'मेरी शक्तियों की कोई सीमा नहीं', ट्रंप ने खुद को बताया हिटलर-नेपोलियन से भी ज्यादा ताकतवर

डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि वे इतिहास के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हैं. उन्होंने कहा कि अगर आज वो नहीं होते तो इजरायल का अस्तित्व न होता.

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ट्रंप ने कहा- प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ उनके संबंध अच्छे हैं. (Photo: Reuters) ट्रंप ने कहा- प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ उनके संबंध अच्छे हैं. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:32 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को दावा किया कि ईरान के साथ जंग शुरू होने के बाद से उन्हें अपनी पावर की कोई लिमिट नहीं दिखी है. जल्द ही आने वाली एक किताब से पता चलता है कि उनके दिमाग में इससे भी बड़ा विचार चल रहा है, वे खुद को इतिहास का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति मान रहे हैं.

माना जा रहा है कि ट्रंप अब केवल राष्ट्रपति पद की सीमाओं को नहीं परख रहे हैं. वह ताकत को विश्व-इतिहास के नजरिए से देख रहे हैं.

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एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, 'अगर मैं न होता, तो आज इजरायल का अस्तित्व ही नहीं होता.' उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ उनके संबंध अच्छे हैं, लेकिन हमें उन्हें थोड़ा समझदार बनाए रखना होगा.

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ट्रंप ने ईरान डील पर भड़के रिपब्लिकन हॉक्स के प्रति भी ऐसा ही रुख अपनाया, उन्होंने कहा कि कुछ लोग जिनकी मैं कभी रिस्पेक्ट करता था, अब नहीं करता. वे हार्डलाइनर्स हैं.

एक्सियोस के मार्क कैपुटो के साथ जल्द ही रिलीज होने वाले एक 45 मिनट के इंटरव्यू में ट्रंप ने बार-बार पावर को सामने वाले के झुकने से मापा है. उन्होंने कहा कि G7 लीडर्स ने उनकी बात का भरोसा कर लिया जब उन्होंने मजाक में कहा 'मैं बॉस हूं', वहीं ट्रंप ने बताया कि इजरायल के मन में उनके लिए बहुत रिस्पेक्ट है और वह वही करेगा जो मैं कहूंगा.

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'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान की मंगलवार को आने वाली किताब रिजीम चेंज में डोनाल्ड ट्रंप गर्व से एक दस्तावेज दिखाते हैं जिसमें तर्क दिया गया है कि वह अटिला द हुन, चंगेज खान, नेपोलियन, स्टालिन, माओ और हिटलर से भी ज़्यादा शक्तिशाली हैं.

लेखक लिखते हैं कि ट्रंप ने इतिहास की कुछ सबसे शक्तिशाली हस्तियों के नाम गिनाए और बताया कि कैसे हर कोई अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर उनकी अपनी ताकत के मुकाबले कमतर था.

ट्रंप ने अलेक्ज़ेंडर द ग्रेट, सीज़र और विलियम द कॉन्करर के बारे में कहा, उनके पास हवाई जहाज़ नहीं थे, आप घूम-फिर नहीं सकते थे. लेखक के अनुसार, उन्होंने नेपोलियन का ज़िक्र भी किया.

हैबरमैन और स्वान लिखते हैं कि सबसे अहम बात माओ, हिटलर और स्टालिन की संगति में उन्हें मिलने वाली साफ़ खुशी थी और कितनी आसानी से उन्होंने उन लोगों के बीच अपनी जगह स्वीकार कर ली जिन्होंने जीत और डर के जरिए दुनिया को नए सिरे से गढ़ा था.

ताकत के उस भव्य सिद्धांत की झलक ट्रंप के एक्सिओस के साथ इंटरव्यू में भी दिखी, जो फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन से लौटने के कुछ घंटों बाद हुआ था. जिसे उन्होंने बहुत प्रभावशाली बताया था.

शी जिनपिंग और पीएम मोदी की तारीफ

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ट्रंप ने चीन के शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम उन विश्व नेताओं के तौर पर लिया जिनका वह सबसे ज़्यादा सम्मान करते हैं. उन्होंने शी की तारीफ काम पर पूरी तरह केंद्रित और पीएम मोदी की तारीफ बहुत सख़्त मिजाज वाले नेता के तौर पर की. वहीं उन्होंने उन नेताओं का नाम बताने से इनकार कर दिया जिन्हें वह सबसे कमज़ोर मानते हैं.

ट्रंप की नजर में, सहयोगी देश केवल तभी मायने रखते हैं जब वे यह स्वीकार करें कि असली ताकत किसके हाथ में है. वहीं अनलिमिटेड पावर के ट्रंप के तमाम दावों के बावजूद, उन्होंने माना कि एक ताकत उन्हें अभी भी रोकती है, वो हैं इकॉनमी.

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