कहानी दुनिया के सबसे पुराने जिंदा शहर की, जहां 11000 साल से चूल्हा जलना बंद नहीं हुआ

जब धरती पर आखिरी हिमयुग समाप्त हो रहा था और इंसान स्थायित्व की तलाश में भटक रहा था, तब इस जगह पर पहली बार किसी ने जमीन में पत्थर गाड़े और स्थायी घर की नींव रखी. आज से 11,000 साल यानी 9000 ईसा पूर्व. तब से लेकर आज तक यहां कभी चूल्हा जलना बंद नहीं हुआ. हम बात कर रहे हैं दुनिया के सबसे पुराने जिंदा शहर की. यहां की मिट्टी में 20 सभ्यताओं का इतिहास दबा हुआ है. यहां की हर गलियां एक बीते हुए युग का परिचय देती हैं और हर दिशा किसी न किसी साम्राज्य के आने और जाने की पदचाप सुनाती है.

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यह शहर आज एक टीले या छोटी पहाड़ी पर बसे शहर की तरह दिखता है (Photo-ITG) यह शहर आज एक टीले या छोटी पहाड़ी पर बसे शहर की तरह दिखता है (Photo-ITG)

संदीप कुमार सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 26 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:33 AM IST

इतिहास की किताबों में अक्सर बड़े-बड़े साम्राज्यों के उदय और पतन की कहानियां मिलती हैं. लेकिन कुछ जमीन ऐसी होती हैं जो अपनी गोद में सभ्यताओं का इतिहास पालकर रखती हैं. हम बात कर रहे हैं दुनिया के सबसे पुराने 'जिंदा शहर' की. जहां सभ्यताएं भले हीं मिटती गईं लेकिन जिंदगी जारी रही और उन सभी सभ्यताओं की पहचान खुद में समेटती रहीं. जब धरती पर बाकी जगह इंसान ने अभी ठीक से आग जलाना और कपड़े पहनना भी नहीं सीखा था, तब इस शहर की गलियां गुलजार होने लगी थीं, और आज भी ये शहर गुलजार ही है.

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अगर आप यहां गहराई तक खुदाई करना शुरू करें, तो आप सिर्फ मिट्टी नहीं हटा रहे होंगे, बल्कि सभ्यताओं के इतिहास की 20 परतों के हजारों साल और उनकी यादों को खंगाल रहे होंगे. पुरातत्वविदों के लिए यह शहर किसी 'लेयर केक' की तरह है. एक परत हटाओ तो ऑटोमन साम्राज्य मिलता है, उसके नीचे रोमन सड़कें, और सबसे नीचे पहुंचते-पहुंचते पत्थर के वह औजार मिलते हैं जिन्हें इंसान ने तब गढ़ा था जब वह गुफाओं को अलविदा कह रहा था. ये कहानी है जेरिको की. एक ऐसा शहर जो लगभग 11000 सालों से 'जिंदा' है.

लेकिन इतिहास जानने के लिए पहले इस शहर के भूगोल को समझना जरूरी है. यह शहर आज के फिलिस्तीन के वेस्ट बैंक में स्थित है. यह समुद्र तल से लगभग 850 फीट नीचे स्थित है, जो इसे दुनिया का सबसे निचला शहर बनाता है. चारों तरफ रेगिस्तान है, जहां की गर्मी पत्थर तक पिघला दे. लेकिन जेरिको के बीचों-बीच एक कुदरती करिश्मा है- एक झरना. जिसे 'एन एस-सुल्तान' झरने के नाम से जाना जाता है. इसी ने रेगिस्तान के बीच इस शहर को एक हरा-भरा द्वीप बना रखा है.

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यही वह झरना है जिसने 9000 ईसा पूर्व यानी आज से 11 हजार साल पहले भटकते हुए इंसानों को अपनी ओर खींचा था. इतिहास गवाह है कि जहां पानी होता है, वहीं सभ्यताएं जन्म लेती हैं. जेरिको ने दुनिया को सिखाया कि एक स्थायी समाज कैसे बनाया जाता है. तब से लेकर आज तक यहां निरंतर बसावट रही है. यानी यहां कभी सन्नाटा नहीं रहा, कभी चूल्हा जलना बंद नहीं हुआ. एक के बाद एक सभ्यताएं बसती गईं, मिटती गईं और उसके ऊपर नए शहर बसते गए और इसी कारण ये शहर आज दूर से देखने पर एक टीले या छोटी पहाड़ी पर बसे शहर की तरह दिखता है.

जेरिको की तरह दुनिया में और भी कई प्राचीन शहर हैं लेकिन यहां से मिले ऐतिहासिक प्रमाण इसे सबसे पुराने समय से जोड़ते हैं. जेरिको के अलावा सीरिया का अलेप्पो 8,000 BC पुराना है तो भारत का वाराणसी शहर जिसकी जड़ें 3000 ईसा पूर्व तक ले जाती हैं या सीरिया का दमिश्क भी प्राचीन शहर है जहां सभ्याताएं लंबे समय से बसती रही हैं. लेकिन पुरातात्विक खुदाई में जेरिको की शहरी दीवारें दमिश्क से कहीं पुरानी साबित होती हैं.

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11 हजार साल पहले जेरिको में सबसे पहले जब इंसान बसा तो यहां के लोग 'नटूफियन' कहलाते थे. उन्होंने दुनिया को दिखाया कि घुमक्कड़ जीवन छोड़कर एक जगह बसना कैसा होता है. यहां खुदाई में अनाज के बड़े गोदाम मिले हैं, ऊंची दीवारें मिली हैं, गोल घर मिले हैं. लोग मिलकर खेती करते थे और झरने के पानी को सहेजते थे. यह इंसान की पहली कोशिश थी प्रकृति को अपने वश में करने की.

यह शहर क्यों नहीं मिटा?
इतिहास में रोम जला, बेबीलोन मिट्टी में मिल गया, मोहनजोदड़ो वीरान हो गया, लेकिन जेरिको डटा रहा. इसकी वजह सिर्फ पानी नहीं थी, बल्कि इसकी लोकेशन थी. यह प्राचीन व्यापारिक रास्तों का चौराहा था. यहां से नमक, गंधक और कीमती पत्थरों का व्यापार होता था. जो भी साम्राज्य आया, उसने जेरिको पर कब्जा करना चाहा क्योंकि यह रेगिस्तान का गेटवे था. 

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9000 से 7000 BC के नवपाषाण युग में ये शहर और सघन हुआ. फिर पॉटरी काल में लोग मिट्टी के घरों में रहने लगे और खेती करने लगे. कांस्य युग में यहां 3000 से 1500 BC के बीच कनानी सभ्यता थी. जिस दौरान जेरिको एक विशाल किलाबंद शहर बन गया. कनानी लोग यहां के मूल निवासी थे जिन्होंने इसे व्यापार का बड़ा केंद्र बनाया. फिर फारसी और हेलेनिस्टिक काल में यहां सर्दियों के लिए महल और पानी के चैनल बनवाए गए. सिकंदर के साम्राज्य के दौरान भी यह शहर एक महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र रहा.

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रोमन और हेरोडियन काल में यहां रोमन स्टाइल के आलीशान विला, स्विमिंग पूल और गार्डन बनवाए गए. इसके बाद ईसा मसीह के यहां आने का उल्लेख मिलता है. ईसाई प्रभाव के शुरू होने के बाद यहां कई खूबसूरत चर्च बने. फिर बाइजेंटाइन और प्रारंभिक इस्लामी काल में यहां का समाज और बदला. खलीफा हिशाम ने यहां अपना भव्य महल बनवाया, जिसकी मोजेक फर्श आज भी दुनिया में सबसे बेहतरीन मानी जाती है. मध्यकाल में यहां क्रूसेडर्स, अय्यूबीड, मामलुक और अंत में ओटोमन तुर्कों का शासन रहा. हर दौर ने अपनी वास्तुकला और संस्कृति की एक नई परत इस शहर पर चढ़ा दी.

लेकिन आज का जेरिको शहर काफी बदल चुका है. अब यहां आने वाले सैलानी आधुनिक केबल कार में बैठकर शहर का नजारा देखते हैं. यह यूनेस्को से मान्यता प्राप्त हेरिटेज सिटी है. यहां की गलियों में आपको पुरानी मिट्टी के घरों के बजाय पक्की इमारतें, चमकते हुए कैफे और लग्जरी रिजॉर्ट्स मिलेंगे. प्राचीन मीनारों के पास खड़े होकर लोग लाइव वीडियो कॉल कर अपनों को यहां का ऐतिहासिक नजारा दिखाते हैं. इसे 'खजूरों का शहर' भी कहा जाता है. यहां के लोगों का मुख्य व्यवसाय आज भी वही है जो हजारों साल पहले था- खेती और व्यापार. जेरिको के खजूर और केले पूरी दुनिया में अपनी मिठास के लिए मशहूर हैं.

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जेरिको की कहानी केवल पत्थरों, ईंटों या मीनारों की दास्तान नहीं है. यह शहर हमें याद दिलाता है कि साम्राज्य गिर सकते हैं, धर्म बदल सकते हैं, और तकनीकें पुरानी हो सकती हैं, लेकिन जहां पानी और उम्मीद होती है, वहां इंसान अपना घर जरूर बनाता है. जेरिको आज भी खड़ा है, यह बताने के लिए कि बीता हुआ कल कभी खत्म नहीं होता, वह बस हमारे आज की परतों के नीचे दबा होता है. 

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