ईरान ने सोमवार को अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, तीन दिनों में यह दूसरी बार है जब ईरान ने अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाया है. हालांकि, अमेरिकी सेना ने इस हमले की सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की है. अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार के हमले में किसी अमेरिकी जहाज को नुकसान नहीं पहुंचा.
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान ने शनिवार को भी अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर मिसाइलें दागी थीं. उस हमले में एक अमेरिकी विमानवाहक पोत और मिसाइलों से लैस एक दूसरे अमेरिकी जहाज को निशाना बनाया गया था. दोनों जहाज मिसाइल हमले से बच गए. इस दौरान किसी अमेरिकी सैनिक के घायल होने की खबर नहीं है.
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सोमवार के हमले की जानकारी दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार हो रहे हमलों से अमेरिका की चिंता बढ़ गई है. आशंका है कि ईरान अब ज्यादा आधुनिक और ताकतवर मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है. यह भी शक जताया गया है कि ईरान को चीन या रूस से तकनीकी मदद मिल रही है.
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अमेरिका ने ईरान से जुड़े तेल टैंकरों पर किया हमला
इससे पहले शनिवार को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया था. अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े तीन तेल टैंकरों पर कार्रवाई की. इनमें से दो टैंकरों को पूरी तरह काम करने लायक नहीं छोड़ा गया. तीसरे टैंकर को ओमान की खाड़ी में पूरी तरह नष्ट कर दिया गया.
अमेरिका का कहना है कि ये तेल टैंकर एक बड़े सीक्रेट नेटवर्क का हिस्सा थे. इस नेटवर्क के जरिए ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और उसके सहयोगी संगठनों के लिए पैसा जुटाया जाता था.
अमेरिकी सेना के मुताबिक, तेल टैंकरों पर यह कार्रवाई ईरान के मिसाइल हमलों के जवाब में की गई थी. ईरान ने शनिवार को एक अमेरिकी विमानवाहक पोत और एक दूसरे अमेरिकी जहाज को निशाना बनाया था. अमेरिकी सेना का कहना है कि दोनों जहाज हमले से बच गए और किसी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं हुआ.
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ईरान के सरकारी मीडिया ने अमेरिकी तेल टैंकरों पर कार्रवाई की पुष्टि की है. इसके साथ ही ईरान ने दावा किया कि उसकी सेना ने भी जवाबी हमला किया. ईरान के मुताबिक, उसने अमेरिका से जुड़े तीन जहाजों और तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाया.
ईरान ने दावा किया कि ये तेल टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऐसे रास्ते पर जा रहे थे, जिसकी परमिशन नहीं थी. इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है.
अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक हफ्ते पहले फिर संघर्ष शुरू हुआ था. इससे पहले दोनों देशों के बीच करीब एक महीने तक हालात शांत रहे थे. 60 दिन का युद्धविराम भी पिछले महीने खत्म हो गया था. इसके बाद भी दोनों देशों के बीच कोई बड़ा समझौता नहीं हो सका.
ताजा संघर्ष का असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी पड़ा है. यहां जहाजों की सामान्य आवाजाही लगभग बंद हो गई है. यह रास्ता दुनिया के लिए बेहद अहम है. यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस दूसरे देशों तक पहुंचती है. तनाव बढ़ने से दुनिया भर में तेल और ऊर्जा की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को छोटा और रुक-रुककर होने वाला बताया है. उन्होंने इसे पूरी तरह युद्ध मानने से इनकार किया है. वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर ईरान अमेरिकी जहाजों पर हमला करेगा, तो अमेरिका उसके तेल टैंकरों को निशाना बनाएगा.
सोमवार को हुए ताजा मिसाइल हमले पर ट्रंप की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं.
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