एक महीने की जंग से ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ा धक्का, सीजफायर के बाद बगावत कर सकती है जनता

ईरान युद्ध की मार झेल रहा है और ऐसी आशंका है कि सीजफायर के बाद देश में विद्रोह छिड़ सकता है. ईरान सरकार पहले से ही इस तरह के प्रदर्शन को रोकने के लिए तैयारी कर रही है. मानवाधिकार समूहों को डर है कि ये बगावत खून-खराबे का रूप भी ले सकती है.

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जंग खत्म होने के बाद ईरान में बगावत हो सकती है. (File Photo: ITG) जंग खत्म होने के बाद ईरान में बगावत हो सकती है. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:14 AM IST

अमेरिका और इजरायल के साथ जंग लड़ते-लड़ते ईरान को एक महीने से ज्यादा हो गया है. जंग की मार झेल रहा ईरान अब अपने देश में विद्रोह रोकने की कोशिश कर रहा है. ईराना गिरफ्तारियों, फांसी और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के जरिए लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहे हैं.

ईरान में हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि चेकपॉइंट्स पर पहरेदारी के लिए बच्चों तक की भर्ती की जा रही है. हालांकि, सख्त चेतावनियों की वजह से देश में विरोध प्रदर्शन नहीं हो रहे हैं. लेकिन युद्ध खत्म होने के बाद पस्त हो चुकी अर्थव्यवस्था से शासन के खिलाफ बड़ा विरोध पैदा हो सकता है.

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ईरान के भीतर और बाहर सक्रिय मानवाधिकार समूहों को डर है कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) के बढ़ते दबदबे की वजह से देश में खून-खराबा हो सकता है.

सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अली अंसारी कहते हैं, 'ईरानी शासन युद्ध से पहले ही गहरी मुसीबत में था और अब उसे बड़ा झटका लग रहा है. राजनीतिक और आर्थिक संकट जो वो पहले झेल रहा था, वो और भी बद्तर होने वाला है.'

बच्चों की भर्ती और सुरक्षा चौकियां

आंतरिक नियंत्रण के लिए रिवोल्यूशनरी गार्ड्स 'बसीज' मिलिशिया ने शहरों के एंट्री गेट पर चेकपॉइंट्स बनाए हैं. मैनपावर की कमी की वजह से प्रशासन ने अब स्वयंसेवकों की उम्र घटाकर 12 साल कर दी है. वरिष्ठ अधिकारी रहीम नदाली ने सरकारी टेलीविजन पर इसकी पुष्टि की.

तेहरान के एक निवासी मोहम्मद (38) कहते हैं कि कंपनियां अब नौकरियां कम कर रही हैं और भविष्य धुंधला दिख रहा है. ईरान में इंटरनेट अक्सर बंद रहता है और आर्थिक नुकसान का कोई सटीक डेटा मौजूद नहीं है, लेकिन ऊर्जा सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को बहुत नुकसान पहुंचा है.

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जनवरी में खराब अर्थव्यवस्था के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों ने हजारों लोगों को मार दिया था. युद्ध शुरू होने के बाद से लोग डरे हुए हैं, हालांकि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर पर तेहरान में कई जगहों पर जश्न मनाया गया था.

बच्चों को फांसी देने की धमकी

'ह्यूमन राइट्स वॉच' के मुताबिक, धार्मिक अल्पसंख्यकों (जैसे बहाई) और हमलों के वीडियो शेयर करने वालों को गिरफ्तार कर रहे हैं. कुर्द, अरब और बलूच बहुल इलाकों में दबाव बहुत ज्यादा है. सुरक्षा बलों ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शन करने वालों के बच्चों को जेल या फांसी हो सकती है और उनके रिश्तेदारों को भी सजा दी जाएगी. विदेश में रहने वाले ईरानियों को भी धमकी दी गई है कि इजरायल या अमेरिका का समर्थन करने पर उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी.

लोगों को डराने के लिए हवाई फायरिंग

सरकार अपने समर्थकों को सड़कों पर उतार रही है ताकि प्रदर्शनकारियों के लिए कोई जगह न बचे. सुरक्षा बल मोहल्लों में घूमकर नारेबाजी करते हैं और हवा में गोलियां चलाकर लोगों को डराते हैं. तेहरान के निवासियों का कहना है कि लोग रात में बाहर निकलने से बहुत डरते हैं. उन्हें डर है कि अगर ये शासन युद्ध के बाद भी टिका रहा, तो वो जनता पर और भी खौफनाक कार्रवाई करेंगे.

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यह भी पढ़ें: ईरान जंग के बीच भारत बना 'स्टेबलाइजर', 40 देशों से तेल खरीदकर पड़ोसी देशों को पहुंचाई मदद

शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू को उम्मीद थी कि हमलों से ईरान का शासन गिर जाएगा. लेकिन ईरानी नेताओं को भरोसा हैं कि वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करके और तेल संकट पैदा करके अपने हमलावरों से लंबे समय तक लड़ सकते हैं.

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