कम्युनिकेशन में आई एक गड़बड़ और ठप हो गया इस देश का रेलवे सिस्टम, घंटों परेशान रहे यात्री

जर्मनी में मंगलवार देर रात जीएसएम-आर कम्युनिकेशन सिस्टम में आई देशव्यापी गड़बड़ी के बाद डॉयचे बान को ट्रेनें रोकनी पड़ीं, बर्लिन समेत कई स्टेशनों पर यात्री फंस गए और लोगों को सूचना डेस्क पर लंबा इंतजार करना पड़ा.

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जर्मनी में एक गड़बड़ पड़ गई रेलवे सिस्टम पर भारी (फाइल फोटो) जर्मनी में एक गड़बड़ पड़ गई रेलवे सिस्टम पर भारी (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:57 PM IST

जर्मनी में मंगलवार देर रात कम्युनिकेशन सिस्टम में आई दिक्कत की वजह से देशभर में ट्रेनों की आवाजाही रोकनी पड़ी. इससे अलग-अलग स्टेशनों पर यात्री फंस गए, कई ट्रेनों को स्टेशन पर ही रोक दिया गया और लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने का तरीका समझने के लिए सूचना डेस्क पर लंबी कतारों में खड़े दिखे.

मुख्य राष्ट्रीय रेल ऑपरेटर डॉयचे बान ने पहली बार आउटेज की जानकारी देने के करीब ढाई घंटे बाद, 1 बजे से कुछ पहले कहा कि समस्या दूर कर ली गई है और सेवाएं धीरे-धीरे फिर से शुरू की जा रही हैं. कंपनी के मुताबिक, देशभर में जीएसएम-आर डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम में दिक्कत आई थी, जिसका इस्तेमाल रेलवे नेटवर्क के अंदरूनी संपर्क के लिए होता है.

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बर्लिन स्टेशन पर यात्रियों की परेशानी

बर्लिन के सेंट्रल स्टेशन पर प्लेटफॉर्म खाली दिखे, डिस्प्ले बोर्ड पर देशभर में बाधा का संदेश नजर आया और यात्री देरी की जानकारी देखते और इंतजार करते दिखे. अमेरिकी शहर अटलांटा की रेल यात्री रेयना घोषाल ने कहा, "हम यहां पहुंचे तो बहुत से नाराज चेहरे दिखे. हम सब अंग्रेजी बोलते हैं और बोर्ड पर सब कुछ डॉइच यानी जर्मन में लिखा था."

रेयना घोषाल अपने एक दोस्त के साथ जर्मन राजधानी की यात्रा के बाद म्यूनिख लौटने की कोशिश कर रही थीं. उन्होंने कहा, "हमने एहतियात के तौर पर 8 बजे सुबह की बस बुक कर ली, लेकिन सच कहें तो हमें नहीं पता क्या हो रहा है. शायद कोई कम्युनिकेशन गड़बड़ी हुई है. ट्रेन कंडक्टर ने बस इतना कहा, 'सब लोग ट्रेन से उतर जाएं,' और हम उतर गए. हमें यह भी नहीं पता कि हमें ट्रेन से क्यों उतारा गया." वहीं रेल यात्री अब्देलअजीज एडम्स ने कहा, "कोई जानकारी नहीं है. बस इतना कहा जा रहा है कि इंतजार कीजिए, इंतजार कीजिए, इंतजार कीजिए, लेकिन हम अब भी यहीं इंतजार कर रहे हैं. मुझे लगता है ट्रेन 12:57 पर आएगी. यह ठीक नहीं है. मुझे फ्रैंकफर्ट जाना है, सफर 4 घंटे का है, लेकिन मैं 4 घंटे से यहां बैठा इंतजार कर रहा हूं. मेरे लिए इसका कोई मतलब नहीं बनता."

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डॉयचे बान ने क्या कहा?

डॉयचे बान ने बाद में कहा कि दिक्कत की वजह का पता लगा लिया गया है, लेकिन यह नहीं बताया कि वजह क्या थी. बिल्ड अखबार ने डॉयचे बान की मुख्य कार्यकारी एवलिन पल्ला के हवाले से कहा कि इमरजेंसी सिस्टम की मदद से हालात को स्थिर किया गया. आउटेज के दौरान कंपनी ने कहा कि यात्रियों को टैक्सी और होटल वाउचर दिए जा रहे हैं और जहां संभव है, वहां स्टेशनों पर खड़ी ट्रेनों में बैठने की सुविधा दी जा रही है. कंपनी ने इस स्थिति के लिए माफी भी मांगी.

हाल के वर्षों में जर्मनी में ट्रेन देरी और बाधा को लेकर शिकायतें बढ़ी हैं. सरकार के स्वामित्व वाली डॉयचे बान ने प्रदर्शन बेहतर करने की कोशिश में, कई साल के कम निवेश के बाद, बड़े रूटों पर गहरे लेकिन बाधा पैदा करने वाले सुधार काम शुरू किए हैं. पहले भी कभी-कभार जर्मनी की रेल व्यवस्था में सभी या ज्यादातर ट्रेनें रुकी हैं, लेकिन तब वजह तकनीकी नहीं बल्कि तूफान रहे हैं. जीएसएम-आर, यानी ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस-रेलवे, रेलवे चलाने के लिए जरूरी वॉइस और डाटा सेवाएं देता है, जिसमें ट्रेन ड्राइवरों और कंट्रोल सेंटर के बीच संपर्क भी शामिल है. यूरोपीय संघ की रेलवे एजेंसी के मुताबिक, इसे 2000 से पूरे यूरोप में रेलवे परिचालन के साझा मानक के तौर पर लागू किया गया है.

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कुल मिलाकर, कम्युनिकेशन सिस्टम में आई एक देशव्यापी गड़बड़ी ने मंगलवार देर रात जर्मनी की रेल सेवाओं को रोक दिया, जिससे यात्री घंटों तक स्टेशनों पर फंसे रहे. बाद में डॉयचे बान ने कहा कि समस्या दूर कर ली गई है और सेवाएं धीरे-धीरे बहाल की जा रही हैं, लेकिन इस बीच यात्रियों की परेशानी साफ तौर पर स्टेशन दर स्टेशन दिखाई दी.

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