'डील में बहुत देर कर दी, अब कीमत चुकानी पड़ेगी', ईरान पर हमले के बाद जमकर बरसे ट्रंप, दी ये चेतावनी

मिडिल ईस्ट तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. अमेरिकी एयरस्ट्राइक, ईरान के जवाबी हमले, बहरीन-कुवैत में अलर्ट और ट्रंप की आक्रामक चेतावनी ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया है. सीजफायर की कोशिशों के बीच जंग का दायरा बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है.

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US हेलीकॉप्टर क्रैश के बाद भड़का युद्ध, ईरान पर अमेरिकी हमले और ट्रंप की खुली चेतावनी. (File Photo: ITG) US हेलीकॉप्टर क्रैश के बाद भड़का युद्ध, ईरान पर अमेरिकी हमले और ट्रंप की खुली चेतावनी. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:29 PM IST

मिडिल ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा दिखाई दे रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद आक्रामक बयान देते हुए कहा कि तेहरान ने उस समझौते पर बातचीत करने में बहुत ज्यादा समय गंवा दिया जो उसके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता था. अब उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी.

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ट्रंप ने ईरान की सैन्य ताकत पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि ईरान की मिलिट्री पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है. उसके नेवी और एयर फोर्स जैसे महत्वपूर्ण हिस्से लगभग खत्म हो चुके हैं. ट्रंप ने यहां तक कहा कि ईरान सिर्फ बातें करता है और कुछ नहीं करता. ट्रंप ने कहा, "मिडिल ईस्ट का धमकाने वाला मर चुका है. ईरान ने डील पर बातचीत करने में बहुत ज्यादा समय लगा दिया. अब कीमत चुकानी पड़ेगी "

इस क्षेत्र में तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका ने एक अटैक हेलीकॉप्टर के क्रैश के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए बुधवार सुबह उसके खिलाफ एयरस्ट्राइक शुरू कर दी. अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि हेलीकॉप्टर एक ईरानी ड्रोन से टकरा गया था, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई का फैसला लिया गया. अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी. इससे युद्धविराम पर खतरे में है. 

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दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने पूरे मिडिल ईस्ट में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है. ईरान ने बहरीन और कुवैत में कई स्थानों को निशाना बनाया, जिसके बाद दोनों देशों में अलर्ट जारी कर दिया गया. एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किए गए और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया. जॉर्डन ने भी पुष्टि की कि उसने ईरान द्वारा दागी गई पांच मिसाइलों को मार गिराया. 

जॉर्डन के अनुसार ये मिसाइलें मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस की तरफ दागी गई थीं, जहां अमेरिकी F-35 फाइटर जेट और अन्य सैन्य विमान तैनात रहे हैं. जॉर्डन की सरकारी पेट्रा न्यूज एजेंसी ने सेना के बयान के हवाले से कहा कि हमले में कोई हताहत नहीं हुआ. इंटरसेप्ट की गई मिसाइलों के मलबे की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम तैनात की गई है. मिडिल ईस्ट में अप्रैल में सीजफायर लागू किया गया था. 

अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने बताया कि एयर फोर्स और नेवी के लड़ाकू विमानों ने ईरान में कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और सर्विलांस रडार साइट्स को टारगेट किया गया. ईरान ने बंदर अब्बास और केशम आइलैंड के आसपास हुए हमलों की पुष्टि की है. हालांकि तेहरान ने नुकसान की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है.

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सेंट्रल कमांड के मुताबिक यह ऑपरेशन हाल के उन हमलों का जवाब था जो अमेरिकी सैनिकों और क्षेत्रीय जलक्षेत्र से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक जहाजों पर किए गए थे. अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि क्षेत्र में मौजूद विदेशी सैन्य बल लगातार खतरे में हैं. उन्होंने कहा ईरान किसी भी हमले या धमकी का जवाब दिए बिना नहीं छोड़ेगा. 

28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू किए जाने के बाद से यह संघर्ष सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहा है. इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है. तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत बुधवार को 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई. युद्ध शुरू होने के बाद से इसमें 25 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

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