नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में भीषण बाढ़ से भारी तबाही देखने को मिली है. नेपाल में आए इस विनाशकारी फ्लैश फ्लड में 392 लोगों की मौत हो चुकी है और 1500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं. बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों का परिवहन और संपर्क ढांचा भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं, जिससे कई इलाकों का संपर्क बाधित हो गया है.
इस घटना में 13 जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है और कई वाहन तेज बहाव की चपेट में आ गए. नेपाल सेना ने प्रभावित इलाकों से 250 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला है. नेपाल में कई लोग अब भी लापता हैं. इनमें कई भारतीय नागरिक भी शामिल हैं.
इस बीच, नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार में भी प्रशासन अलर्ट पर है. गंडक, नारायणी और कोसी नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है. यूपी के महाराजगंज और कुशीनगर समेत बिहार के संवेदनशील इलाकों में प्रशासन को अलर्ट किया गया है.
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गृह मंत्रालय समेत कई केंद्रीय मंत्रालय लगातार स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. बिहार के 6 जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं.
वहीं, पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात कर हर संभव मदद का भरोसा दिया है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस मुश्किल घड़ी में भारत के लोग नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़े हैं.
त्रिशूली हाइड्रोपावर के टनल में फंसे 350 मजदूरों और कर्मचारियों को नेपाली सेना की टीम ने रेस्क्यू किया है. इस हाइड्रोपावर में कई भारतीय मजदूर भी काम कर रहे थे जिनके संपर्कविहीन होने की बात भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी की थी. अब नेपाली सेना के तरफ से इस टनल में फंसे सभी मजदूरों का रेस्क्यू कर लिया है.
नेपाल में आई बाढ़ का सीधा असर अब भारत-नेपाल अंतर-राष्ट्रीय बस सेवा पर भी पड़ा है. नेपाल में भारी फ्लैश फ्लड के चलते सड़क परिवहन पूरी तरह ठप हो गया है. इसे देखते हुए दिल्ली सरकार और दिल्ली परिवहन निगम ने एहतियातन 'भारत-नेपाल मैत्री बस सेवा' को अगले दो दिनों के लिए रोक दिया है. दिल्ली परिवहन निगम (DTC) ने गुरुवार को बताया कि नेपाल में नेशनल हाइवे और दिल्ली-काठमांडू मार्ग पर आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है. सुरक्षा के लिहाज से DTC ने 28 अगस्त 2026 को दिल्ली से काठमांडू जाने वाली बस यात्रा को रोक दिया है. इसके साथ ही 28 अगस्त को ही काठमांडू से दिल्ली आने वाली वापसी यात्रा को भी रद्द कर दिया गया है. वहीं, 29 अगस्त को दिल्ली से काठमांडू जाने वाली नेपाली बस की सेवा को भी फिलहाल स्थगित रखा गया है.
नेपाल बाढ़ में महाराष्ट्र के कम से कम 114 पर्यटकों के वहां फंसे होने की आशंका है. महाराष्ट्र आपदा प्रबंधन विभाग और राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) के मुताबिक, इनमें से 53 पर्यटकों के 'सागा मानसरोवर' क्षेत्र में सुरक्षित होने की पुष्टि हो चुकी है. बाढ़ में फंसे 114 लोगों में से लगभग 61 पर्यटक 'रिचा टूल्स प्राइवेट लिमिटेड' नाम की ट्रैवल एजेंसी के जरिए यात्रा पर गए थे, जबकि बाकी लोग व्यक्तिगत रूप से नेपाल पहुंचे थे. SEOC ने बताया कि वह इस टूर एजेंसी और नई दिल्ली स्थित गृह मंत्रालय के इमरजेंसी कंट्रोल रूम से लगातार संपर्क बनाकर पल-पल की जानकारी जुटा रहा है.
बालेन शाह ने गुरुवार शाम सोशल मीडिया के जरिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और जारी राहत कार्यों की जानकारी दी. उन्होंने नुवाकोट पहुंचकर बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों का खुद जायजा लिया. इस दौरान बालेन शाह ने प्रभावित नागरिकों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सुरक्षाकर्मियों, डॉक्टरों और राहत कार्य में जुटी टीमों से सीधा बात करके जमीनी हकीकत जानी. निरीक्षण के बाद काठमांडू लौटे प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा, 'स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. राज्य के सभी प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र अपनी पूरी क्षमता के साथ मैदान में तैनात हैं.'
नेपाल में आई बाढ़ के कारण 290 भारतीय नागरिकों से फिलहाल कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिनकी तलाश के प्रयास जारी हैं. दूसरी ओर, राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों ने सफलता हासिल करते हुए 84 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया है. रेस्क्यू किए गए लोगों में त्रिशूली-I प्रोजेक्ट में फंसे 63 वर्कर और तमिलनाडु के रहने वाले 21 लोग शामिल हैं. प्रशासन संपर्क से बाहर चल रहे बाकी नागरिकों का तेजी से पता लगाने में जुटा है.
नेपाल सरकार के प्लेनेट लैब्स और लैंडसैट की सैटेलाइट तस्वीरों विश्लेषण से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, रसुवागढ़ी सीमा से लगभग 18 किलोमीटर ऊपर लेंडे नदी का बहाव पूरी तरह बंद हो गया है. इस रुकावट के कारण तटीय क्षेत्र में लगभग 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक बड़ी अस्थायी झील बन गई है. नेपाल सरकार ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इस प्राकृतिक झील का बांध टूटने से निचले इलाकों में अचानक भीषण बाढ़ आने का बड़ा खतरा बना हुआ है. प्रशासन ने नदी के निचले तटीय क्षेत्रों में रहने वाले सभी निवासियों और संबंधित अधिकारियों को बहुत सावधानी बरतने और हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है.
नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 359 हो गई है. पुलिस ने बताया कि बचावकर्मियों को प्रभावित जिलों से और लाशें मिलने के बाद नेपाल में आई भयानक अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 359 हो गई है. तिब्बत से शुरू हुई ये भयानक अचानक आई बाढ़ बुधवार को मध्य नेपाल में फैल गई, जिससे कई शहर और गांव तबाह हो गए, जरूरी पुल बह गए और एक दर्जन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट ठप हो गए। यह बाढ़ नीचे की ओर तेजी से बह रही थी और कई जिलों पर असर डाल रही थी. नेपाल सेना और दूसरी सुरक्षा एजेंसियां बाढ़ प्रभावित जिलों, जिनमें रसुवा, धाडिंग, नुवाकोट और चितवन शामिल हैं, में खोज और बचाव अभियान जारी रखे हुए हैं. नेपाली पुलिस के प्रवक्ता अबी नारायण काफले के मुताबित, चितवन जिले से सबसे ज्यादा 132 लाशें बरामद की गई हैं.
नेपाल बाढ़ पर महाराष्ट्र की सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, 'अभी तक महाराष्ट्र के कितने पर्यटक नेपाल में फंसे हैं, इसका आंकड़ा सामने नहीं आया है. हमारी संवेदनाएं सभी पर्यटकों के साथ हैं. राहत और पुनर्वास मंत्री गिरीश महाजन लगातार फंसे हुए लोगों के परिजनों के संपर्क में हैं. जो लोग वहां फंसे हैं, उन्हें वापस लाने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं. कुछ लोग नेपाल से अलग-अलग रास्तों से वापस आना चाहते हैं, उन्हें भी हम मदद कर रहे हैं. महाराष्ट्र सरकार अलर्ट मोड पर है.'
नेपाल-तिब्बत इलाके में आई भयानक बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए प्रार्थना करने के लिए 2,000 से ज्यादा तिब्बती लोग तिब्बती मंदिर, त्सुगलागखांग में जमा हुए. प्रार्थना समारोह को सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन ने आयोजित किया था. तिब्बती सरकार के मंत्री, तिब्बती संसद के सदस्य और CTA के कर्मचारी भी इस सभा में शामिल हुए. सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन तेनजिन लेखाय कहते हैं, 'हम उन लोगों के लिए प्रार्थना सभा कर रहे हैं जो तिब्बत-नेपाल बॉर्डर पर आई इस बड़ी अचानक आई बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. चीनी सरकार को इस बारे में बहुत साफ होना चाहिए कि दूसरी तरफ ऊपरी पहाड़ियों पर असल में क्या हुआ था.'
नेपाल सरकार ने भोटेकोशी नदी में संभावित बाढ़ के खतरे के बारे में खास नोटिस जारी किया है. नेपाल के विदेश मंत्रालय के जरिए चीन से मिली ताजा जानकारी के मुताबिक, सैटेलाइट इमेज और शुरुआती एनालिसिस के तहत, नदी रुक गई है और कल जिस जगह बाढ़ आई थी, वहां एक झील बन गई है. नोटिस में कहा गया है कि झील का पानी बढ़ रहा है और उसके फटने का खतरा है. इस स्थिति को देखते हुए, जब तक अगला नोटिस जारी नहीं होता, भोटेकोशी नदी के निचले किनारे वाले इलाके के निवासियों, यात्रियों, बचाव अभियान में लगे बचावकर्मियों और सभी संबंधित लोगों से अनुरोध है कि वो खास सावधानी बरतें और नदी के किनारों और जोखिम वाले इलाकों से दूर सुरक्षित जगहों पर रहें.
नेपाल पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें नेपाल के स्थानीय लोग नदी में तैरते मलबे से सिलेंडर और लकड़ी जैसी चीजें निकालने के लिए दौड़ रहे हैं. कई लोग बहते पानी में उतरकर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं. ये वीडियो सामने आने के बाद, नेपाल पुलिस ने अपने वीडियो जारी किए हैं और लोगों को चेतावनी दी है कि वो अपनी जान जोखिम में न डालें और सुरक्षित रहें.
नेपाल में बाढ़ के हालात और फंसे हुए भारतीय टूरिस्ट पर, यूनियन मिनिस्टर संजय सेठ ने कहा, 'रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कई लोगों की जान चली गई है. जब इतना बड़ा ग्लेशियर टूटता है, तो इसे अक्सर ग्लोबल वार्मिंग से पैदा होने वाली संभावनाओं से जोड़ा जाता है. इससे पहले भी भूकंप आए थे और आज सुबह भी एक और आया. ये बात कि अभी कई तीर्थयात्री लापता हैं, भारत सरकार के लिए गहरी चिंता की बात है.' उन्होंने आगे कहा, 'इंडियन आर्मी सिर्फ बॉर्डर पर लड़ाई नहीं लड़ती, जब भी देश को जरूरत होती है, आर्मी नागरिकों की सुरक्षा और जान-माल की रक्षा के लिए तुरंत आगे आती है, ये एक ऐसा रोल है जिसके लिए इंडियन आर्मी दुनिया भर में मशहूर है. जब कल ये हादसा हुआ, तो तुरंत एक्शन लिया गया.'
नेपाल सरकार ने बाढ़ पीड़ितों की मदद करने वाले अंतरराष्ट्रीय दाताओं के लिए अलग भुगतान पोर्टल सार्वजनिक किया है. नेपाल सरकार ने प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप राहत कोष में विदेशी दाताओं को सीधे सहायता राशि जमा करने की व्यवस्था शुरू की है. इस प्रणाली के माध्यम से विदेशी दाता अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड अथवा स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक में मौजूद क्यूआर कोड के जरिए सीधे राहत कोष में आर्थिक सहायता जमा कर सकते हैं.
सरकार ने बताया है कि इच्छुक दाता दिए गए लिंक पर जाकर सीधे राहत कोष में सहयोग कर सकते हैं.
(इनपुट- पंकज दास)
नेपाल में आई बाढ़ के बाद प्रधानमंत्री बालेन शाह हालात का जायजा लेने नुवाकोट पहुंचे. मौके से बालेन शाह की तस्वीरें भी सामने आई हैं जिनमें वो सुरक्षा बलों से बातचीत करते और हालात का मुआयना करते नजर आए.
(इनपुट- पंकज दास)
रसुवा स्थित भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ में जान गंवाने वालों की संख्या 289 पहुंच गई है. जिला पुलिस कार्यालय पूर्वी नवलपरासी ने वहां से बड़ी संख्या में शव बरामद होने की जानकारी दी है. पूर्वी नवलपरासी में ही अब तक 81 शव मिले हैं. इनमें से 55 शव जिले के सात अलग-अलग अस्पतालों में रखे गए हैं, जबकि 26 शव घटनास्थल पर ही हैं. पुलिस के , इन शवों को अस्पताल पहुंचाने की तैयारी की जा रही है. पूर्वी नवलपरासी में मिले शवों में 22 महिलाएं, 33 पुरुष, 6 बालक और 9 बालिकाएं शामिल हैं. इसके अलावा 11 शवों की पहचान नहीं हो सकी है. इससे पहले चितवन में 108, पश्चिम नवलपरासी में 15 और धादिङ में 27 शव बरामद किए जा चुके हैं. इसी तरह गोरखा में 20, नुवाकोट में 12, तनहुं में 9 और रसुवा में 17 शव मिले हैं. बाढ़ के बाद नदी किनारे और प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है. अधिकारियों के अनुसार, बरामद शवों की पहचान और अन्य विवरण जुटाने का काम भी चल रहा है.
बाढ़ से तबाह नेपाल में कई लोगों के फंसे होने पर MEA के स्पोक्सपर्सन रणधीर जायसवाल ने कहा, 'पहला ग्रुप 73 लोगों का है जो त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. फिर, तमिलनाडु के 37 और 49 नागरिकों के दो अलग-अलग ग्रुप, जिन्होंने सम्राट और फ्लाई एवरेस्ट ट्रैवल्स के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा की थी. पश्चिम बंगाल के 32 भारतीय नागरिकों का एक ग्रुप है जो रसुवा जिले के तिमुरे में सम्राट ट्रैवल्स की मदद से यात्रा की थी. फिर, अलग-अलग राज्यों के 61 भारतीय नागरिकों का एक ग्रुप और फिर केरल के 33 भारतीय नागरिकों का एक ग्रुप. ये पांच बड़े ग्रुप हैं जिनमें कुल मिलाकर 288 लोग हैं जिनके बारे में हम बात कर रहे हैं.'
विदेश मंत्रालय (MEA) ने नेपाल में बाढ़ के बाद लापता भारतीयों को लेकर बड़ा अपडेट दिया है. मंत्रालय ने कहा कि संभव है कि कुछ लापता भारतीय चीन की तरफ भी हों. MEA के मुताबिक, जैसा कि पहले बताया गया था, करीब 200 भारतीय अब भी चीन की तरफ फंसे हुए हैं. विदेश मंत्रालय ने कहा कि स्थिति लगातार बदल रही है और रेस्क्यू एवं लापता लोगों से जुड़ी जानकारी भी नियमित रूप से अपडेट हो रही है.
नेपाल में फंसे तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है. विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने इसकी जानकारी दी है. ये सभी भारतीय नागरिक कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल गए थे. नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद ये वहां फंस गए थे, जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर इन्हें सुरक्षित निकाला गया.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया है कि नेपाल में आई तबाही की वजह से 288 भारतीय नागरिक लापता हैं. लापता लोगों की तलाश जारी है.
नेपाल में बाढ़ की वजह से आई तबाही पूरा देश सिसक रहा है. इस बीच मौत के आंकड़ों में भी तेजी से बढ़ोतरी है. स्थानीय पुलिस ने बताया है कि अब तक 270 शव बरामद किए गए हैं.
नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद 517 विदेशी पर्यटकों से संपर्क टूट गया है. इनमें सबसे ज्यादा 178 पर्यटक भारत के हैं. नेपाल पर्यटन बोर्ड ने गुरुवार दोपहर 12 बजे तक के आंकड़ों के आधार पर यह जानकारी जारी की है. बाढ़ के कारण नेपाल के 127 स्थानीय पर्यटक भी संपर्क में नहीं आ पा रहे हैं.
रसुवा जिले में अचानक आई इस बाढ़ ने कई विदेशी सैलानियों का संपर्क तोड़ दिया है. पर्यटन बोर्ड के मुताबिक भारत के बाद सबसे ज्यादा अमेरिका के 65 पर्यटक लापता हैं. इसके अलावा यूक्रेन के 53, मलेशिया के 51, ऑस्ट्रेलिया के 35 और ब्रिटेन के 33 पर्यटकों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है. कनाडा के 25 पर्यटक भी इस सूची में शामिल हैं.
सिंगापुर के 9 पर्यटक तथा रूस और जर्मनी के 8-8 पर्यटक भी बाढ़ प्रभावित इलाके में फंसे बताए जा रहे हैं. लातविया और दक्षिण अफ्रीका के 6-6, न्यूजीलैंड और जापान के 5-5, फ्रांस के 4 और स्पेन के 3 पर्यटक भी संपर्क में नहीं हैं. इटली, आयरलैंड, कजाकिस्तान, नीदरलैंड और पुर्तगाल के 2-2 पर्यटक भी लापता बताए गए हैं.
इसके साथ ही बेलारूस, बुल्गारिया, फिनलैंड, हंगरी, इजरायल, लिथुआनिया, फिलीपींस, सर्बिया, स्वीडन और स्विट्जरलैंड का एक-एक पर्यटक भी संपर्क से बाहर है. प्रशासन और बचाव टीमें लगातार इन पर्यटकों का पता लगाने में जुटी हुई हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.
हैदराबाद के 31 कैलाश मानसरोवर यात्री नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई फ्लैश फ्लड की चपेट में आने से कुछ घंटे पहले प्रभावित इलाके से निकल गए थे. सभी यात्री सुरक्षित हैं और तिब्बत के सागा में मौजूद हैं. पूर्व DRDO चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्डी भी समूह में शामिल थे.
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है. नेपाली अधिकारियों के मुताबिक करीब 100 लापता भारतीय पर्यटकों और 25 चीनी कामगारों का पता लगा लिया गया है.
नेपाल में आई भयानक त्रासदी से चारों तरफ कहर और तबाही का मंजर है. इसी बीच कैलाश-मानसरोवर की यात्रा में निकले कई भारतीयों का उनके परिवारों से संपर्क टूट चुका है. अब परिजन बाढ़ में फंसे अपने प्रियजनों की खबर और सलामती की दुआ कर रहे हैं. पूरी खबर यहां क्लिक कर पढ़ें: आखिरी कॉल, फिर फोन खामोश, किसी का मैसेज रह गया अधूरा... लोगों की जुबानी नेपाल त्रासदी की कहानी
NDRF ने कहा कि नेपाल की भीषण फ्लैश फ्लड का यूपी और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में अब तक कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है. दोनों राज्यों के साथ मिलकर लगातार हालात पर नजर रखी जा रही है. बिहार में NDRF की 9 टीमें जमीन पर तैनात हैं. यूपी में NDRF की 11 टीमें तैनात हैं.
नेपाल और चीन के तिब्बत सीमा क्षेत्र में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड में अब तक कम से कम 175 लोगों की मौत हो चुकी है. अधिकारियों के मुताबिक, करीब 1,500 लोग अब भी लापता हैं. इनमें कम से कम 800 विदेशी नागरिक शामिल हैं.
नेपाल में बाढ़ के बीच भारत अलर्ट मोड पर है. NDRF की चार टीमें गाजियाबाद में स्टैंडबाय पर हैं. यूपी-बिहार में प्रशासन को अलर्ट किया गया है.
नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड के बाद 300 से ज्यादा भारतीयों के लापता होने की खबर है. इस बीच नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास ने भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए इमरजेंसी कॉन्टैक्ट नंबर जारी किए हैं. दूतावास ने लोगों से अपील की है कि नेपाल में फंसे या लापता लोगों की जानकारी के लिए इन आधिकारिक नंबरों पर WhatsApp के जरिए संपर्क करें.
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नेपाल में भोटेकोशी नदी में आए भीषण फ्लैश फ्लड के बाद मौत और लापता लोगों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. नेपाल एंबेसी के सूत्रों के मुताबिक, अब तक 175 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि स्थानीय लोगों और पर्यटकों समेत बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं. ताजा जानकारी के अनुसार, 28 देशों के 476 लोग लापता बताए गए हैं. हालांकि, ये आंकड़े अभी सत्यापन के अधीन हैं और सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.
मीडिया से बात करते हुए नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने दावा किया है कि सेना ने अब तक 105 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है. वहीं, 300 भारतीय अभी भी लापता हैं.
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत की ओर से मिली संवेदनाओं, एकजुटता और मानवीय सहायता के लिए नेपाल दूतावास ने आभार जताया है. दूतावास ने कहा कि नेपाल सरकार सेना, पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर खोज, बचाव और राहत अभियान चला रही है.
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच सद्गुरु ने प्रशासन और अधिकारियों से ग्यिरोंग जाने की अनुमति देने की अपील की है. सद्गुरु ने कहा है कि उनके ग्रुप के 80 लोग बाढ़ के बाद से लापता हैं और उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. उन्होंने परिवारों और कुछ स्वयंसेवकों के साथ ग्यिरोंग जाने की अनुमति मांगी है. पूरी खबर यहां क्लिक कर पढ़ें: तिब्बत में इशा फाउंडेशन के 80 श्रद्धालु लापता... सद्गुरु ने चीन से मांगी ग्यारोंग जाने की इजाजत, वीडियो में हुए भावुक
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बताया कि भोटेकोशी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और सहायता सामग्री पहुंचाने का अभियान तेज कर दिया गया है. सुबह 6:30 बजे से हेलीकॉप्टर उड़ानें शुरू हुईं और अब तक 15 से ज्यादा उड़ानें हो चुकी हैं. नेपाली सेना ने रसुवा के टिमुरे से 116 लोगों को सुरक्षित निकाला, जिनमें 95 नेपाली और 21 भारतीय नागरिक शामिल हैं. एक सुरंग में फंसे 7 नेपाली नागरिकों को भी बाहर निकाला गया. प्रभावित इलाकों में जनरेटर, मोबाइल टावर, चिकित्सा सामग्री, टेंट और मशीनें भेजी जा रही हैं.
नेपाल में आई भीषण तबाही के बीच बिहार के जल संसाधन विभाग ने राहत भरी खबर दी है. विभाग ने साफ कहा है कि राज्य में फिलहाल हालात काबू में हैं. गंडक नदी का पानी 26 अगस्त की रात 11 बजे सबसे ज्यादा 1 लाख 50 हजार 200 क्यूसेक तक पहुंच गया था. इसके बाद पानी लगातार घटने लगा था, लेकिन देवघाट इलाके में देर रात हुई बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है.
जल संसाधन विभाग ने बताया कि इस बढ़ोतरी के बावजूद अभी तक किसी भी तटबंध पर कोई खतरा नहीं दिखा है. सभी बांध और तटबंध पूरी तरह सुरक्षित बताए गए हैं. विभाग के अधिकारी हर घंटे नदी के जलस्तर पर नजर रख रहे हैं और तय नियमों के हिसाब से काम कर रहे हैं. बाढ़ से जुड़े सभी दिशा-निर्देशों का पालन सख्ती से किया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से पहले ही निपटा जा सके.
वहीं दूसरी बड़ी नदी गंगा को लेकर भी राहत की खबर है. गंगा नदी का पानी अभी घटने की दिशा में बढ़ रहा है, यानी जलस्तर कम हो रहा है. हालांकि कुछ जगहों पर एक या दो सेंटीमीटर तक मामूली बढ़ोतरी भी देखी जा सकती है, लेकिन यह बहुत छोटी बढ़त होगी और चिंता की बात नहीं है.
जल संसाधन विभाग ने आम लोगों को भरोसा दिलाया है कि पूरी टीम हालात पर बारीकी से नजर रखे हुए है और बाढ़ सुरक्षा को लेकर पूरी तरह तैयार और सतर्क है.
नेपाल-चीन सीमा के पास आई भीषण बाढ़ को लेकर चीन पर सवाल उठ रहे हैं. नेपाली पत्रकारों के एक समूह ने आरोप लगाया कि बीजिंग ने नेपाल को बाढ़ के खतरे की समय पर जानकारी नहीं दी. अब नेपाल में चीन के राजदूत झांग माओमिंग ने जवाब देते हुए कहा है कि चीन खुद भारी नुकसान के बावजूद नेपाल को तुरंत राहत सामग्री और आर्थिक सहायता मुहैया करा रहा है. पूरी खबर यहां क्लिक कर पढ़ें: क्या नेपाल में 'Made In China' है फ्लैश फ्लड? आ गया बीजिंग का जवाब
नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद सरकार ने सर्च, रेस्क्यू और राहत अभियान तेज कर दिया है. नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद के लिए नेपाली सेना जरूरी खाद्य सामग्री, टेंट, दवाइयां और अन्य राहत सामग्री पहुंचा रही है.
सुबह भूकंप आने के तुरंत बाद तिब्बत की तरफ से भोटेकोशी नदी में भारी बाढ़ आ गई. देखते ही देखते यह बाढ़ बेत्रावती, धादिङ, मलेखु, मुग्लिन होते हुए त्रिशूली और नारायणी नदी तक फैल गई. रास्ते में कई जलमापन केंद्र और एक पुल बाढ़ में बह गए, जिससे आंकड़े मिलने बंद हो गए. प्रशासन ने समय पर लाखों लोगों को एसएमएस के जरिए सतर्क किया, जिससे बड़ी जनहानि टाली जा सकी. दोपहर तक जलस्तर कई जगह खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था. शाम होते-होते देवघाट में नदी का बहाव सामान्य स्तर पर लौट आया और स्थिति नियंत्रण में आ गई. पूरी खबर यहां पढ़ें: पहाड़ों से पानी नहीं मौत गिर रही थी, पल-पल टूट रही थीं सांसें... जानें नेपाल में महातबाही की एक-एक पल की Timeline
नेपाल में अब तक कुल 163 शव बरामद किए जा चुके हैं. इनमें सबसे ज्यादा चितवन से 64 शव मिले हैं.
जिलेवार आंकड़ा:
* चितवन: 64
* धादिंग: 27
* नवलपरासी पूर्व: 26
* गोरखा: 20
* नुवाकोट: 12
* तनहु: 9
* रसुवा: 3
* नवलपरासी पश्चिम: 2
नेपाल में बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है. सड़कों पर कीचड़ और मलबा जमा है, घर ध्वस्त या पानी में आधे डूबे नजर आ रहे हैं और कई गाड़ियां फंसी हुई हैं. हवाई दृश्यों में आपदा का व्यापक असर दिखाई दे रहा है. इस बीच रेस्क्यू टीमें, सेना और स्थानीय लोग लगातार बचाव अभियान में जुटे हैं. जेसीबी, रस्सियों और कंधों के सहारे बुजुर्गों और फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है. बच्चे और आम लोग भी तबाही के बीच डरे हुए नजर आ रहे हैं. राहत और पुनर्वास अब प्राथमिकता है. तस्वीरों में देखें बाढ़ के बाद कैसा है नेपाल में मंजर. कीचड़ में लिपटी इमारतें, लापता लोग और मौत का मंजर... नेपाल में तबाही की बाद की देखें Photos
नेपाल में आई फ्लैश फ्लड के बाद 130 से ज्यादा भारतीय लापता हैं, जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा के श्रद्धालु भी हैं. सबसे ज्यादा असर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के पर्यटकों पर पड़ा है, जहां क्रमशः 37 और 32 लोगों का कोई सुराग नहीं मिला है. पूरी खबर को यहां क्लिक कर पढ़ें - तमिलनाडु के 37 तो बंगाल के 32... देखें नेपाल जलप्रलय में किस राज्य के कितने भारतीय लापता
US जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, नेपाल में यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए एक जबरदस्त भूस्खलन के बाद आई, जिससे 5.2 तीव्रता वाले भूकंप के बराबर सीस्मिस सिग्नल पैदा हुए. माना जा रहा है कि इस भूस्खलन में ग्लेशियर का एक हिस्सा ढह गया था, जिससे भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान, कीचड़ और पानी भोटेकोशी नदी की सहायक नदी 'ल्हेन्डे खोला' में बह गया.
नेपाल में आई भयानक बाढ़ से किसी तरह जान बचाने वाले एक शख्स ने बताया कि मेरी पत्नी मलबे में दब गई थीं, जबकि हम जान बचाने के लिए छत पर थे. करीब 4 से 5 घंटे बाद मुझे हेलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू किया गया.
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भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि भारत की HADR और मेडिकल सहायता काठमांडू पहुंच गई है. राहत कार्यों में मदद के लिए और सहायता जुटाई जा रही है.
बिहार में तिब्बत और नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन हाई अलर्ट पर है. पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी (DM) तरनजोत सिंह ने कहा, 'तिब्बत और नेपाल में बाढ़ के कारण वाल्मीकिनगर बैराज और अन्य जगहों पर प्रशासनिक कर्मचारी अलर्ट पर हैं. हमने अलग-अलग तटबंधों और वाल्मीकिनगर बैराज का निरीक्षण किया है. पानी नेपाल में देवघाट से आगे बढ़ चुका है. पानी के सुबह 9 बजे के आसपास बैराज तक पहुंचने की उम्मीद है. उम्मीद है कि जलस्तर खतरे के निशान से नीचे रहेगा और स्थिति सामान्य बनी रहेगी. हमने नदी के किनारे रहने वाले सभी इलाकों के लोगों को अलर्ट कर दिया है.'
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में कुल 384 पर्यटक भी संपर्कविहीन बताए जा रहे हैं. नेपाल पर्यटन बोर्ड ने एक बयान जारी करते हुए बताया है कि लापता पर्यटकों में 139 भारतीय पर्यटक शामिल हैं. इसके अलावा, 37 भारतीय मूल के एनआरआई पर्यटक भी लापता बताए गए हैं. (Input: Pankaj Das)
नेपाल में रसुवा और आसपास के क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ से तबाही का सिलसिला जारी है. बुधवार रात 11:30 बजे तक के सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 157 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं.
मरने वालों के शव नेपाल के चीन से लगे सीमावर्ती जिलों से लेकर भारतीय सीमा से सटे इलाकों तक में पाए गए हैं. सरकार द्वारा जारी बयान के मुताबिक, सबसे अधिक प्रभावित रसुवा जिले में सिर्फ 3 शव बरामद हुए हैं, जबकि भारतीय सीमा से सटे चितवन की नारायणी नदी से 64 शव बरामद किए गए हैं. वहीं, एक और सीमावर्ती जिले नवलपरासी में 22 शव मिले हैं. इसके अलावा गोरखा जिले से 19, धादिंग जिले से 27, नुवाकोट से 11 और तनहु से 9 शव अब तक बरामद किए जा चुके हैं.
सरकारी विवरण के मुताबिक, अब तक 245 स्थानीय लोगों के संपर्कविहीन होने की जानकारी संबंधित जिला प्रशासन कार्यालय से प्राप्त हुई है. इसके अलावा नेपाल पुलिस के 26 जवान, नेपाली सेना के 22 जवान और सशस्त्र प्रहरी बल के 13 जवान लापता बताए गए हैं. (Input: Pankaj Das)
नेपाल प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने जानकारी दी है कि रसुवा स्थित भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित घायल और असहाय नागरिकों को गुरुवार सुबह से नेपाल सेना और निजी हेलीकॉप्टरों की मदद से सुरक्षित रेस्क्यू किया जाएगा.
नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) की हाल ही में बैठक में यह फैसला लिया गया है कि प्रभावित क्षेत्रों से घायलों को बचाकर प्राथमिक उपचार के लिए रसुवा के धुंचे व नुवाकोट के विदुर स्थित नेपाल सेना के बैरकों में कैंप स्थापित किए जाएंगे. गंभीर रूप से घायलों को तत्काल रेस्क्यू कर काठमांडू लाने की तैयारियां जारी हैं. घायलों की स्थिति की गंभीरता के आधार पर उन्हें प्राथमिकता देते हुए बचाव कार्य और इलाज उपलब्ध कराया जाएगा. (Input: Pranay)
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस त्रासदी में अब तक 157 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 75 घायलों को इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. आपदा की वजह से बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है.
नेपाल के 45 स्थानीय निवासी संपर्कविहीन बताए जा रहे हैं, जबकि सुरक्षा बलों के 61 जवान (नेपाल पुलिस के 26, नेपाली सेना के 22 और सशस्त्र प्रहरी बल के 13 जवान) भी लापता हैं. वहीं, 384 पर्यटक (139 भारतीय) भी लापता बताए जा रहे हैं. (Input: Pankaj Das)