आपने अपने शहर में, दफ्तर, स्कूल-कॉलेज में या कई जगह नो-स्मोकिंग के बोर्ड तो देखे होंगे लेकिन क्या आपने कभी ऐसे शहर की कल्पना की है जहां हर जगह सिगरेट की कश पर कड़ी नजर रखी जाती हो. आपने सिगरेट के धुएं का एक छल्ला बनाया नहीं कि कानूनी कार्यवाही की जद में आ जाएं. फिर आप पर कार्रवाई भी हो और पेनाल्टी भी.
हम बात कर रहे हैं कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में स्थित बर्नबी शहर की. यह शहर अपनी हरियाली के लिए तो मशहूर है ही, लेकिन आज इसकी सबसे बड़ी पहचान इसके सख्त 'एंटी-स्मोकिंग' कानून हैं. यहां की हवा में निकोटिन की जगह कुदरत की ताजगी घुली है. क्योंकि, यहां के सार्वजनिक पार्कों, समुद्र के किनारों या खेल के मैदानों तक में सिगरेट पीने पर सख्त पाबंदी है. आखिर कैसे इस शहर ने खुद को धुएं से मुक्त किया और क्या है इसके पीछे का पूरा सिस्टम? आइए समझते हैं.
कनाडा का बर्नबी शहर वैंकूवर का पड़ोसी है, लेकिन अपनी स्वास्थ्य नीतियों में यह काफी आगे निकल चुका है. यहां का प्रशासन 'पब्लिक हेल्थ' को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करता. शहर प्रशासन ने सार्वजनिक स्थलों पर स्मोकिंग पर पूर्ण पाबंदी लगा दी है. बर्नबी के सभी सार्वजनिक पार्कों, बीच, खेल के मैदानों और गोल्फ कोर्स को पूरी तरह 'स्मोक-फ्री' घोषित किया गया है. यहां आप बेंच पर बैठकर सिगरेट नहीं पी सकते.
सख्त नियम लागू करते हुए पूरे शहर में 6 मीटर का बफर जोन बनाया गया है. इस नियम के मुताबिक, किसी भी सार्वजनिक या व्यावसायिक इमारत के दरवाजे, खिड़की या हवा आने वाले रास्ते के 6 मीटर यानी लगभग 20 फीट के दायरे में धूम्रपान करना कानूनन अपराध है. कई देशों में ई-सिगरेट को छूट मिलती है, लेकिन बर्नबी में वेपिंग और तंबाकू वाली सिगरेट, दोनों पर एक ही कानून लागू होता है.
इस शहर के बारे में कई दिलचस्प तथ्य हैं. बर्नबी एक बहुत ही मल्टी-कल्चरल शहर है. यहां की लगभग 50% से ज्यादा आबादी कनाडा के बाहर पैदा हुई है, जिसकी वजह से यहां आपको दुनिया भर का खाना और संस्कृति देखने को मिलती है. इस शहर में रिहाइश के नियम भी काफी सख्त हैं.
बर्नबी शहर की लगभग 25% जमीन पार्कों और प्राकृतिक क्षेत्रों के लिए आरक्षित है. सिटी काउंसिल का तर्क है कि सिगरेट के फिल्टर न केवल गंदगी फैलाते हैं, बल्कि ये माइक्रोप्लास्टिक का सबसे बड़ा स्रोत हैं जो गलने में 10 साल से ज्यादा का समय लेते हैं. इसके अलावा, सेकंड हैंड स्मोकिंग यानी दूसरों के धुएं से होने वाले नुकसान को रोकना इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य है.
बर्नबी शहर की सड़कों पर नो-स्मोकिंग नियमों का पालन कराने के लिए Bylaw Officers तैनात रहते हैं. यहां जुर्माना काफी भारी है. नियम तोड़ने पर 100 से लेकर 500 कनाडाई डॉलर तक की पेनल्टी लग सकती है. हालांकि, कई लोग इसे 'व्यक्तिगत स्वतंत्रता' का हनन मानते हैं. लेकिन प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि 'आपकी पसंद वहां खत्म हो जाती है, जहां से दूसरे की सेहत को खतरा शुरू होता है.' WHO की रिपोर्ट्स भी इस बात की पुष्टि करती हैं कि स्मोक-फ्री जोन बनाने से दिल और फेफड़ों की बीमारियों के मामलों में भारी कमी आती है.
हालांकि, बर्नबी में लोग प्राइवेट प्लेसेज में सिगरेट पी सकते हैं लेकिन सार्वजनिक जगहों पर पीते हुए पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होती है. इस शहर में पाबंदी के दायरे में ये चीजें हैं- सिगरेट, पाइप, सिगार और ई-सिगरेट. शहर में इस नियम को तोड़ने वालों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी रखी जाती है. बायलॉ ऑफिसर्स तुरंत कार्रवाई करते हैं. इसका असर ये हुआ है कि पार्कों में सिगरेट के कचरे में 70% तक की कमी आ गई है.
क्या भारत के महानगरों के लिए यह मुमकिन है?
बर्नबी जैसे छोटे लेकिन व्यवस्थित शहरों का मॉडल भारत के लिए एक बड़ा सबक है. दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे शहरों में जहां आबादी का घनत्व बहुत ज्यादा है, वहां पूरे शहर को स्मोक-फ्री करना एक बड़ी चुनौती है. लेकिन छोटे स्तर पर पब्लिक पार्कों और कमर्शियल हब्स को पूरी तरह धुंआ-मुक्त बनाकर इसकी शुरुआत की जा सकती है.
बर्नबी जैसे शहर ने साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति हो तो हवा को फिर से साफ बनाया जा सकता है. यह सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ फेफड़े देने का एक वादा है.
हालांकि, बर्नबी दुनिया का अकेला ऐसा शहर नहीं है जो धुएं के खिलाफ जंग लड़ रहा हो. मेक्सिको और भूटान जैसे कई देश भी इसी राह पर हैं जहां 'राइट टू क्लीन एयर' को प्रमुखता दी जा रही है. साल 2023 में मेक्सिको ने दुनिया के सबसे सख्त एंटी-स्मोकिंग कानूनों में से एक लागू किया. अब वहां के पर्यटन स्थलों और होटलों के खुले क्षेत्रों में भी स्मोकिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है.
भूटान ने भी कई साल पहले तंबाकू की बिक्री पर पाबंदी लगाकर दुनिया को चौंका दिया था. राजधानी थिम्पू में सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान करने पर जेल तक का प्रावधान है. वहीं, न्यूजीलैंड ने एक ऐसी योजना पर काम शुरू किया है जिसके तहत भविष्य की पीढ़ियों के लिए सिगरेट की खरीद को पूरी तरह असंभव बना दिया जाएगा. उनका लक्ष्य देश को 'स्मोक-फ्री' बनाना है.
संदीप कुमार सिंह