटर, लोडर और बॉबकैट लाए जाने के बाद अभियान में तेज़ी आई. उन्होंने कहा कि तकनीकी टीम ने लगभग 70 मीटर और रास्ता साफ कर लिया है.
प्रोजेक्ट मैनेजर के अनुसार, पावरहाउस सुरंग में लगभग 60 मीटर और आगे है. श्रीवास्तव ने कहा कि बचाव दल वहां तक पहुंचने के लिए रात भर काम करते रहे.
अधिकारियों के अनुसार, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन ने बचाव स्थल तक जाने के लिए सड़क भी तैयार कर ली है.
इसके अलावा, नेपाल की सेना ने कहा कि उसने स्याफ्रुबेसी से चिलीमे सुरंग की ओर एक किलोमीटर से अधिक लंबी सड़क बनाई है, जिससे बचाव उपकरण घटनास्थल के करीब ले जाए जा सकें.
रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाली सेना और भारतीय बचाव कर्मी चिलीमे सुरंग के अंदर मिलकर काम कर रहे हैं.
बताया जा रहा है कि सेना ने अपर त्रिशूली-3B जलविद्युत परियोजना में भी बचाव कार्यों को प्राथमिकता दी है, जहां सेना के 100 से अधिक जवानों को तैनात किया गया है.
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमस्खलन से आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया, जिसमें लगभग 1,400 लोग मारे गए, जबकि 5,000 से अधिक लोग लापता हैं.
हिमालयी सीमा क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी बाढ़ का पानी निचले इलाकों में ले गई, जिससे घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए और जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा.
aajtak.in