जहां घरों के नीचे लावा की नदी है, आसमान गैस का चैंबर... कहानी दुनिया के सबसे खतरनाक शहर की

सिटी ऑफ वोल्केनो के लोगों के मन में पिछली ज्वालामुखी विस्फोट की कड़वी यादें अब भी ताजा हैं जब लावा की एक विशाल नदी तेजी से उनकी ओर बढ़ चली थी. ताजा सैटेलाइट इमेजरी चेतावनी दे रही है कि पहाड़ के क्रेटर में लावा का स्तर फिर से खतरनाक ऊंचाई तक पहुंच गया है. इस शहर को दो ओर से खतरा है. एक तरफ ज्वालामुखी से दहकता पहाड़ तो दूसरी ओर खतरनाक गैस से भरी झील.

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गोमा की भौगोलिक स्थिति विश्व के किसी भी अन्य शहर से ज्यादा खतरनाक है (Photo-ITG) गोमा की भौगोलिक स्थिति विश्व के किसी भी अन्य शहर से ज्यादा खतरनाक है (Photo-ITG)

संदीप कुमार सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 10 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:00 AM IST

...क्या आप एक ऐसी जगह सो सकते हैं, जहां आपके बिस्तर के चंद किलोमीटर नीचे धरती का सबसे खौफनाक लावा उबल रहा हो और रात में आसमान का रंग खूनी लाल रहता हो? यह किसी डरावनी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि अफ्रीका के लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो के शहर गोमा की कड़वी हकीकत है.

यह शहर 20 लाख बाशिंदों के लिए एक जीता-जागता कुरुक्षेत्र है. जहां हर सुबह का सूरज इस प्रार्थना के साथ देखा जाता है कि आज जमीन न फट पड़े. दुनिया इसे 'सिटी ऑफ वोल्केनो' कहती है. यह एक ऐसे शहर की दास्तान है जहां लोगों में ज्वालामुखी की आग से लड़ने का साहस है, तो लावा की गर्मी झेलने की विवशता भी. यहां कभी भी लावा एक दैत्य की तरह जमीन फाड़कर प्रकट हो सकता है, इसीलिए इसे रहने के लिहाज से दुनिया का सबसे खतरनाक शहर माना जाता है.

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यहां दोतरफा मौत का घेरा है. गोमा की भौगोलिक स्थिति दुनिया के किसी भी अन्य शहर से ज्यादा खतरनाक है.

इस शहर के एक तरफ दहकता 'माउंट न्यारागोंगो' है. शहर के उत्तर में खड़ा यह पहाड़ दुनिया की सबसे बड़ी 'लावा झील' को अपने सीने में दबाए बैठा है. यहां का लावा 'लिक्विड' यानी तरल होता है, जो पानी की तरह बहता है. 2021 में जब इसमें विस्फोट हुआ था, तब लावा 60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से शहर की ओर बढ़ा. लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला. ताजा सैटेलाइट तस्वीरें चेतावनी दे रही हैं कि फिर एक बार पहाड़ के क्रेटर में लावा का स्तर खतरनाक ऊंचाई तक पहुंच गया है.

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इस शहर की दूसरी ओर है खामोश कातिल 'किवु झील'. अगर पहाड़ आग उगलता है, तो बगल में स्थित किवु झील गैस चैंबर है. इसकी गहराइयों में मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड का इतना विशाल भंडार है कि एक छोटा सा भूकंप भी इसे लिम्निक इरप्शन यानी गैस रिसाव में बदल सकता है, जिससे पूरे शहर का दम घुट सकता है.

इस शहर के सर्वाइवल की कहानी अपने आप में एक जंग है. गोमा के लोगों का जज्बा दुनिया को हैरान कर देता है. इतने खतरों के बावजूद यहां की आबादी लगातार बढ़ रही है. यहां के लोगों ने ज्वालामुखी के साथ एक अजीब समझौता कर लिया है. गोमा की सड़कों पर जो काली चट्टानें दिखती हैं, वे जमा हुआ लावा हैं. यहां के लोग इसी लावे को काटकर ईंटें बनाते हैं और अपने घर खड़े करते हैं. जिस आग ने उनका घर खाक किया, उसी की राख से वे नया आशियाना बनाते हैं.

लेकिन इस राख में समृद्धि के बीज भी छुपे हुए हैं. ज्वालामुखी की राख के कारण यहां की मिट्टी इतनी उपजाऊ है कि फसलें बिना खाद के लहलहाती हैं. इसके अलावा, यह एक बड़ा एडवेंचर टूरिस्ट स्पॉट भी है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था चलती है. दुनियाभर से बड़ी संख्या में लोग ज्वालामुखी से फटे पहाड़ देखने यहां आते हैं.

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यहां की लाइफस्टाइल की सबसे अनोखी चीज है 'चुकुडु' यानी लकड़ी से बनी विशाल साइकिल. सड़कों पर सामान ढोते सैकड़ों चुकुडु चालक इस बात का प्रमाण हैं कि यहां की जिंदगी मशीनों से ज्यादा इंसानी पसीने और जिद्द पर टिकी है. यहां की जमीन भले काली और बेरंग है लेकिन यहां की संस्कृति बेहद रंगीन है. महिलाएं चटकीले रंगीन कपड़ों से बनी तोशितेंगी पहनती हैं, जो उनके संघर्षपूर्ण जीवन में रंग भरने का तरीका है. लावा की चट्टानों से बचने के लिए लोग मोटे तलवे वाले रबर बूट पहनते हैं. यहां का मुख्य भोजन 'फुफू' है जो कसावा या मक्के के आटे से बनी होती है और किवु झील की 'साम्बासा' मछलियां हैं. यहां की ज्वालामुखी पहाड़ वाली कॉफी दुनिया भर में मशहूर है.

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एक अनोखी मान्यता भी है यहां के लोगों में. घर बनाते समय लोग नींव में ज्वालामुखी की ठंडी राख डालते हैं, ताकि 'पहाड़ का देवता' शांत रहे. यही विश्वास उन्हें सुकून की नींद सोने देता है. 

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं गोमा को एक 'रुके हुए टाइम बम' के रूप में देखती हैं. भूगर्भशास्त्री चौबीसों घंटे यहां जमीन के अंदर चल रही सिस्मिक घटनाओं पर निगरानी रखते हैं. आधुनिक सेंसर, अर्ली वार्निंग सायरन और रेडियो अपडेट के जरिए लोगों को जानकारी दी जाती है. अब सुरक्षित रूट के 'डिजिटल मैप्स' भी मोबाइल पर उपलब्ध हैं.

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यूरोपीय संघ और विश्व बैंक गोमा के हालात सुधारने पर करोड़ों डॉलर खर्च कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और विद्रोही समूहों के कारण वैज्ञानिक उपकरणों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी रहती है.

दुनिया में कई शहर ज्वालामुखियों के करीब हैं, पर गोमा जैसा जोखिम कहीं नहीं है. उदाहरण-

-नेपल्स (इटली)- यहां निगरानी तकनीक बहुत उन्नत है. लोगों को समय रहते ज्वालामुखी को लेकर चेतावनी मिल जाती है और उन्हें सुरक्षित इलाकों तक पहुंचा दिया जाता है.
-कागोशिमा (जापान)- यहां रोज राख गिरती है, पर लोग हेलमेट और विशेष सुविधाओं के साथ रहते हैं.
-ऑकलैंड (न्यूजीलैंड)- यह शहर 53 छोटे ज्वालामुखियों पर बसा है, लेकिन वे मोनोजेनेटिक हैं यानी एक बार फटकर शांत होने वाले.
-रेक्याविक (आइसलैंड)- जहां फगराडल्सफजाल जैसे ज्वालामुखी हाल के वर्षों में लगातार सक्रिय रहे हैं.
-गोमा (कांगो)- यहां ज्वालामुखी सक्रिय है, लावा सबसे तेज है और साथ में जहरीली गैस की झील भी है.

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यहां हर सुबह पहाड़ से उठने वाले धुएं के साथ शुरू होती है. आग के दरिया और गैस के चैंबर के बीच सर्वाइव कर रहा यह शहर दुनिया को सिखाता है कि जब आपके सामने साक्षात काल खड़ा हो, तब भी हार मानने के बजाय उसके साथ तालमेल बिठाकर जीना ही असली जिंदगी है.

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अगर आप कभी गोमा जाएं, तो वहां की काली सड़कों पर चलते हुए यह जरूर याद रखिएगा कि आप दुनिया के सबसे साहसी लोगों के बीच खड़े हैं, जो जानते हैं कि उनकी अगली सांस शायद इस पहाड़ की कृपा पर टिकी है. लेकिन फिर भी वे मुस्कुराते हैं, व्यापार करते हैं और भविष्य के सपने बुनते हैं.

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