'जब तक ईरान की हार न हो, US ना रोके हमले', सऊदी-UAE-कुवैत-बहरीन ने ट्रंप को भेजा सीक्रेट मैसेज

मिडल ईस्ट में चल रही जंग के बीच एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ आया है. सऊदी अरब और यूएई सहित अमेरिका के खाड़ी सहयोगियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने को कहा है.

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अमेरिका के खाड़ी सहयोगियों ने ईरान के कमजोर होने तक जंग जारी रखने को कहा है. (Photo: Reuters) अमेरिका के खाड़ी सहयोगियों ने ईरान के कमजोर होने तक जंग जारी रखने को कहा है. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:47 AM IST

सऊदी अरब और यूएई के नेतृत्व में अमेरिका के खाड़ी सहयोगियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ जंग जारी रखने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है. अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, खाड़ी देशों का तर्क है कि एक महीने के हवाई हमलों के बावजूद तेहरान का धार्मिक शासन अभी पूरी तरह पंगु नहीं हुआ है.

जंग की शुरुआत में पर्याप्त सूचना न मिलने पर नाराज रहे ये देश अब इसे तेहरान के नेतृत्व को हमेशा के लिए खत्म करने के ऐतिहासिक अवसर के रूप में देख रहे हैं. सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और बहरीन ने निजी बातचीत में कहा कि वे तब तक सैन्य ऑपरेशन नहीं रोकना चाहते, जब तक कि ईरानी नेतृत्व में बड़ा बदलाव न हो जाए.

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यह मांग ऐसे वक्त में आई है, जब ट्रंप खुद युद्ध को बढ़ाने या समझौते के बीच दुविधा में हैं, जबकि इस जंग में अब तक 3,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

ट्रंप ने क्या कहा?

रविवार शाम को एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने यह कहा, “सऊदी अरब ज़ोरदार पलटवार कर रहा है. क़तर पलटवार कर रहा है. UAE पलटवार कर रहा है. कुवैत पलटवार कर रहा है. बहरीन पलटवार कर रहा है.” 

खाड़ी देशों में अमेरिकी सेना और उसके ठिकाने मौजूद हैं, जहां से अमेरिका ने ईरान पर हमले किए हैं लेकिन इन देशों ने खुद इन हमलों में हिस्सा नहीं लिया है. खाड़ी सहयोगी अलग-अलग स्तर पर इस युद्ध का समर्थन करते हैं.

हालांकि, क्षेत्रीय नेता अब मोटे तौर पर अमेरिका की कोशिशों का समर्थन कर रहे हैं. AP की रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र के एक राजनयिक ने बताया कि इस मामले में कुछ मतभेद भी हैं सऊदी अरब और UAE, तेहरान पर सैन्य दबाव बढ़ाने की मांग करने में सबसे आगे हैं.

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यह भी पढ़ें: एक महीने की जंग से ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ा धक्का, सीजफायर के बाद बगावत कर सकती है जनता

राजनयिक ने कहा कि UAE शायद खाड़ी देशों में सबसे ज़्यादा सख़्त रवैया रखने वाले देश के तौर पर उभरा है और वह ट्रंप पर ज़मीनी हमले का आदेश देने के लिए ज़ोर डाल रहा है. कुवैत और बहरीन भी इस विकल्प के पक्ष में हैं. UAE, जिसने ईरान की तरफ़ से 2300 से ज़्यादा मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना किया है, जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंचता जा रहा है, और ज़्यादा चिढ़ता जा रहा है. इन हमलों से मिडिल-ईस्ट में व्यापार और पर्यटन के लिए एक सुरक्षित, बेदाग और समृद्ध केंद्र के तौर पर उसकी छवि धूमिल होने का खतरा पैदा हो गया है.

ओमान और कतर ने कूटनीतिक समाधान का समर्थन किया है. राजनयिक ने कहा कि सऊदी अरब ने अमेरिका को यह तर्क दिया है कि युद्ध को अभी खत्म करने से कोई 'अच्छा समझौता' नहीं हो पाएगा.  सऊदी अरब का कहना है कि युद्ध के फाइल सॉल्यूशन में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निष्क्रिय करना, उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना, प्रॉक्सी समूहों के लिए तेहरान के समर्थन को खत्म करना शामिल होना चाहिए. 

 
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