भारत में इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने गुरुवार को साफ तौर पर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति डील में इजरायल के लिए जरूरी मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया गया है. उन्होंने इंडिया टुडे को दिए एक खास इंटरव्यू में यह बात कही.
अजार ने बताया कि इस डील में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और उसके प्रॉक्सी ग्रुप्स को मिलने वाली मदद पर कोई समाधान नहीं निकाला गया है. उन्होंने आगाह किया कि अगर इन सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को हल नहीं किया गया तो आगे चलकर ईरान के साथ फिर टकराव हो सकता है.
अजार ने कहा, "बैलिस्टिक मिसाइल के मामले में इजरायल के हित प्रभावित हुए हैं. इजरायल के लिए सबसे बड़ी चुनौती बैलिस्टिक मिसाइल का मुद्दा और प्रॉक्सी ग्रुप्स को ईरान का समर्थन है." यहां प्रॉक्सी ग्रुप्स का मतलब हिज्बुल्लाह और हमास जैसे संगठनों से है, जिन्हें माना जाता है कि ईरान से पैसा और हथियार मिलते हैं. उन्होंने यह भी कहा "न्यूक्लियर मुद्दे पर भी हमें चिंता है."
बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने 14 पॉइंट का एक समझौता साइन किया था. इस समझौते का मकसद उस संघर्ष को रोकना था जिसने पूरे मिडिल ईस्ट यानि मध्य पूर्व को अपनी लपेट में ले लिया था और जिसकी वजह से दुनिया भर में एनर्जी क्राइसिस भी पैदा हो गया था.
दिलचस्प बात यह है कि इस समझौते में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर कोई बात नहीं की गई है. जबकि जंग शुरू होने के वक्त ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू दोनों ने इसे अपनी प्राथमिकता बताया था. यहां तक कि ट्रंप ने यह भी कहा था कि वे ईरान पर अपना बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम छोड़ने का दबाव नहीं डालेंगे.
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इस समझौते के बाद अब 60 दिन की एक बातचीत की प्रक्रिया शुरू होगी, जो ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और उसके पास मौजूद एनरिच्ड यूरेनियम पर फोकस करेगी.
इजरायल को सबसे ज्यादा परेशानी इस बात से है कि इस डील में लेबनान को भी शामिल किया गया है, जो कि ईरान की एक अहम मांग थी. इस समझौते के तहत इजरायल को लेबनान में मिलिट्री ऑपरेशन चलाने से रोका गया है.
हालांकि इजरायली राजदूत ने यह साफ किया कि इजरायल साउथ लेबनान में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगा. उनका कहना था कि इजरायल की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को अभी तक ठीक से हल नहीं किया गया है.
गौरव सावंत