बाइडेन की वो 7 भूलें जिनसे प्रेसिडेंशियल रेस से नाम वापस लेने को हुए मजबूर

राष्ट्रपति बाइडेन डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार चुने गए थे. वह लगातार चुनाव प्रचार भी कर रहे थे. लेकिन बढ़ी हुई उम्र और खराब स्वास्थ्य से जूझ रहे बाइडेन की दिक्कतों को ट्रंप के साथ उनकी प्रेसिडेंशियल डिबेट ने और बढ़ा दिया. इस डिबेट के बाद उन पर उम्मीदवारी से पीछे हटने का लगातार दबाव बढ़ रहा था.

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राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी से हटे बाइडेन राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी से हटे बाइडेन

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 11:10 AM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ेंगे. उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के नाम का समर्थन किया है. लेकिन उनके इस फैसले से एक सवाल खड़ा हो गया है कि उन्होंने अचानक यह फैसला क्यों लिया? आइए, एक नजर डालते हैं, उन सात बड़ी भूलों पर जिनकी वजह से उन्हें अपनी उम्मीदवारी वापस लेने को मजबूर होना पड़ा. 

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राष्ट्रपति बाइडेन डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार चुने गए थे. वह लगातार चुनाव प्रचार भी कर रहे हैं. लेकिन बढ़ी हुई उम्र और खराब स्वास्थ्य से जूझ रहे बाइडेन की दिक्कतों को ट्रंप के साथ उनकी प्रेसिडेंशियल डिबेट ने और बढ़ा दिया. इस डिबेट के बाद उन पर लगातार दबाव बढ़ा. बीते कुछ महीने में ऐसी कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिनसे उनकी फजीहत हुई है और उन्हें राष्ट्रपति पद के अयोग्य माना जाने लगा.

1) डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडेन और रिपब्लिकन की ओर से उम्मीदवार ट्रंप के बीच बीते महीने जून में पहले प्रेसिडेंशियल डिबेट हुई थी. सीएनएन की ओर से आयोजित कराई गई इस लाइव डिबेट में ट्रंप एक तरह से बाइडेन पर भारी पड़ गए थे. इस डिबेट में बाइडेन की परफॉर्मेंस बेहद खराब रही. वह ना को ट्रंप के दावों को काउंटर कर पाए. ना ही अपनी बात सही तरीके से रख पाए. वह कई बार बोलते-बोलते फ्रीज हो गए. ऐसे भी मौके आए, जब उन्हें खुद पता नहीं था कि वह क्या बोल रहे हैं. 

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इस टीवी डिबेट के ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिनमें उन्हें फ्रीज होते, बुदबुदाते और भ्रमित होते देखा गया. डिबेट में बाइडेन की इस खराब परफॉर्मेंस के बाद उन पर उम्मीदवारी से हटने का दबाव बढ़ गया था. इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति ओबामा और अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की पूर्व स्पीकर नैंसी पेलोसी ने उनसे उम्मीदवारी से हटने का अनुरोध किया था.

2) राष्ट्रपति बाइडेन ने हाल ही में वॉशिंगटन में हुई नाटो समिट में यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को पुतिन जबकि अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को वाइस प्रेसिडेंट ट्रंप कह दिया था. बाइडेन ने NATO की बैठक के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को 'राष्ट्रपति पुतिन' बोल दिया. वह फिर संभले और अपनी गलती सुधार की. जो बाइडेन ने अपनी गलती सुधारते हुए कहा कि उनका फोकस पुतिन को हराने पर है.

3) हाल ही में इटली के पुगलिया में हुई G7 बैठक में वैश्विक नेताओं के मिलने-जुलने की कई तरह की तस्वीरें सामने आई थीं.  इस दौरान बाइडेन के एक वीडियो ने खासतौर से लोगों का ध्यान खींचा था.इस वीडियो में बाइडेन का बर्ताव कुछ ऐसा रहा कि इटली की पीएम जार्जिया मेलोनी को आगे बढ़कर उन्हें संभालना पड़ा. वीडियो में देखा जा सकता है सभी नेता एक दिशा में खड़े होकर बातचीत कर रह हैं जबकि बाइडेन विपरीत दिशा में जाकर अपने आप से बातें करते और अजीब तरह से बर्ताव करते नजर आ रहे हैं. इसे बाद मेलोनी आगे बढ़कर उन्हें ग्रुप के पास ले जाती हैं.

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4) राष्ट्रपति बाइडेन पिछले साल जून में कोलोराडो के यूएस एयरफोर्स एकेडमी के ग्रैजुएशन समारोह में शामिल हुए थे. इस दौरान बाइडेन ने ग्रैजुएट छात्रों को डिप्लोमा दिए और उनसे हाथ मिलाया. लेकिन इसके बाद वह जैसे ही आगे बढ़े, वह लड़खड़ाकर गिर गए. अधिक उम्र होने की वजह से वह उठ नहीं पाए और सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स ने आगे बढ़कर उन्हें उठाने में मदद की. 

 

5) हाल ही में इटली में हुई G7 मीटिंग के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन बैठे-बैठे सोते नजर आए थे. इस बीच उनकी बगल की सीट पर बैठे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को अपनी सीट से उठकर उन्हें उठाना पड़ा था. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था, जिसके बाद उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था.

6) बीते मार्च महीने में बाइडेन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था. इस वीडियो में वह गाजा में सीजफायर जैसे गंभीर मुद्दों पर बात करते हुए आइसक्रीम खाते नजर आए थे. इस वीडिये के सामने आने के बाद उनकी जमकर आलोचना हुई थी. गाजा संकट जैसे मुद्दों पर आइसक्रीम खाते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में बात करने पर उनकी निंदा की गई थी. 

7) राष्ट्रपति बाइडेन ने इसी महीने की शुरुआत में रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन को ब्लैक मैन कहा था. एक इंटरव्यू के दौरान वह अपनी सरकार के कामकाज को लेकर बात कर रहे थे. लेकिन इस बीच वह रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन  का नाम भूल गए और उन्हें ब्लैक मैन कहकर संबोधित किया. 

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81 साल की उम्र ने बढ़ाई दिक्कतें

जो बाइडेन 81 साल के हैं. वह अमेरिका के इतिहास में अब तक के सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति हैं. उनकी यही उम्र इस बार उनकी राह में रोड़ा भी बनी. ट्रंप सहित विपक्षियों ने बार-बार उम्र को लेकर उन पर निशाना साधा. विपक्षियों की ओर से एक ऐसा नैरेटिव पेश किया गया कि वह बढ़ती उम्र की वजह से इस पद के योग्य नहीं है. इसी नैरेटिव की वजह से आम जनमानस में भी यही संदेश गया कि राष्ट्रपति को अपेक्षाकृत युवा और उत्साह से लबरेज होना चाहिए. 

डिमेंशिया, कोरोना और अन्य बीमारियां

राष्ट्रपति जो बाइडेन का मानसिक स्वास्थ्य लगातार चर्चा में बना हुआ है. बीच-बीच में ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने आईं, जिनमें कहा गया कि बाइडेन डिमेंशिया से जूझ रहे हैं. इसके पीछे तर्क दिए गए डिमेंशिया की वजह से उन्हें भाषण देने में दिक्कतें आती हैं. वह भाषण देते समय भूल जाते हैं कि उन्हें क्या कहना है. उनके कई विदेशी दौरों के दौरान ऐसे वीडियो सामने आए जब उन्हें मंच पर कन्फ्यूजन की स्थिति में देखा गया. हालांकि, व्हाइट हाउस ने उन रिपोर्ट्स को खारिज किया है, जिनमें कहा गया है कि बाइडेन को डिमेंशिया है. 

इसके साथ ही बीच प्रचार के दौरान बाइडेन कोरोना से संक्रमित हो गए थे. इस वजह से उन्होंने प्रचार बीच में ही रोककर खुद को क्वारंटीन कर लिया था. 

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बाइडेन प्रशासन की नाकामियां पड़ी भारी!

अमेरिका में बड़े पैमाने पर लोगों को लगता है कि बीते चार साल में बाइडेन प्रशासन पूरी तरह से फेल रहा है. बीते चार साल में देश की अर्थव्यवस्था बहुत ही खराब दौर से गुजरी है. देश में रोजगार संकट गहराया है. 

सर्वेक्षणों में ट्रंप की जीत और बाइडेन की हार

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर कई तरह के सर्वेक्षणों में एक ही बात निकलकर सामने आई कि बाइडेन का ट्रंप से जीतना बेहद मुश्किल है. सरकारी और गैर सरकारी सभी तरह के पोल सर्वेक्षण में ट्रंप को बढ़त बताई गई है. बाइडेन उनसे रेस से बहुत पीछे छूटते नजर आ रहे हैं. इन सर्वेक्षणों के नतीजों ने डेमोक्रेटिक पार्टी की चिंता बढ़ा दी थी. 

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